हाईकोर्ट बोला, स्कूल की बदहाली दिखाने वाले पत्रकार पर FIR किलिंग द मैसेंजर जैसी
एक पत्रकार ने सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था पर रिपोर्ट बनाई थी। रिपोर्टिंग के चार दिन बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस एफआईआर पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। साथ ही कहा कि यह मैसेंजर को मारने जैसा मामला है।
पत्रकार ने क्या देखा था स्कूल में
पत्रकार अमित यादव पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेगरिया मऊ, गोसाईंगंज गए थे। वहां उन्होंने स्कूल की हालत खुद देखी। शौचालय खराब पड़े थे। बच्चों के लिए पीने के पानी का भी इंतजाम नहीं था। उन्होंने इस बारे में स्कूल के कुछ शिक्षकों से बातचीत की। इसी बातचीत और मौके पर देखी गई हकीकत के आधार पर उन्होंने रिपोर्ट तैयार की।
चार दिन में दर्ज हुई FIR
रिपोर्ट सामने आने के महज चार दिन बाद 24 अगस्त को अमित यादव के खिलाफ गोसाईंगंज थाने में एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज कर ली गई। यह मुकदमा बीएनएस (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 223, 353 और 356 के तहत दर्ज हुआ। पत्रकार ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि स्कूल की कमियां उजागर करने वाले पत्रकार पर कार्रवाई करना गलत है। बेंच ने इसे 'किलिंग द मैसेंजर' जैसा बताया। यानी सच दिखाने वाले को ही निशाना बना दिया गया।
कोर्ट ने रिपोर्टिंग और एफआईआर दर्ज होने के बीच के कम समय को भी अहम माना। बेंच ने कहा कि यह समय बताता है कि कार्रवाई जल्दबाजी में और सोच समझकर की गई। इसी आधार पर कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे बदले की भावना से उठाया गया कदम बताया।
अफसरों को शपथ पत्र का आदेश
कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को निजी शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही संबंधित स्कूल की मौजूदा स्थिति की तस्वीरें भी पेश करने को कहा गया है। कोर्ट स्कूल परिसर की असल हालत जानना चाहता है। तब तक एफआईआर के आधार पर आगे की कोई कार्रवाई नहीं होगी।
पत्रकारिता और सुरक्षा का सवाल
यह मामला सिर्फ एक स्कूल या एक पत्रकार तक सीमित नहीं है। यह सवाल उठाता है कि जमीनी हकीकत दिखाने वाले पत्रकारों को किस तरह का माहौल मिल रहा है। कोर्ट की यह टिप्पणी आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बन सकती है।
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