MP में बढ़ रहा जापानी बुखार का खतरा, 22 जिलों में वायरस सक्रिय, जानवरों में भी संक्रमण की पुष्टि
MP News: मध्य प्रदेश में जापानी बुखार की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। प्रदेश के 22 जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस का खतरा बढ़ गया है। हाल ही में हुई रिसर्च में जानवरों में भी वायरस की पुष्टि हुई है।
क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस?
जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis) एक वायरल मस्तिष्क ज्वर है, जो क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छरों से फैलता है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर असर डालता है और समय रहते इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
रिसर्च से जुड़े अहम तथ्य
22 जिलों के 761 मरीजों के ब्लड सैंपल की जांच हुई।
99 मरीजों में जापानी बुखार की पुष्टि, यानि 13% पॉजिटिव केस।
संक्रमितों में 73.74% बच्चे शामिल हैं।
100 सूअरों में से 7 और 99 घोड़ों में से 8 में वायरस की पुष्टि।
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किन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा
- शहडोल
- अनूपपुर
- उमरिया
- मंडला
- बालाघाट
- सिवनी
- डिंडोरी
- सागर
- सतना
- रीवा
वायरस के फैलाव के 4 बड़े कारण
- क्यूलेक्स मच्छरों की बड़ी संख्या
- संक्रमित जानवर जैसे सूअर और घोड़े
- अनुकूल पर्यावरणीय स्थितियां (जैसे वर्षा, नमी)
- पड़ोसी जेई प्रभावित राज्यों की सीमाएं ये भी पढ़ें: HMPV वायरस का बढ़ा खतरा, इस राज्य में मास्क लगाना जरूरी, वरना पड़ेगी...
जानवरों से फैलने का तरीका
जब मच्छर पहले संक्रमित जानवर (सूअर/घोड़ा) को काटते हैं और फिर इंसानों को काटते हैं, तो यह वायरस इंसानों में प्रवेश कर जाता है। इसीलिए जानवरों की भूमिका वायरस ट्रांसमिशन में महत्वपूर्ण है।
बीमारी के लक्षण
- तेज बुखार
- सिरदर्द और उल्टी
- दौरे और बेहोशी
- गर्दन में अकड़न
बचने के उपाय
- स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छर नियंत्रण के उपाय तेज करने चाहिए।
- बच्चों में बुखार और दिमागी लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
- सूअरों और घोड़ों के संपर्क में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
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