राजनाथ सिंह करेंगे टी-72 प्रोजेक्ट लॉन्च, VFJ जबलपुर को 600 करोड़ की सौगात
समझें क्या है पूरा मामला...
- जबलपुर में कल राजनाथ सिंह करेंगे बड़ा शिलान्यास।
- 600 करोड़ की परियोजना से बदलेगी VFJ की तस्वीर।
- टी-72 टैंकों के लिए बनेगा अत्याधुनिक ओवरहाल प्लांट।
- रक्षा मंत्री के दौरे से पहले सुरक्षा हुई कड़ी।
- आत्मनिर्भर भारत को जबलपुर से मिलेगी नई ताकत।
जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री को बड़ी परियोजना मिली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27 अगस्त को जबलपुर आएंगे। वे टी-72 टैंक ओवरहाल परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। परियोजना की लागत करीब 600 करोड़ रुपए है। इससे टैंकों के रखरखाव और मरम्मत की क्षमता बढ़ेगी।
राजनाथ सिंह का दौरा
जबलपुर के लिए 27 अगस्त खास दिन रहेगा। केंद्रीय सुरक्षा संस्थान व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर वीएफजे (VFJ) में बड़ा आयोजन होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार सुबह करीब 10 बजे विशेष विमान से दिल्ली से जबलपुर पहुंचेंगे।
माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव भी उनके साथ कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। व्हीकल फैक्ट्री के अधिकारियों के अलावा आयुध निर्माणी खमरिया और गन कैरिज फैक्ट्री के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
गेट नंबर-1 से सुबह करीब 10 बजे मुख्य अतिथियों का आगमन शुरू होगा। इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम प्रस्तावित है।
क्या है परियोजना
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू हो रही है। इसकी लागत करीब 600 करोड़ रुपए आंकी गई है। जिला प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
इस परियोजना के तहत टी-72 टैंकों के तकनीकी उन्नयन और ओवरहाल के लिए आधुनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। इससे टैंकों के रखरखाव और मरम्मत की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
नए संयंत्र से भारी सैन्य वाहनों और टैंकों के ओवरहाल में लगने वाला समय भी कम होगा। इससे सेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
टी-72 टैंक की खासियत
टी-72 भारतीय सेना का प्रमुख युद्धक टैंक माना जाता है। यह मूल रूप से सोवियत डिज़ाइन का टैंक है, जिसे बाद में भारत में लाइसेंस के तहत बनाया गया।
भारत में इसे टी-72 अजेय के नाम से भी जाना जाता है। यह दशकों से भारतीय थल सेना के आर्मर्ड बेड़े की रीढ़ रहा है। इसमें शक्तिशाली मुख्य तोप और मजबूत कवच सुरक्षा दी गई है।
लंबे समय तक सेवा में रहने के कारण इन टैंकों को नियमित तकनीकी उन्नयन और ओवरहाल की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि जबलपुर में यह विशेष परियोजना शुरू की जा रही है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
रक्षा मंत्री के दौरे को देखते हुए फैक्ट्री परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रवेश द्वार पर आने-जाने वाले लोगों की सघन निगरानी की जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर भी जरूरी अनुमतियां और दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। कार्यक्रम स्थल के आसपास पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ाई गई है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी ताकत
इस परियोजना से रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। सैन्य उपकरणों के रखरखाव के लिए अब देश के भीतर ही बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
आने वाले वर्षों में व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है। यह परियोजना क्षेत्र में रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर भी ला सकती है।
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