जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ का पर्ची घोटाला, तीन गिरफ्तार, दो फरार
समझें क्या है पूरा मामला
- मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ रुपए की कथित गड़बड़ी सामने आई।
- रसीदों और बैंक में जमा रकम के बीच अंतर मिला।
- मामला अप्रैल 2020 से नवंबर 2025 के बीच का है।
- पुलिस ने पांच लोगों पर मामला दर्ज किया है।
- तीन आरोपी गिरफ्तार हैं, जबकि दो की तलाश जारी है।
जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा सामने आया है। करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपए की हेराफेरी ने कॉलेज प्रबंधन को भी सकते में डाल दिया है। मामले की जांच के बीच गढ़ा थाना पुलिस ने कॉलेज परिसर में दबिश दी। पुलिस की कार्रवाई से कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, दो अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।
रसीद में रकम ज्यादा, बैंक खाते में कम निकली
फर्जीवाड़े का खुलासा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के दौरान हुआ। जांच में मनी रसीद बुक और बैंक खातों के रिकॉर्ड में बड़ा अंतर मिला। छात्रों से ली गई फीस की रसीदें काटी गई थीं। मरीजों से मिलने वाली रकम की रसीदें भी दर्ज थीं। लेकिन इन रकमों का पूरा पैसा बैंक में जमा नहीं कराया गया। टैली सॉफ्टवेयर के रिकॉर्ड से मिलान करने पर मामला और गंभीर हो गया।
पांच साल तक चलता रहा कथित वित्तीय खेल
प्रारंभिक जांच के अनुसार यह मामला साल 2020 से 2025 तक का है। इस दौरान मेडिकल कॉलेज की विभिन्न मदों में रकम जमा होती रही। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में रकम की हेराफेरी की गई। मामले में एक महिला कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त अधिकारी समेत पांच लोग नामजद हैं। पुलिस अब पुराने रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की भी जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि एक आरोपी मंदसौर में रह रहा है।
अरविंद धुर्वे, भानू सिंह और विशाल सराठे गिरफ्तार
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। गढ़ा थाना पुलिस ने सोमवार को दबिश देकर तीन आरोपियों को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों में अरविंद धुर्वे, भानू सिंह और विशाल सराठे शामिल हैं। पुलिस अब तीनों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में रकम के लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। फरार दो आरोपियों की तलाश में पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
डीन की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस के अनुसार मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता यानी डीन ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में फीस और मरीजों की रकम में हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने गढ़ा थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेजों और ऑडिट रिपोर्ट को खंगाल रही है। जांच में नई जानकारी सामने आने पर अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया जा सकता है।
ऑडिट रिपोर्ट से खुलेगा फर्जीवाड़े का पूरा राज
अब पुलिस की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस बैंक खातों, रसीद बुक और टैली रिकॉर्ड की जांच कर रही है। कई वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि रकम किस तरह निकाली गई। साथ ही आरोपियों के बीच पैसों के लेनदेन की भी जांच होगी। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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