जबलपुर हाईकोर्ट की सख्ती: सड़क पर नहीं चलेगी पार्किंग, 30 दिन तक वन-वे ट्रायल शुरू करने के आदेश
समझें क्या है पूरा मामला...
- हाईकोर्ट के सामने पार्किंग और ट्रैफिक जाम को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई।
- कोर्ट ने अधिकारियों और वकीलों को पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था अपनाने की सलाह दी है।
- ट्रैफिक पुलिस को अवैध पार्किंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- कलेक्ट्रेट क्रॉसिंग से तहसील क्रॉसिंग तक सड़क 30 दिन के लिए वन-वे होगी।
- फ्लाईओवर निर्माण की मांग पर राज्य सरकार का जवाब आने के बाद फैसला होगा।
वर्षों पुरानी समस्या पर हाईकोर्ट की दखल
जबलपुर हाईकोर्ट के सामने वाली सड़क लंबे समय से भारी ट्रैफिक की समस्या से जूझ रही है। यह शहर के एक हिस्से को दूसरे हिस्से से जोड़ने वाला अहम मार्ग है, इसलिए यहां दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
सड़क के आसपास कई सरकारी दफ्तर, अदालतें और बड़े स्कूल हैं। हाईकोर्ट आने वाले वकील, पक्षकार, सरकारी अधिकारी और आम लोग अक्सर अपने वाहन सड़क किनारे खड़े कर देते हैं। इससे दोनों तरफ अव्यवस्थित पार्किंग हो जाती है और जाम की स्थिति बनती रहती है।
इसी समस्या को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माना कि मौजूदा हालात आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल ने कहा कि ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था सुधारने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
पार्किंग भवन का काम शुरू, लेकिन राहत अभी दूर
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि, अधिवक्ताओं के लिए प्रस्तावित मल्टी-लेवल पार्किंग, लॉयर्स चैंबर और हॉल के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है।
यानी लंबे समय से जिस स्थायी समाधान की मांग की जा रही थी, उसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि निर्माण कार्य पूरा होने में अभी काफी समय लगेगा।
ऐसे में अदालत ने माना कि जब तक नई पार्किंग सुविधा तैयार नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है। इसी कारण कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
सड़क को पार्किंग न बनाएं
हाईकोर्ट ने सबसे पहले उन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर ध्यान दिलाया, जो विभिन्न मामलों में जवाब तैयार करने या सुनवाई में शामिल होने के लिए अदालत आते हैं।
कोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय को निर्देश दिया कि, सभी विभागों के अधिकारियों को एडवाइजरी जारी कर पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था अपनाने के लिए कहा जाए, ताकि उनके वाहन पूरे दिन हाईकोर्ट के सामने सड़क पर खड़े न रहें।
इसी तरह केंद्र सरकार के अधिकारियों के लिए भी सहायक सॉलिसिटर जनरल को निर्देश जारी करने को कहा गया है। अदालत ने उन अधिवक्ताओं से भी सहयोग की अपेक्षा की है जिनके पास ड्राइवर उपलब्ध हैं।
कोर्ट ने उनसे अनुरोध किया कि वे भी वाहनों को दिनभर सड़क पर खड़ा रखने के बजाय पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था अपनाएं। साथ ही वकीलों को कार-पूलिंग करने की सलाह भी दी गई है ताकि पार्किंग पर दबाव कम किया जा सके।
वन-वे ट्रायल का बड़ा फैसला
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट और जिला न्यायालय के सामने यातायात पुलिस की पर्याप्त तैनाती की जाए। साथ ही अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया। कोर्ट ने कलेक्ट्रेट क्रॉसिंग से तहसील क्रॉसिंग तक हाईकोर्ट के सामने वाली सड़क को 30 दिनों के लिए ट्रायल आधार पर वन-वे करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक लागू रहेगी।
माना जा रहा है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो वर्षों से बनी ट्रैफिक अव्यवस्था में काफी हद तक सुधार हो सकता है। कोर्ट ने इस व्यवस्था के परिणामों की समीक्षा के लिए मामले को 20 जुलाई 2026 को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
फ्लाईओवर की मांग पर अभी फैसला बाकी
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के सामने और घमापुर क्रॉसिंग क्षेत्र में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए एक मांग की है। याचिकाकर्ता ने रेलवे स्टेडियम तिराहा से रद्दी चौकी तक फ्लाईओवर निर्माण की बात कही है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि इसी विषय से जुड़ी एक अन्य याचिका पहले से लंबित है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फ्लाईओवर निर्माण जैसे बड़े और दीर्घकालिक समाधान पर फैसला राज्य सरकार का विस्तृत जवाब आने के बाद किया जाएगा।
फिलहाल अदालत का पूरा फोकस तत्काल राहत देने वाले उपायों पर है। ताकि शहरवासियों, स्कूली बच्चों, अधिवक्ताओं और न्यायालय आने वाले लोगों को रोजाना लगने वाले जाम से कुछ राहत मिल सके।
ये खबरें भी पढ़िए...
जबलपुर यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला: India नहीं अब डिग्री पर लिखा होगा Bharat
जीवाजी यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट से झटका, स्थाई कर्मियों को देना होगा 7वें वेतनमान का लाभ
विधायक रामेश्वर शर्मा की सिंधी समाज पर टिप्पणी: हाईकोर्ट ने मांगा निचली अदालत का रिकॉर्ड
इंदौर बड़ा, फिर नाम पीछे क्यों? उज्जैन-इंदौर मेट्रो अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती