झाबुआ में जनजातीय कार्य विभाग अधिकारियों पर EOW की FIR, 2.98 करोड़ के घोटाले का आरोप

Sanjay Dhiman | Jan 22, 2026, 17:19 IST
Photograph: (the sootr)
झाबुआ में जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों पर 2.98 करोड़ की सामग्री खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप। EOW ने आरोपियों पर FIR दर्ज कर जांच शुरू की।

NEWS IN SHORT

  • झाबुआ में 2.98 करोड़ की सामग्री खरीद में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।
  • EOW ने जनजातीय कार्य विभाग के 4 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
  • 2013-14 से 2019-20 तक सामग्री खरीद में नियमों का उल्लंघन किया गया।
  • जांच में अधिकारियों पर भुगतान और खरीद में गड़बड़ी करने का आरोप है।
  • आरोपियों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया।

NEWS IN DETAIL

इंदौर स्थित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने झाबुआ के जनजातीय कार्य विभाग में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। इस मामले में 2.98 करोड़ रुपए की सामग्री खरीद में अनियमितताएं पाई गई हैं। ये अनियमितताएं 2013 से 2020 के बीच की हैं। EOW ने इन आरोपों पर FIR दर्ज कर ली है।



किन-किन पर दर्ज हुई FIR?

EOW ने इस पूरे मामले में विभाग के चार कद्दावर पूर्व अधिकारियों को नामजद किया है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने आपसी सांठ-गांठ कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। आरोपियों की सूची कुछ इस प्रकार है:



  • प्रशांत आर्य: ये उस समय विभाग के सहायक आयुक्त के पद पर तैनात थे।
  • भारत सिंह: तत्कालीन सहायक परियोजना प्रशासक (आदिवासी विकास) के रूप में कार्यरत थे।
  • अयुब खान: तत्कालीन भंडार शाखा प्रभारी (लेखापाल) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
  • राघवेन्द्र सिसोदिया: ये उस वक्त बजट शाखा के प्रभारी के पद पर पदस्थ थे।

इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420), अमानत में खयानत (धारा 409), और आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत भी शिकंजा कसा गया है।



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क्या हुआ था?

आरोप है कि इन अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए सामग्री खरीदी। 2013-14 में छात्रों के लिए सामग्री खरीदी गई थी, लेकिन संबंधित दस्तावेजों पर छात्रों के हस्ताक्षर नहीं थे। इसके बाद 2014-15 से 2019-20 तक खरीदी में भी कई अनियमितताएं पाई गईं। कई बार मांग पत्र बिना सही हस्ताक्षर के स्वीकार किए गए।



प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्य

साथ ही, जांच में यह भी पाया गया कि कुछ सामग्री का क्रय बिना किसी ठेकेदार से तय किए गया। इसके अलावा, 2.98 करोड़ की राशि स्थानीय विक्रेताओं को संदिग्ध रूप से दी गई।



इन धाराओं में मामला दर्ज

आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोक सेवक द्वारा विश्वास का उल्लंघन), 120B (सांठ-गांठ) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(1)(d), 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।



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EOW की कार्रवाई

अब EOW ने इन आरोपों की गहराई से जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों पर लगे आरोपों की पुष्टि होने पर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



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