इस जन्माष्टमी करें मध्य प्रदेश के इन 5 ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन, मिलेगा श्रीकृष्ण का आशीर्वाद
Kaushiki | Aug 16, 2025, 07:48 IST
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सांदीपनि आश्रम, उज्जैनImage credit : Kaushiki
ये उज्जैन का वही पवित्र स्थान है जहां भगवान श्री कृष्ण, उनके भाई बलराम और मित्र सुदामा ने गुरु महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की थी। माना जाता है कि यहीं पर भगवान कृष्ण ने 64 कलाएं और वेदों का ज्ञान सीखा था। आश्रम के पास एक अंकपट भी है जहां कहा जाता है कि कृष्ण ने सबसे पहले अंक लिखने का अभ्यास किया था।
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इस्कॉन मंदिर, उज्जैनImage credit : Kaushiki
उज्जैन में स्थित यह मंदिर श्री राधा मदन मोहन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर की वास्तुकला बहुत ही आकर्षक है, जहां सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है और दीवारों पर भगवान कृष्ण के जीवन की कहानियों को दर्शाया गया है। यहां हर दिन भक्तों के लिए कीर्तन, भजन और आध्यात्मिक होते हैं जो कृष्ण भक्ति को बढ़ावा देते हैं।
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गोपाल मंदिर, इंदौरImage credit : Kaushiki
इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र में बना यह (इंदौर गोपाल मंदिर) मंदिर होलकर परिवार ने बनवाया था, जो अपनी कला और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की स्थापत्य शैली में मालवा और मराठा शैली का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।
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राधा कृष्ण मंदिर, जबलपुरImage credit : Kaushiki
जबलपुर के संस्कारधानी क्षेत्र में स्थित यह मंदिर गोंड काल की स्थापत्य शैली को दर्शाता है, जिसकी छत लकड़ी के गाटरों पर टिकी है। इस मंदिर में स्थापित भगवान कृष्ण (राधाकृष्ण) की मूर्ति 500 साल पुरानी है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।
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द्वारकाधीश बड़ा गोपाल मंदिर, उज्जैनImage credit : Kaushiki
यह मंदिर उज्जैन के पुराने शहर में स्थित है और करीब 200 साल पुराना है। यह अपने भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, जिसके गर्भगृह में लगा रत्न जड़ित द्वार महमूद गजनवी द्वारा लूटा गया था। यहां जन्माष्टमी के साथ-साथ 'हरिहर का पर्व' भी धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें भगवान महाकाल और गोपाल कृष्ण का मिलन होता है।
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जन्माष्टमी का पर्वImage credit : Kaushiki
मध्य प्रदेश में कई ऐसे कृष्ण मंदिर हैं जहां जन्माष्टमी (Janmashtami) का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इनका इतिहास और महत्व भी काफी गहरा है। ऐसे में इस जन्माष्टमी (16 अगस्त) आप भी इन प्रमुख मंदिरों में (Janmashtami Celebrations) दर्शन को जा सकते हैं।