जबलपुर के स्कूल में भेदभाव के आरोप: छात्रों ने कहा- गोवा ट्रिप पर नहीं गए तो अंक काटे
जबलपुर के आधारताल थाना क्षेत्र स्थित लिटिल किंगडम स्कूल में हाल ही में एक गंभीर विवाद सामने आया है। 10वीं कक्षा के छात्रों ने स्कूल प्रबंधन पर आंतरिक मूल्यांकन में भेदभावपूर्ण अंक देने का आरोप लगाया है। यह मामला उस समय सामने आया, जब कुछ छात्रों ने स्कूल द्वारा आयोजित गोवा ट्रिप में भाग नहीं लिया था और उन्हें कथित तौर पर आंतरिक मूल्यांकन में कम अंक दिए गए थे।
क्या था मामला?
इस प्राइवेट स्कूल द्वारा आयोजित गोवा ट्रिप में छात्रों से 15-20 हजार रुपए की राशि वसूल की गई थी, जिसमें प्रत्येक छात्र से 4 हजार रुपए का शुल्क भी लिया जा रहा था। इसके बावजूद कई छात्रों ने इस ट्रिप में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि उन्हें यह खर्च भारी लग रहा था। जिन छात्रों ने ट्रिप में हिस्सा लिया, उन्हें 20 में से पूरे 20 अंक मिल गए, जबकि जिन छात्रों ने इसमें भाग नहीं लिया, उन्हें केवल 10 अंक ही दिए गए।
इस भेदभावपूर्ण स्थिति ने अभिभावकों को बेहद नाराज कर दिया, और उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और पेरेंट्स एसोसिएशन के सदस्य भी शामिल हुए।
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अभिभावकों का विरोध
गुस्साए अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को गलत तरीके से अंक दिए हैं और उनके अधिकारों का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रिप में हिस्सा न लेने वाले छात्रों के साथ भेदभाव करना उचित नहीं है।
स्कूल में भड़के इस विवाद को लेकर पेरेंट्स एसोसिएशन और एबीवीपी ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाई। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाओं से छात्रों में गलत संदेश जाता है और यह उनकी पढ़ाई में बाधा डालता है।
पुलिस की कार्रवाई
मामला बढ़ते देख स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी और स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास किया। साथ ही, अभिभावकों ने शिक्षा अधिकारी को एक लिखित ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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अभिभावकों की मांग
अभिभावकों ने कहा कि यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की जाती तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों के साथ हुए इस कथित अन्याय को ठीक किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जाए।
शैक्षिक संस्थानों में भेदभाव का खतरा
यह घटना एक बार फिर से यह सवाल उठाती है कि क्या शैक्षिक संस्थानों में छात्रों के बीच भेदभाव का माहौल बनाना उचित है? क्या स्कूलों को छात्रों को समान अवसर देने चाहिए, या फिर व्यक्तिगत गतिविधियों पर उनके अंक आधारित करने चाहिए? ऐसे मामलों में शैक्षिक और कानूनी संस्थानों का दायित्व है कि वे निष्पक्षता और न्याय सुनिश्चित करें।