जयश्री गायत्री फूड के पूर्व सीईओ की करोड़ों की प्रॉपर्टी अटैच, हेराफेरी में थे शामिल
समझें क्या है पूरा मामला...
- जयश्री गायत्री फूड पर मिलावटी डेयरी प्रोडक्ट सप्लाई करने का आरोप है।
- ED ने कंपनी से जुड़ी 3 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है।
- इसमें एक मकान, भूखंड और बैंक बैलेंस शामिल हैं।
- पूर्व CEO सुनील कुमार त्रिपाठी पहले ही इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
- फर्जी चालानों से माल बेचकर पैसा कई फर्जी संस्थाओं में भेजा जाता था।
ED की कार्रवाई की वजह
यह मामला हबीबगंज पुलिस स्टेशन और EOW (आर्थिक अपराध शाखा) में दर्ज FIR से जुड़ा है। इसी FIR पर संज्ञान लेकर ईडी ने जांच शुरू की है।
जांच में कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों की भूमिका सामने आई हैं। कंपनी के पूर्व CEO सुनील भी डेयरी उत्पादों की हेराफेरी में सीधे शामिल पाए गए हैं।
फर्जी चालानों का खेल
जांच के अनुसार उत्पादों (दूध और डेयरी प्रोडक्ट) को कुछ खास फर्मों के जरिए बेचा जाता था। इनमें मे. सियाजीत एक्सपोर्ट और मे. सुगम फूड्स जैसी फर्मों के नाम शामिल हैं।
बिक्री के लिए फर्जी चालान और बिल तैयार किए जाते थे। इस तरह असली कारोबार को कागजों में अलग दिखाया जाता था।
पैसे की हेराफेरी कैसे हुई
जानकारी के अनुसार बिक्री से मिलने वाला पैसा सीधे खाते में नहीं रखा जाता था। उसे कई फर्जी संस्थाओं के बीच घुमाया जाता था।
इस प्रक्रिया से पैसे का असली स्रोत छिपाना आसान हो जाता था। ED की जांच अब इन सभी फर्जी संस्थाओं पर भी केंद्रित है।
संपत्ति में क्या-क्या शामिल
ED ने जो संपत्ति अटैच की है उसमें एक मकान और एक भूखंड शामिल है। इसके अलावा कुछ बैंक खातों का बैलेंस भी जब्त किया गया है।
यह संपत्ति सुनील कुमार त्रिपाठी, उनके परिवार के सदस्यों और उनके नियंत्रण वाली संस्थाओं के नाम पर थी।
पहले भी हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में ईडी पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। कंपनी के डायरेक्टर किशन मोदी और पूर्व CEO सुनील कुमार त्रिपाठी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
दोनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी अब अन्य जुड़े लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
क्लर्क की 1.47 करोड़ संपत्ति भी अटैच
इसी बीच भोपाल से एक और बड़ा मामला सामने आया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग में पदस्थ रहे उच्च श्रेणी क्लर्क हीरो केसवानी की संपत्ति पर भी ED ने कार्रवाई की है।
ED ने एक करोड़ 47 लाख रुपए की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की है। यह कार्रवाई EOW में दर्ज FIR के आधार पर हुई।
286 गुना ज्यादा संपत्ति का खुलासा
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। साल 2005 से 2022 के बीच केसवानी ने अपनी वैध आय से 286 गुना ज्यादा संपत्ति बनाई।
यह आंकड़ा बताता है कि मामला कितना बड़ा हो सकता है। ED अब इस संपत्ति के पूरे स्रोत की जांच कर रहा है।
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