जेयू कुलपति की नियुक्ति की योग्यता को चुनौती, हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- कुलपति प्रोफेसर राजकुमार आचार्य की नियुक्ति चुनौती दी गई।
- याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है।
- UGC पात्रता नियमों पर सवाल उठाए गए।
- दस वर्ष अनुभव और ग्रेड-पे को लेकर दावा हुआ।
- हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
किसने दी है याचिका
राकेश कुमार जैन ने यह याचिका मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में दायर की है। याचिका में जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार आचार्य की नियुक्ति को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कृष्ण कार्तिकेय शर्मा ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नियुक्ति यूजीसी (UGC – University Grants Commission) के नियमों के अनुसार नहीं हुई है।
क्या है योग्यता से जुड़ा विवाद
यूजीसी विनियमों के अनुसार कुलपति पद के लिए प्रोफेसर के रूप में कम से कम 10 साल का अनुभव जरूरी है। साथ ही 10 हजार रुपये की ग्रेड-पे पर कार्यरत होना भी अनिवार्य शर्त है।
याचिका में दावा किया गया कि प्रो. आचार्य ये दोनों शर्तें पूरी नहीं करते। इसके बावजूद उनकी नियुक्ति कर दी गई। इससे पात्र उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
नियुक्ति रद्द करने की मांग
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि नियुक्ति को अवैध घोषित कर निरस्त किया जाए। उनका कहना है कि नियमों की अनदेखी कर यह नियुक्ति की गई है। इससे उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ, जो सभी शर्तें पूरी करते थे। याचिका में इस असमानता को मुख्य आधार बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
ग्वालियर हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को प्रथम दृष्टया विचारणीय माना। कोर्ट ने राज्य सरकार और कुलपति प्रो. राजकुमार आचार्य को नोटिस जारी किया। दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा। इसके बाद कोर्ट मामले की आगे सुनवाई करेगा।
विश्वविद्यालयों के लिए क्यों अहम है यह मामला
इस याचिका का नतीजा सिर्फ जीवाजी विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा। यह अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। यूजीसी नियमों के पालन को लेकर भी यह मामला एक मिसाल बन सकता है। इसलिए शिक्षा जगत में इस पर करीबी नजर रखी जा रही है।
FAQ
- जेयू कुलपति की नियुक्ति पर क्या आरोप लगा है?
याचिका में कहा गया है कि प्रो. राजकुमार आचार्य यूजीसी की अनिवार्य योग्यता पूरी नहीं करते। उनके पास 10 साल का जरूरी अनुभव और तय ग्रेड-पे नहीं है। इसी आधार पर नियुक्ति को चुनौती दी गई है। - हाईकोर्ट ने अब तक क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और कुलपति को नोटिस जारी किया है। दोनों पक्षों को चार सप्ताह में जवाब देना है। जवाब आने के बाद आगे की सुनवाई होगी। - याचिकाकर्ता की मुख्य मांग क्या है?
याचिकाकर्ता राकेश कुमार जैन ने नियुक्ति को अवैध घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि नियम विरुद्ध नियुक्ति से पात्र उम्मीदवारों का अधिकार प्रभावित हुआ। इसलिए नियुक्ति निरस्त की जानी चाहिए।
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