छतरपुर में कलेक्टर से बोले जीतू पटवारी; जब तक नौकरी में रहोगे, यह दिन याद रखूंगा
News in short
- कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी की कलेक्टर से फोन पर तीखी बातचीत वायरल हुई।
- पटवारी ने प्रशासन का विरोध करते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व में घुसने की कोशिश की।
- पटवारी ने आरोप लगाया कि केन-बेतवा परियोजना का ठेका भाजपा के कार्यालय निर्माण से जुड़ा है।
- विरोध प्रदर्शन में महिलाओं ने सरकार की नीतियों का विरोध किया और अपनी मांगें रखी।
- इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है, विशेषकर आदिवासी अधिकारों और विस्थापन मुद्दों पर।
News in Detail
छतरपुर में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने कलेक्टर आईएएस पार्थ जायसवाल से फोन पर तीखी बातचीत की। पटवारी ने कहा, यह अपमान याद रखूंगा, जब तक आप नौकरी करेंगे, तब तक आज का दिन याद रखूंगा। यह बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। यह राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
प्रशासन का विरोध
पटवारी ने पन्ना टाइगर रिजर्व के गेट पर बैरिकेडिंग के बावजूद अपनी टीम के साथ अंदर जाने का प्रयास किया। प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा का हवाला देकर रोकने की कोशिश की और मुकदमे की धमकी दी। लेकिन पटवारी ने गेट फांदकर अंदर प्रवेश किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें जनता के बीच भेजा है और वे आदिवासियों के हक के लिए सौ बार जेल जाने को तैयार हैं।
जमीन के बदले जमीन
पटवारी ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को केन-बेतवा लिंक परियोजना का ठेका मिला है, वही भाजपा का करोड़ों का कार्यालय बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के ऐशो-आराम की कीमत आदिवासियों के जीवन को प्रभावित करके चुकाई जा रही है। उन्होंने विस्थापितों के लिए मकान के बदले मकान और जमीन के बदले जमीन की मांग की।
ऑडियो को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कांग्रेस कार्यकर्ता इसे प्रशासन की संवेदनहीनता और प्रशासनिक दबाव मानते हुए इस पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास करार दे रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों से मुलाकात
मंगलवार को पटवारी धोड़न बांध में विस्थापितों से मिले। प्रशासनिक विरोध के बावजूद उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। महिलाओं ने कहा कि वे जब तक अमित भटनागर को नहीं देखेंगे, तब तक वहां से नहीं हटेंगे और न ही अन्न-पानी ग्रहण करेंगे।
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