BJP में वापस लौटे पार्षद जीतू यादव का हुआ मोहभंग, विवाद के बाद पार्टी का चिन्ह और लोगो हटाया

Sanjay Gupta | Sept 04, 2026, 15:01 IST
पार्षद जीतू यादव
इंदौर के वार्ड 24 से पार्षद जीतू यादव (जाटव) अभी 17 दिन पहले 18 अगस्त को ही पार्टी में वापस लिए गए हैं। वहीं उन्हें एमआईसी मेंबर नहीं बनाया गया। इस बार अब उनका पार्टी से मोहभंग हो गया है।

बीजेपी के वार्ड 65 से पार्षद कमलेश कालरा और वार्ड 24 के पार्षद जीतू यादव के बीच का विवाद लगातार सुर्खियों में रहा है। जनवरी 2025 में कालरा के घर हुए हमले के बाद जीतू को बीजेपी ने 6 साल के लिए बाहर किया था। इसके साथ ही उनका एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) का पद भी चला गया। पुलिस से क्लीन चिट मिली तो पार्टी ने भी 18 अगस्त 2026 को उन्हें वापस ले लिया लेकिन एमआईसी पद नहीं दिया। इसका असर है कि जीतू का बीजेपी से मोहभंग होने लगा है। हाल ही में बीजेपी नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा से भी कहासुनी हुई।

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जीतू ने बीजेपी का लोगो, नाम हटाया

जीतू ने सोशल मीडिया में अपने प्रोफाइल से बीजेपी का नाम और चिन्ह सभी हटा लिया है। पहले वह खुद को बीजेपी का पार्षद लिखते थे। अब केवल वार्ड 24 पार्षद लिखा है। इसके साथ ही लोगो में जय भीम, जय भारत लिखते हुए, जय गुरु रविदास लिखा है। बीजेपी को पूरी तरह से गायब कर दिया है। बीजेपी का नाम हटाने के सवाल पर जीतू ने द सूत्र से कहा कि वह हमेशा से ही पार्टी के हैं। वहीं पार्टी का लोगो और नाम हटाने की बात पर वह कन्नी काट गए।

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नगराध्यक्ष से भी हो चुकी बहस

सूत्रों के अनुसार सप्ताह भर पहले ही बीजेपी दफ्तर में नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा के साथ जीतू का विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर ही इसमें विवाद हुआ और कहासुनी हुई।

जीतू की वापसी के दिन ही प्रभार चौहान को दिया

बता दें कि जीतू की वापसी 18 अगस्त को दोपहर में हुई। जीतू के साथ ही बीजेपी विधायक मेंदोला, नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक गोलू शुक्ला सभी भोपाल में थे। यहां से प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर जीतू का निलंबन आदेश रद्द करने का पत्र जारी किया। इसी दिन ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने विद्युत व वर्कशॉप काम का प्रभार एमआईसी मेंबर निरंजन सिंह चौहान को दे दिया। यही प्रभार पहले जीतू यादव के पास था और उनके एमआईसी से बाहर होने के बाद महापौर संभाल रहे थे। जीतू की वापसी वाले दिन ही प्रभार चौहान को दिया गया।

एमआईसी पद नहीं दे रही पार्टी

दरअसल बीजेपी प्रदेश के नेताओं ने तय किया है कि जीतू को एमआईसी पद नहीं दिया जाएगा। विधायक मालिनी गौड़ तो जीतू की वापसी के ही खिलाफ थीं। पार्षद कमलेश कालरा ने भी पार्टी को पत्र लिखकर उन्हें वापस लेने पर आपत्तिजताई थी। इसी बीच संभागीय प्रभारी रणबीर रावत इंदौर आए। उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा को कह दिया कि जीतू को एमआईसी में अभी नहीं लेना है।

एमआईसी का एक पद अभी भी रिक्त

निगम एक्ट के अनुसार एमआईसी में महापौर सहित कुल 11 मेंबर हो सकते हैं। जीतू यादव को हटाए जाने के बाद अभी भी दस ही मेंबर हैं और एक पद 19 माह से रिक्त है। यानी पार्टी ने एक एमआईसी की गुंजाइश अभी तक बनाए रखी है।

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