जबलपुर पुलिस की स्क्रिप्टेड रेड का वीडियो वायरल, हंसना मत... सब कुछ असली लगना चाहिए!

Neel Tiwari | Jun 24, 2026, 19:04 IST
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जबलपुर के अधारताल थाने का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें हवलदार महिला आरोपी को कैमरे के सामने डायलॉग और एक्टिंग सिखाते दिख रहे हैं। थाना प्रभारी ने इसे सही ठहराया।

पांच पाइंट में समझें पूरा मामला

  • अधारताल थाना क्षेत्र के करोंदा नाला इलाके का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
  • वीडियो में हवलदार सुग्रीव तिवारी महिला को कार्रवाई की पूरी स्क्रिप्ट समझाते दिखे।
  • महिला को बताया गया कि पुलिस आने पर क्या बोलना है और कैसे व्यवहार करना है।
  • थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार ने माना कि महिला को पहले समझाया गया था।
  • वायरल वीडियो के बाद ई-साक्ष्य ऐप के नाम पर होने वाली रिकॉर्डिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए।

जबलपुर के अधारताल थाना क्षेत्र से सामने आए एक वायरल वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक पुलिसकर्मी अवैध शराब के साथ पकड़ी गई महिला को पूरी स्क्रिप्ट समझाता दिखाई दे रहा है कि कैमरे के सामने क्या बोलना है, कहां खड़ा होना है और कैसे प्रतिक्रिया देनी है।



सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि थाना प्रभारी ने भी इस स्क्रिप्टिंग को गलत मानने के बजाय उसे उचित ठहराया, जिसके बाद पुलिस की कार्यशैली पर नई बहस शुरू हो गई है।



कैमरे के सामने शुरू हुई 'री-टेक' वाली पुलिसिया कार्रवाई

जबलपुर में पुलिस की एक कार्रवाई का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो देखने के बाद ऐसा लग रहा है मानो किसी अपराध नियंत्रण अभियान की नहीं बल्कि किसी शॉर्ट फिल्म की शूटिंग चल रही हो।



वीडियो में पुलिसकर्मी पहले महिला को बताते हैं कि उसे कहां खड़ा होना है, पुलिस कैसे आएगी, क्या पूछेगी और जवाब में उसे क्या बोलना है। इसके बाद पूरी घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया जाता है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि यदि कार्रवाई असली थी तो फिर उसके लिए स्क्रिप्ट लिखने और डायलॉग रटवाने सहित एक्टिंग की क्लास देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी।



"हंसना मत"... पुलिसकर्मी ने दिया एक्टिंग का प्रशिक्षण

वायरल वीडियो में अधारताल थाने में पदस्थ हवलदार सुग्रीव तिवारी कथित तौर पर महिला को पूरी कहानी समझाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वह कहते सुनाई देते हैं कि पुलिस आएगी, बोरी देखकर पूछेगी कि इसमें क्या है, फिर महिला आरक्षक बताएंगी कि इसमें शराब है। इसके बाद महिला को जवाब देना होगा कि वह शराब लाकर बेचती है।



इतना ही नहीं, महिला को यह तक समझाया गया कि कैमरे के सामने हंसना नहीं है ताकि सब कुछ वास्तविक दिखाई दे। वीडियो देखने वाले लोगों का कहना है कि यह सीन किसी पुलिस कार्रवाई से ज्यादा एक निर्देशित नाटक जैसा नजर आता है।



शराब की बरामदगी असली, लेकिन वीडियो ने खड़े कर दिए बड़े सवाल

जानकारी के अनुसार करोंदा नाला क्षेत्र में रहने वाली सुनीता बंशकार को पुलिस ने अवैध शराब के साथ पकड़ा था। शराब की बरामदगी और कार्रवाई को लेकर फिलहाल कोई विवाद नहीं है। सवाल उस प्रक्रिया पर उठ रहे हैं जिसमें कार्रवाई के बाद महिला को दोबारा खड़ा कर पूरी घटना को रिक्रिएट कराया गया।



अब आरोप लग रहे है कि यदि पुलिस वास्तविक कार्रवाई का वीडियो रिकॉर्ड नहीं कर सकी तो बाद में स्क्रिप्टेड वीडियो बनाकर उसे साक्ष्य या रिकॉर्ड के रूप में प्रस्तुत करना पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है।



थाना प्रभारी ने दिया हैरान करने वाला बयान

मामले में सबसे हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब अधारताल थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार से इस वीडियो के बारे में चर्चा की गई। उन्होंने वीडियो 3 से 4 दिन पुराना बताते हुए यह स्वीकार किया कि महिला को पहले समझाया गया था। उनका तर्क था कि ई-साक्ष्य ऐप में कार्रवाई का वीडियो दर्ज करना आवश्यक होता है और महिला ग्रामीण क्षेत्र की होने के कारण उसे पहले पूरी बात समझाई गई थी।



हालांकि इस सफाई ने विवाद को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि हर कार्रवाई से पहले पात्रों को डायलॉग और सीन समझाए जाते हैं तो ई-साक्ष्य ऐप में अपलोड होने वाले वीडियो वास्तविक घटनाओं का रिकॉर्ड हैं या फिर पहले से तैयार की गई प्रस्तुतियां।



वायरल वीडियो ने खोल दी पुलिस की 'इमेज मैनेजमेंट' की पोल

यह वीडियो सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है बल्कि इसने पुलिस की उस कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है जिसमें वास्तविक कार्रवाई से ज्यादा उसकी प्रस्तुति महत्वपूर्ण दिखाई देने लगती है।



सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या पुलिस अब अपराधियों को पकड़ने के साथ-साथ कैमरे के लिए दृश्य भी तैयार कर रही है। यदि ऐसा है तो यह केवल एक थाने का मामला नहीं बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है जहां दस्तावेजीकरण और वास्तविकता के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है।



वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि जनता को असली पुलिसिंग दिखाई जा रही है या फिर पुलिसिंग की आड़ में एक्टिंग स्कूल चलाया जा रहा है।



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