जबलपुर में आरटीओ की अवैध वसूली का भंडाफोड़, महिला आरक्षक और साथी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

Neel Tiwari | Mar 25, 2026, 17:47 IST
Photograph: (the sootr)
JABALPUR.जबलपुर में अवैध वसूली के एक मामले का पर्दाफाश हुआ है। लोकायुक्त की टीम ने महिला आरक्षक और उसके साथी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने कई बार इनकी शिकायत की थी।

News in short

  • बरगी हाईवे पर आरटीओ की अवैध वसूली का बड़ा खुलासा
  • महिला आरक्षक श्वेता अहिरवार और साथी मोहित साहू गिरफ्तार
  • रिश्वत लेते लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा
  • ट्रांसपोर्टर की शिकायत पर हुई ट्रैप कार्रवाई
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज

Intro

बरगी हाईवे पर वाहन निकालने के नाम पर चल रही अवैध वसूली का बड़ा खुलासा हुआ है। लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए महिला आरक्षक और उसके साथी को रंगे हाथों पकड़ा। शिकायत के बाद हुई इस कार्रवाई ने आरटीओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



News in detail

हाईवे पर चल रहा था ‘रिश्वत का खेल

जबलपुर के नागपुर-जबलपुर हाईवे पर बरगी के पास आरटीओ की अवैध वसूली का बड़ा मामला सामने आया है। यहां वाहन निकालने के नाम पर खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही थी। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े वाहन मालिकों का आरोप है कि यह वसूली लंबे समय से चल रही थी। हर बार मोटी रकम देने के बाद ही गाड़ियों को आगे बढ़ने दिया जाता था।



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लोकायुक्त के ट्रैप में फंसे RTO कर्मी

शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त एसपी अंजू पटले के निर्देश पर टीम ने पहले मामले का सत्यापन किया, जो सही पाया गया। इसके बाद 25 मार्च को विशेष टीम गठित कर मौके पर ट्रैप बिछाया गया, जहां आरटीओ की महिला आरक्षक श्वेता अहिरवार और उसके साथी मोहित साहू को 4500 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया।



ट्रांसपोर्टर की शिकायत पर हुई कार्रवाई

शिकायतकर्ता प्रशांत दत्तात्रेय जाधव, जो ट्रेलर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हैं, ने लोकायुक्त को बताया कि उनकी 8-10 गाड़ियां लगातार विभिन्न राज्यों में चलती हैं। बरगी के पास हर बार आरटीओ कर्मचारी उनकी गाड़ियों को रोककर अवैध वसूली करते थे। इस बार जब उनकी गाड़ी रोकी गई और 4500 रुपए मांगे गए तो उन्होंने इसकी शिकायत कर दी।



लंबे समय से जारी थी अवैध वसूली

ट्रांसपोर्टरों और ड्राइवरों का कहना है कि जबलपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी आरटीओ के नाम पर अवैध चेकिंग और वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। आरोप यह भी है कि बिना किसी आधिकारिक आदेश के चेकिंग लगाई जाती है और विरोध करने पर दबाव बनाया जाता है।



प्राइवेट कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

इस मामले में एक प्राइवेट व्यक्ति मोहित साहू की गिरफ्तारी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ऐसे निजी लोगों को साथ रखकर दबाव बनाया जाता है। जरूरत पड़ने पर वे विवाद की स्थिति भी पैदा करते हैं, जिससे वाहन मालिक और ड्राइवर डरकर पैसे देने को मजबूर हो जाते हैं।



भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई

लोकायुक्त टीम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 12, 13(1)B और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। ट्रैप दल में कई निरीक्षक और अधिकारी शामिल रहे, जिन्होंने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया।



कार्रवाई से सिस्टम को मिला सख्त संदेश

इस कार्रवाई के बाद यह साफ संकेत गया है कि अवैध वसूली करने वाले अब बच नहीं पाएंगे। लंबे समय से परेशान ट्रांसपोर्टरों के लिए यह कार्रवाई राहत की खबर है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और सख्ती देखने को मिलेगी।



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