जबलपुर नगर निगम में फर्जीवाड़ा, झूठे दस्तावेजों से लाखों की हेराफेरी, EOW की FIR से मचा हड़कंप
News in short
- फर्जी दस्तावेजों के सहारे हुई प्रॉपर्टी टैक्स की चोरी।
- करीब 20.41 लाख रुपये के नुकसान का मामला।
- EOW ने 4 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
- नगर निगम के तत्कालीन राजस्व निरीक्षक पर मिलीभगत के आरोप।
- 2014 से चल रहा था पूरा फर्जीवाड़ा।
News in detail
जबलपुर नगर निगम को फर्जी दस्तावेज दिखाकर प्रॉपर्टी टैक्स में बड़ी चोरी की गई। निगम के राजस्व निरीक्षक की मिलीभगत से इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। यह पूरा मामला साल 2014 से शुरू हुआ, जब आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर प्रॉपर्टी टेक्स निर्धारण में हेराफेरी की। जांच में सामने आया कि यह एक दिन की गड़बड़ी नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा सुनियोजित षड्यंत्र था। इसमें सरकारी नियमों को दरकिनार कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
प्रशासन को किया गुमराह
आरोपियों तीरथदास नागदेव, संजना रतलानी और सुनील रतलानी ने आवेदन किया। उन्होंने नेपियर टाउन स्थित भवनों के संबंध में खुद को उपयोगकर्ता बताया। एक झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें भवन निर्माण वर्ष गलत दिखाया गया। वास्तविक निर्माण वर्ष छिपाकर टैक्स निर्धारण में गड़बड़ी की गई। इससे शासन को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।
बिना रजिस्ट्री के टैक्स निर्धारण
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने संबंधित संपत्ति की न तो विधिवत रजिस्ट्री कराई और न ही लीज ट्रांसफर कराया। इसके बावजूद उन्होंने खुद को अधिकृत उपयोगकर्ता बताकर संपत्ति टैक्स निर्धारण करवा लिया। इस पूरे मामले में नियमों का उल्लंघन करते हुये सुनियोजित धोखाधड़ी की गई।
राजस्व निरीक्षक की भूमिका पर सवाल
इस मामले में नगर निगम के तत्कालीन राजस्व निरीक्षक डॉ. दीपनारायण मिश्रा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि उन्होंने दस्तावेजों की सही जांच किए बिना ही आरोपियों द्वारा दी गई जानकारी को स्वीकार कर लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने कर राशि का समायोजन भी कर दिया, जिससे शासन को मिलने वाला राजस्व कम हो गया।
शासन को 20 लाख से ज्यादा का नुकसान
EOW की जांच रिपोर्ट के अनुसार, रजिस्ट्री और लीज प्रक्रिया पूरी करने पर शासन को 20.41 लाख रुपये मिलते। आरोपियों ने मिलीभगत कर इस रकम का गबन किया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
80 लाख की संपत्ति पर फर्जी खेल
जिस संपत्ति को लेकर मामला सामने आया है, उसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 80 लाख रुपये है। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार इसे आंकी गई है। मूल स्वामिनी से अनुबंध किया गया था, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इसके बावजूद संपत्ति का उपयोग और टैक्स निर्धारण कई सवाल खड़े करता है।
EOW ने कसा शिकंजा, जांच जारी
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने IPC की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध क्रमांक 53/2026 दर्ज किया है। निरीक्षक भूमेश्वरी चौहान की जांच के बाद चारों आरोपियों पर शिकंजा कस गया है। EOW अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिससे और बड़े खुलासे संभव हैं।
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