जैन समाज की रावण से तुलना करने वाले निष्कासित नेता फिर भाजपा के साथ
पांच पाइंट में पूरा मामला
- जैन समाज पर विवादित टिप्पणी के बाद निष्काषित हुए थे जागृति शुक्ला और शैलेंद्र राजपूत
- दोनों नेता हाल ही में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के स्वागत कार्यक्रम में दिखाई दिए।
- भाजपा संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि उनका निष्कासन अब तक वापस नहीं लिया गया है।
- उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र में जैन समुदाय का बड़ा वोट बैंक
- दोनों नेताओं की भाजपा कार्यक्रमों में मौजूदगी पर खड़ा सवाल
भाजपा से निष्कासित दो नेता जितिन प्रसाद के स्वागत कार्यक्रम में नजर आए। इन नेताओं ने जैन समाज पर विवादित टिप्पणी की थी। उनके कार्यक्रम में दिखने पर भाजपा के अंदर ही सवाल उठ गए। उत्तर-मध्य विधायक अभिलाष पांडे के कार्यक्रम में भी दोनों मौजूद रहे। जैन समाज में नाराजगी फिर उभर आई है।
जैन समुदाय में सवाल उठ रहे हैं कि यदि निष्कासन अब भी प्रभावी है तो दोनों नेता भाजपा के कार्यक्रमों में कैसे शामिल हुए? उत्तर-मध्य विधानसभा के विधायक अभिलाष पांडे की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
निष्कासन के बाद फिर चर्चा में आए दोनों नेता
जैन समाज के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में भाजपा से निष्कासित किए गए पूर्व मंडल अध्यक्ष जागृति शुक्ला और वरिष्ठ नेता शैलेंद्र राजपूत फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो और वीडियो में दोनों नेता केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के कार्यक्रम में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद भाजपा के अनुशासन और निष्कासन की कार्रवाई को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने ही वायरल किए फोटो-वीडियो
दिलचस्प बात यह है कि दोनों नेताओं की मौजूदगी का मुद्दा विपक्ष ने नहीं बल्कि भाजपा के ही कुछ कार्यकर्ताओं ने उठाया है। वायरल तस्वीरों में दोनों नेता विधायक कार्यालय में आयोजित स्वागत कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री का अभिनंदन करते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद आयोजित महिला स्वरुचि भोज कार्यक्रम में भी उनकी उपस्थिति दर्ज हुई। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर ही चर्चा शुरू हो गई कि आखिर निष्कासित नेता संगठन के कार्यक्रमों का हिस्सा कैसे बने।
संगठन का दावा- निष्कासन अब भी प्रभावी
भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि दोनों नेताओं का निष्कासन अभी तक वापस नहीं लिया गया है। ऐसे में उनकी कार्यक्रमों में मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। पार्टी के जानकारों का कहना है कि भाजपा में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में निष्कासित सदस्यों को संगठनात्मक कार्यक्रमों में औपचारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया जाता। यही कारण है कि इस घटनाक्रम को लेकर पार्टी के भीतर भी असहजता दिखाई दे रही है।
जैन समाज की नाराजगी फिर सामने आई
जब जैन समाज पर विवादित टिप्पणी का मामला सामने आया था, तब पूरे शहर में व्यापक नाराजगी देखने को मिली थी। समाज के लोगों ने इसे अपनी धार्मिक और सामाजिक भावनाओं पर आघात बताया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उसी नाराजगी को शांत करने और डैमेज कंट्रोल के उद्देश्य से भाजपा ने तत्काल निष्कासन की कार्रवाई की थी। अब जब वही चेहरे फिर भाजपा नेताओं के साथ सार्वजनिक मंचों पर दिखाई दे रहे हैं, तो जैन समाज में पुरानी नाराजगी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।
उत्तर-मध्य विधानसभा में विधायक अभिलाष पांडे पर भी उठे सवाल
इस पूरे विवाद के केंद्र में उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक अभिलाष पांडे भी आ गए हैं। यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहां जैन समुदाय का प्रभावशाली और निर्णायक वोट बैंक माना जाता है। वायरल तस्वीरों सहित फेसबुक में पोस्ट किए गए वीडियो में विधायक कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम और उसके बाद स्वरुचि भोज में निष्कासित नेताओं की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं।
जैन समाज के कुछ लोगों का कहना है कि एक तरफ समाज के खिलाफ टिप्पणी करने वालों के साथ सार्वजनिक रूप से मंच साझा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के धार्मिक कार्यक्रमों और संतों के समक्ष सम्मान प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे राजनीतिक संदेशों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
मुनि विद्यासागर के नाम से बना मंडल और समाज के विरुद्ध टिप्पणी
मामले को और संवेदनशील इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई थी, वे उस मंडल से जुड़े थे जिसका नाम जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज के नाम पर रखा गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ऐसे पदाधिकारियों द्वारा जैन समाज को लेकर की गई टिप्पणी ने उस समय विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया था। यही कारण है कि अब उनकी सार्वजनिक सक्रियता को लेकर समाज के भीतर सवाल और अधिक तीखे हो गए हैं।
यदि निष्कासन कायम है तो कार्यक्रम में प्रवेश कैसे?
पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही बनकर उभरा है कि यदि दोनों नेताओं का निष्कासन अब भी प्रभावी है तो वे भाजपा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में किस हैसियत से शामिल हुए? क्या उन्हें औपचारिक निमंत्रण दिया गया था, या वे व्यक्तिगत स्तर पर पहुंचे थे?
फिलहाल इन सवालों का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल तस्वीरों और वीडियो ने भाजपा के अनुशासन, निष्कासन की कार्रवाई और उसके राजनीतिक संदेश को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है। उत्तर-मध्य विधानसभा में जैन समुदाय की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग पकड़ सकता है।
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