विधायक अशोक रोहाणी का जन्मदिन, सड़क पर कब्जा... जबलपुर में दिखा चाचा विधायक हैं हमारे जैसा नजारा
बता दें की विधायक ने जन्मदिन पर मुख्य सड़क पर ही मंच और टेंट लगा दिया गया था। इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई और लोग परेशान रहे। चाचा विधायक हैं हमारे जैसे इस सीन ने सादगी की बात पर सवाल खड़ा कर दिया है।
विधायक का जन्मदिन, जनता के हिस्से आया जाम
जबलपुर की कैंट विधानसभा से भाजपा विधायक अशोक रोहाणी के जन्मदिन का जश्न समर्थकों के लिए खुशी का मौका था। वहीं, सड़क से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भारी परेशानी का सबब बन गया था। जन्मदिन मनाने के लिए मुख्य सड़क पर ही मंच और टेंट लगा दिया गया था। इससे सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया था।
मुश्किल यह थी कि सड़क के उस हिस्से में पहले से ही निर्माण कार्य चल रहा था। ऐसे में बची हुई संकरी सड़क पर ही दोनों ओर से आने-जाने वाले वाहनों का दबाव बढ़ गया। नतीजा यह हुआ कि देखते ही देखते यातायात व्यवस्था बिगड़ गई और राहगीर परेशान होने लगे।
एक तरफ फंसी रही जनता, दूसरी तरफ बजता रहा संगीत
मौके की स्थिति और भी हैरान करने वाली तब बनी, जब जाम में फंसी जनता रास्ता तलाशती रही और कार्यक्रम स्थल पर तेज आवाज में संगीत बजता रहा। मंच से विधायक अशोक रोहाणी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने का सिलसिला लगातार जारी रहा।
एक तरफ सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं, तो दूसरी तरफ मंच पर जन्मदिन की प्रशंसा के पुल बांधे जा रहे थे। लोग जाम से निकलने की मशक्कत करते रहे, जबकि कार्यक्रम में मौजूद लोग जश्न में डूबे दिखे। यह नजारा देखकर लोगों को प्रसिद्ध वेब सीरीज चाचा विधायक हैं हमारे की याद आ गई।
सड़क बंद होने से बढ़ा ट्रैफिक का दबाव
राहगीरों के अनुसार, सड़क पर निर्माण कार्य पहले से चल रहा था, फिर भी दोपहिया वाहनों के निकलने की गुंजाइश बनी हुई थी। हालांकि, कार्यक्रम के लिए मंच और टेंट लगाने के बाद सड़क का एक पूरा हिस्सा बंद कर दिया गया था।
इससे यातायात के लिए उपलब्ध रास्ता और अधिक संकरा हो गया था। वाहनों की आवाजाही केवल एक ही लेन से होने लगी, जिससे ट्रैफिक का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था। लगभग दो घंटे तक पुलिस को भी यातायात सामान्य कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
द सूत्र की सूचना पर पहुंची पुलिस
मामले की जानकारी मिलने के बाद, द सूत्र ने कार्यक्रम की अनुमति से संबंधित वीडियो के साथ रांझी एसडीएम गगन बिसेन से संपर्क करने का प्रयास किया था। उन्हें मैसेज भेजा गया और फोन भी किया गया। एसडीएम ने फोन रिसीव नहीं किया, लेकिन संदेश में भेजी गई जानकारी क्षेत्रीय थाना प्रभारी को भेज दी।
इसके तुरंत बाद रांझी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यातायात व्यवस्था संभालने का प्रयास किया। कुछ देर की मशक्कत के बाद कार्यक्रम समाप्त कराया गया और सड़क पर आवागमन पुन: सामान्य किया गया।
थाना प्रभारी बोले- कार्यक्रम समाप्त करा दिया गया है
रांझी थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी ने फोन पर बताया कि कार्यक्रम समाप्त करवा दिया गया है। साथ ही, यातायात सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया है। यानी जिस सड़क पर जन्मदिन का जश्न शुरू हुआ था। वहीं व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस को उतरना पड़ा। प्रशासन को सूचना मिलने के बाद कार्रवाई हुई और आम जनता के लिए रास्ता खोल दिया गया।
विधायक से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब
इस पूरे मामले में विधायक अशोक रोहाणी का पक्ष जानने के लिए द सूत्र ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन पर बात नहीं हो सकी। भेजे गए मैसेज का भी कोई जवाब नहीं मिला। इस कारण, सड़क पर कार्यक्रम के आयोजन और उससे प्रभावित हुए यातायात को लेकर विधायक का पक्ष सामने नहीं आ सका है।
विधायक के जन्मदिन पर समर्थकों का उत्साह अपनी जगह स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक सड़क बंद होने से आम लोगों को हुई असुविधा भी इस पूरी घटना का एक अहम पहलू है।
सवाल वही- जश्न की कीमत जनता क्यों चुकाए?
जन्मदिन मनाना किसी के लिए भी खुशी का अवसर हो सकता है। समर्थक अपने नेता का स्वागत करें, शुभकामनाएं दें और कार्यक्रम आयोजित करें, यह भी स्वाभाविक है। लेकिन जब ऐसे आयोजनों के लिए सार्वजनिक सड़क का रास्ता रोक दिया जाए और आम लोग घंटों जाम में फंसे रहें, तो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठना तय है।
वीआईपी मूवमेंट और जनप्रतिनिधियों के काफिले के कारण जनता का रुकना तो आम बात हो गई है। वहीं, अब स्थिति ऐसी बन रही है कि जबलपुर के निवासियों को नेताओं के जन्मदिन और आगमन के कार्यक्रमों के अनुसार अपना मार्ग और समय तय करना पड़ेगा।
जबलपुर की इस घटना ने एक बार फिर वही यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है- यदि जनप्रतिनिधि का जन्मदिन हो तो मंच पर जश्न अवश्य हो, लेकिन क्या उस जश्न की कीमत सड़क पर फंसी जनता को अपनी परेशानी से चुकानी चाहिए?