जबलपुर में दूषित पेयजल पर NGT में याचिका, 47% पानी पीने योग्य नहीं

Neel Tiwari | Feb 17, 2026, 14:36 IST
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जबलपुर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर मामला अब गंभीर हो गया है। शहर की 80% पाइपलाइन, नालों और सीवेज के बीच से गुजरने का आरोप लगाए हैं। साथ ही NGT में याचिका दायर की गई है। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने जबलपुर के नागरिकों को भी चिंता में डाल दिया है।

News In Short

  • जल जीवन मिशन रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर में 47% पानी पीने योग्य नहीं है।
  • 80% पाइपलाइनें नाली-नालों के बीच से गुजर रही हैं।
  • मामला भोपाल में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच तक पहुंच गया है।
  • इंदौर में भी दूषित पानी से दर्जनों मौतें हुई थी ।
  • जबलपुर में पहले भी STP और नाले के पानी से सिंचाई के मामले हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं।

News In Detail

NGT में पहुंचा जबलपुर का जल संकट

जबलपुर में पानी की सप्लाई को लेकर अब तक की बड़ी शिकायत सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नजपांडे और रजत भार्गव ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच (भोपाल ) में याचिका दायर की है।



याचिका में कहा गया है कि नगर निगम की लगभग 80% पाइपलाइन नालों और सीवेज से होकर गुजर रही हैं। इससे पाइपलाइन में लीक होने पर गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल जाता है। यह स्थिति अब नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है।





47% पानी पीने योग्य नहीं

याचिका में बताया कि जल जीवन मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर में घरों तक पहुंचने वाला पानी 47% पानी पीने लायक नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में कहा है कि नालों का पानी बहुत गंदा है। इसके बावजूद शहर की 40-50 साल पुरानी पाइपलाइनों को अब तक नहीं बदला गया है। जानकारी के अनुसार इनकी औसत आयु सिर्फ 20 साल मानी जाती है।



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पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं ऐसे मामले

जबलपुर में जल प्रदूषण का मामला पहली बार नहीं है जो अदालत तक पहुंचा है। इससे पहले भी नालों के गंदे पानी से सब्जियों की सिंचाई का मामला अदालत तक पहुंचा था। साथ ही STP प्लांट के पूरी क्षमता से काम न करने जैसे बड़े मुद्दे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुके हैं। कोर्ट ने तब भी प्रशासन से जवाब मांगा था। इसके बाबजूद जमीनी स्तर पर कोई खास सुधार नहीं हुआ है।



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इंदौर की त्रासदी ने बढ़ाई चिंता

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का मामला हाल ही में सामने आया है। यहां के पीने के पानी में सीवरेज का पानी मिल गया था। इससे डायरिया और ई. कोलाई जैसे संक्रमण फैल गए थे। जनवरी 2026 से लेकर फरवरी तक दर्जनों लोग इसकी चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। पाइपलाइन में लीकेज और शौचालयों से गंदा पानी घुसने की वजह से ये सब हुआ है। इसका असर खासकर गरीब परिवारों, बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई है।



क्या जबलपुर दोहराएगा इतिहास?

इंदौर में हुई घटना ने अब जबलपुर के लोगों में चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जल्द ही पुरानी और खराब हो चुकी पाइपलाइनों को बदलना होगा। साथ ही सीवेज के पानी की समस्या का ठोस हल निकालना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो गया तो बीमारियों का बड़ा प्रकोप सामने आ सकता है।



अब निगाहें NGT की सुनवाई और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या जबलपुर इंदौर जैसी त्रासदी से पहले जागेगा। या फिर NGT के सख्त हस्तक्षेप का इंतजार करेगा?



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