जीवाजी यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट से झटका, स्थाई कर्मियों को देना होगा 7वें वेतनमान का लाभ
समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर हाईकोर्ट ने जीवाजी यूनिवर्सिटी की रिव्यू पिटीशन की खारिज
- स्थाई कर्मियों को 7वें वेतनमान के अनुरूप न्यूनतम संशोधित वेतन देने का आदेश बरकरार
- कर्मचारियों को एरियर (बकाया राशि) मिलने का रास्ता साफ हुआ।
- कोर्ट ने पूर्व के लक्ष्मीनारायण बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले के निर्णय को आधार माना।
- यूनिवर्सिटी को जल्द से जल्द आदेश लागू करना ही होगा।
जीवाजी यूनिवर्सिटी के स्थाई कर्मचारी लंबे समय से 7वें वेतनमान के इंतजार में थे। कर्मचारी संघ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने पहले ही कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया था। यूनिवर्सिटी ने रिव्यू याचिका दाखिल की, जो अब खारिज हो गई। अब कर्मचारियों को संशोधित वेतन और बकाया एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
कर्मचारी संघ की बड़ी जीत: हक के लिए लड़ी लड़ाई
यह पूरी लड़ाई जीवाजी यूनिवर्सिटी कर्मचारी संघ ने अपने हक के लिए लड़ी। कर्मचारियों ने अपनी जायज मांगों को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। साल 2016 की सरकारी नीति के तहत इन्हें स्थाई दर्जा मिला था। लेकिन प्रशासन इन्हें संशोधित न्यूनतम वेतनमान देने में आनाकानी कर रहा था। कर्मचारी संघ ने साफ कहा कि यह सीधे-सीधे भेदभाव का मामला है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: पुराने आदेश को रखा बरकरार
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने पुराना उदाहरण देते हुए यूनिवर्सिटी के तर्क खारिज किए। 'लक्ष्मीनारायण बनाम मध्यप्रदेश राज्य' मामले का हवाला दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा कि स्थाई कर्मियों को पूरा लाभ मिलना चाहिए। कर्मचारियों को 7वें वेतनमान के साथ पूरा एरियर भी मिलेगा।
अब आगे क्या होगा: यूनिवर्सिटी को ढीली करनी होगी जेब
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा। यूनिवर्सिटी को अपने खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान करना होगा। कर्मचारियों के चेहरों पर लंबे समय बाद खुशी दिखाई दी है। एरियर का पैसा मिलने से सैकड़ों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। प्रशासन को अब जल्द से जल्द आदेश लागू करना ही होगा।
यह खबरें भी पढ़ें...
ग्वालियर के जनकगंज थाने में ASI का रिश्वत लेते वीडियो वायरल, SP ने किया लाइन अटैच
ग्वालियर में चोरी के शक में पड़ोसी ने दी 8 साल की बच्ची को मौत की सजा!
ग्वालियर में पत्नी से डरा पति पहुंचा पुलिस के पास, एसएसपी से लगाई जान की गुहार
ग्वालियर नगर निगम में फर्जीवाड़ा: दादा को पिता बताकर ली अनुकंपा नियुक्ति