अपने ही बजा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ गुना-ग्वालियर में बगावत का बिगुल
सिंधिया को अपने ही गढ़ में लगातार पांच झटके
एक ही नेता को पांच अलग-अलग मौकों पर अपनों का गुस्सा झेलना पड़े, तो यह सिर्फ इत्तेफाक नहीं हो सकता। गुना और ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ठीक यही हुआ है।
ग्वालियर-चंबल का इलाका सिंधिया परिवार का पारंपरिक असर वाला क्षेत्र रहा है। 2020 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने के बाद सिंधिया ने इस इलाके में अपनी पकड़ फिर से बनाई थी। लेकिन इस बीच पुराने बीजेपी नेताओं और सिंधिया समर्थकों के बीच टकराव की खबरें समय-समय पर आती रही हैं।
गुना में पहले भी सड़क और खाद जैसे मुद्दों पर स्थानीय नाराज़गी सामने आ चुकी है, मगर इस बार घटनाएं जिस तेजी से हुई हैं, वे कई सवाल खड़े कर रही हैं।
1- ग्वालियर: काले झंडे और मारपीट
सोमवार को बेला की बावड़ी में कुशवाहा समाज के छात्रावास का भूमिपूजन था। सिंधिया मुख्य अतिथि थे। जैसे ही उन्होंने भाषण शुरू किया, कुछ युवाओं ने उन्हें काले झंडे दिखाने शुरू कर दिए। इसके बाद सिंधिया समर्थकों और विरोध करने वाले युवाओं के बीच बहस बढ़ गई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। हंगामे में कुर्सियां भी टूट गईं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को अलग किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
दिलचस्प बात यह है कि यह झगड़ा किसी विपक्षी दल से नहीं, बल्कि बीजेपी के ही दो गुटों के बीच हुआ। विरोध करने वाले हरिओम कुशवाह का कहना था कि समाज के कार्यक्रम में समाज से जुड़े किसी नेता को बुलाया जाना चाहिए था, सिंधिया को नहीं।
2- डबरा: इमरती देवी की बगावत
19 सितंबर को डबरा के जलसा गार्डन में सेवा संकल्प अभियान के तहत कार्यक्रम था। पूर्व मंत्री इमरती देवी को बुलाया गया था, लेकिन मंच के बैनर से उनकी तस्वीर गायब मिली।
नाराज इमरती देवी सीधे मंच के नीचे कार्यकर्ताओं के बीच जाकर बैठ गईं। सांसद भरत सिंह कुशवाह ने खुद माइक पकड़कर उन्हें बुलाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं गईं। कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब मीडिया ने वजह पूछी, तो उन्होंने कहा कि मंच पर हत्या के आरोपी बैठे थे, इसलिए वे नीचे ही बैठी रहीं। किस पर आरोप था, यह उन्होंने साफ नहीं बताया। उन्होंने यह भी कहा कि मैं पार्टी की हूं और अच्छे लोगों के साथ रहती हूं।
अब इसमें बड़ा सवाल ये है कि क्या यह सिर्फ बैनर से तस्वीर गायब होने की नाराजगी थी या कुछ और? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
3- गुना: ममता मीणा का हमला
पूर्व IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी ST प्रमाणपत्र के जरिए DSP का पद हासिल किया। इस मामले में भोपाल पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की।
जैसे ही यह खबर सामने आई, उनकी पत्नी और चांचौड़ा की पूर्व बीजेपी विधायक ममता मीणा ने खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि यह कार्रवाई ज्योतिरादित्य सिंधिया के दबाव में की गई है। ममता मीणा ने सिंधिया पर निशाना साधते हुए उन्हें "सामंती सोच" वाला बताया।
उन्होंने कहा कि चाहे कितने भी मामले दर्ज हो जाएं, वे पीछे नहीं हटेंगी और यह लड़ाई 2029 तक जारी रहेगी। ममता मीणा ने यह भी दावा किया कि सिंधिया परिवार की वजह से आने वाले समय में बीजेपी के अंदर मतभेद बढ़ सकते हैं।
खास बात यह है कि ममता मीणा विपक्ष की नेता नहीं हैं, बल्कि बीजेपी की ही पूर्व विधायक रह चुकी हैं। ऐसे में उनकी नाराजगी को पार्टी के अंदर की खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
4- गुलाबगंज: रोड नहीं तो वोट नहीं
करोद गांव जाते समय ज्योतिरादित्य सिंधिया का काफिला गुलाबगंज के खेजरा रोड पर रुक गया। यहां स्थानीय लोगों ने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी खराब सड़क को लेकर अपनी परेशानी बताई। ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि अगर सड़क नहीं बनी तो वे वोट नहीं देंगे।
ग्रामीणों की यह बात सुनकर सिंधिया नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उनके सामने नहीं होना चाहिए। जनता को अपनी समस्या बतानी चाहिए, काम की मांग करनी चाहिए।
इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के करीब आधे घंटे बाद सिंधिया करोद गांव पहुंचे और मंच से सड़क निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपए मंजूर करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कलेक्टर को मानसून खत्म होते ही काम शुरू कराने के निर्देश भी दिए।
सोचिए एक बार। आधे घंटे में 3 करोड़ रुपए मंजूर हो सकते हैं, तो सालों से यह सड़क क्यों अटकी रही?
5- गुना: किसान की मार्मिक शिकायत
अपने चार दिवसीय गुना दौरे के दूसरे दिन सर्किट हाउस में सिंधिया जनसुनवाई कर रहे थे। पगारा और आसपास के गांवों से आए किसानों ने खाद की किल्लत और बार-बार हैक होती ऑनलाइन टोकन व्यवस्था की शिकायत की। भीड़ में मौजूद एक बुजुर्ग किसान ने भरे मन से कहा कि माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई, साहब, लेकिन खाद नहीं मिली। यह एक लाइन सुनकर पूरा सभागार सन्नाटे में डूब गया।
सिंधिया तुरंत सक्रिय हुए। उन्होंने कलेक्टर को किसानों के नाम-नंबर नोट करने के निर्देश दिए, और जब कलेक्टर ने सहजता से ठीक है कहा, तो सिंधिया ने सख्त लहजे में कहा कि सिर्फ कहने से नहीं चलेगा, पेन-पैड मंगाकर लिखो।
दोनों sides की बात
सिंधिया समर्थकों का कहना है कि मंत्री हर शिकायत पर तुरंत एक्शन ले रहे हैं, चाहे वह सड़क हो या खाद, इसलिए यह विरोध बड़ी बात नहीं। दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि बार- बार जनता को मौके पर आकर विरोध करना पड़ता है। इसका मतलब है कि प्रशासनिक व्यवस्था पहले से ठीक नहीं थी।
क्या खुल गई है गुना-ग्वालियर की बंद मुट्ठी!
इन घटनाओं के बाद गुना-ग्वालियर क्षेत्र में बीजेपी के अंदर चल रही खींचतान खुलकर सामने आती दिख रही है। स्थानीय मुद्दों से लेकर नेताओं की नाराजगी तक, कई घटनाओं ने पार्टी के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
2028 के विधानसभा चुनाव से पहले यह स्थिति पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकती है। अगर सड़क, खाद और स्थानीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर नाराजगी लगातार सामने आती रही, तो सिंधिया को संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि इमरती देवी और ममता मीणा जैसे नाराज नेता आगे अपनी आपत्तियां सीमित रखते हैं या फिर इसे बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाते हैं।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
आमतौर पर लगता है कि किसी नेता का विरोध विपक्षी पार्टी करती है। लेकिन इन पांच घटनाओं में से ज्यादातर विरोध खुद बीजेपी और सिंधिया के अपने समर्थन आधार से आया है, न कि कांग्रेस या किसी और दल से।
FAQ
- सिंधिया को काले झंडे कहां दिखाए गए?
ग्वालियर के बेला की बावड़ी में कुशवाहा छात्रावास के भूमिपूजन कार्यक्रम में सिंधिया को काले झंडे दिखाए गए। इसके बाद सिंधिया समर्थकों और विरोध करने वालों के बीच मारपीट हुई। - ममता मीणा ने सिंधिया पर क्या आरोप लगाए?
अपने पति रघुवीर सिंह मीणा पर फर्जी ST प्रमाणपत्र की FIR के बाद पूर्व बीजेपी विधायक ममता मीणा ने सिंधिया पर दबाव बनाकर कार्रवाई कराने का आरोप लगाया और 2029 तक लड़ाई जारी रखने की बात कही।
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