एमपी में एक साल में कम हुए 2,426 स्कूल, जीतू पटवारी ने मांगा सीएम मोहन से जवाब

Sandeep Kumar | Sept 04, 2026, 17:54 IST
एमपी में एक साल में कम हुए 2,426 स्कूल
मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की संख्या को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठाए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा।


पत्र में सरकारी स्कूलों की संख्या घटने का मुद्दा उठाया।


एक साल में 2,426 स्कूल कम होने का दावा किया।


स्कूल मर्ज नीति पर सरकार से जवाब मांगा।


बच्चों की पहुंच और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।



पटवारी ने सरकार से मांगा जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा है। यह पत्र मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की घटती संख्या को लेकर है। एक साल में प्रदेश में 2,426 स्कूल कम हो गए हैं। इसी दौरान शिक्षकों की संख्या बढ़ गई है। पटवारी ने इस पूरे मामले पर सरकार से साफ जवाब मांगा है।



मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की घटती संख्या फिर सुर्खियों में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने इसे सामान्य पत्र नहीं बल्कि प्रश्न-पत्र बताया है। पटवारी का कहना है कि सवाल सिर्फ ड्रॉपआउट का नहीं है। असली सवाल यह है कि बच्चे स्कूल तक पहुंच क्यों नहीं पा रहे। उन्होंने साफ कहा कि सरकारी स्कूल बच्चों के घरों से दूर होते जा रहे हैं। स्कूलों के बंद होने और आपस में मर्ज होने की नीति पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए हैं।



2,426 स्कूल कम, मांगा जवाब

पटवारी ने पत्र में आंकड़े रखे हैं। साल 2024-25 में मध्यप्रदेश में 1 लाख 22 हजार 120 स्कूल थे। साल 2025-26 में यह संख्या घटकर 1 लाख 19 हजार 694 रह गई। यानी एक साल में 2,426 स्कूल कम हुए।



पटवारी ने पूछा कि इनमें से कितने स्कूल पूरी तरह बंद हुए। कितने स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया गया। यह फैसला किन प्रशासनिक आदेशों के तहत लिया गया। उन्होंने जिला, विकासखंड और स्कूल स्तर पर पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही यह भी पूछा कि विलय के बाद बच्चों को स्कूल तक कितनी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।



गरीब और ग्रामीण बच्चों पर असर

कांग्रेस नेता ने कहा कि स्कूलों के विलय का सबसे बड़ा असर गरीब और ग्रामीण बच्चों पर पड़ता है। दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी स्कूल ही शिक्षा का सबसे आसान जरिया है। पटवारी ने पूछा कि बंद हुए स्कूलों के बच्चों के लिए बस, साइकिल या सुरक्षित आवागमन की क्या व्यवस्था की गई है।



उन्होंने यह भी सवाल किया कि कितने बच्चों ने सिर्फ इसलिए स्कूल छोड़ दिया क्योंकि नया स्कूल बहुत दूर हो गया। कई परिवारों के लिए रोज इतनी दूर बच्चे को भेजना आर्थिक रूप से मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा की चिंता भी एक बड़ी वजह बताई गई है।



ड्रॉपआउट के आंकड़ों पर सवाल

पटवारी ने पत्र में यूडीआईएसई प्लस (UDISE+ – यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) के आंकड़ों का भी जिक्र किया है। उन्होंने पूछा कि स्कूल से बाहर बच्चे, ड्रॉपआउट बच्चे और दूसरे स्कूल में गए बच्चों की अलग-अलग गिनती क्या है।



उन्होंने 15 लाख बच्चों के पढ़ाई से दूर होने के दावे पर भी सवाल उठाया। पटवारी ने प्रमाणित प्रशासनिक रिकॉर्ड और जिलेवार सूची सार्वजनिक करने को कहा है। उनका कहना है कि अगर यह आंकड़ा सही नहीं है तो सरकार असली संख्या क्यों नहीं बताती।



शिक्षकों की तैनाती पर भी सवाल

पटवारी ने एक और अहम आंकड़ा सामने रखा है। साल 2024-25 में प्रदेश में शिक्षकों की संख्या 6 लाख 82 हजार 492 थी। साल 2025-26 में यह बढ़कर 6 लाख 92 हजार 820 हो गई। सवाल यह है कि स्कूल कम होने के बावजूद इतने शिक्षकों की तैनाती कहां हुई।



उन्होंने बंद हुए स्कूलों की जमीन, भवन, फर्नीचर और प्रयोगशालाओं के इस्तेमाल पर भी जवाब मांगा है। साथ ही पूछा कि स्कूल बंद करने से सरकार को असल में कितनी बचत हुई। बच्चों की पढ़ाई पर पड़े सामाजिक और आर्थिक असर का आकलन हुआ या नहीं, यह भी एक बड़ा सवाल है।



तीन साल तक स्कूल न बंद करने की मांग

पत्र के अंत में पटवारी ने सीधी मांग रखी है। उन्होंने पूछा कि क्या अगले तीन साल तक कोई सरकारी स्कूल बंद या मर्ज नहीं किया जाएगा। खासकर वे स्कूल, जिनसे बच्चों की दूरी बढ़ती हो।



उन्होंने हर बंद या मर्ज स्कूल का सार्वजनिक सामाजिक ऑडिट कराने की भी मांग की है। इससे पता चलेगा कि फैसले के बाद बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर क्या असर पड़ा। पटवारी का कहना है कि स्कूलों की संख्या घटाना और बाद में परिवारों को दोष देना, शिक्षा नीति नहीं बल्कि जिम्मेदारी से बचने का तरीका है।



FAQ

  1. मध्यप्रदेश में एक साल में कितने स्कूल कम हुए हैं?
    मध्यप्रदेश में 2024-25 से 2025-26 के बीच 2,426 स्कूल कम हुए हैं। यह जानकारी जीतू पटवारी के पत्र में दी गई है। सरकार से इसका ब्योरा मांगा गया है।
  2. स्कूलों को लेकर जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव से क्या मांग की है?
    पटवारी ने स्कूलों के बंद और मर्ज होने की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा है। उन्होंने अगले तीन साल तक कोई स्कूल न बंद करने की मांग भी की। साथ ही सामाजिक ऑडिट कराने को कहा है।

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