एमपी के लाल का कमाल: ग्वालियर के कबीर सिंह बने भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर के कबीर सिंह भदौरिया भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान बने हैं।
- वे 26 मई से श्रीलंका में होने वाली अंतरराष्ट्रीय सीरीज में कप्तानी करेंगे।
- बचपन में पोलियो के कारण कबीर के दोनों पैर खराब हो गए थे।
- शुरुआती दिनों में वे स्टूल पर बैठकर बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे।
- यह पहला मौका है जब उनकी कप्तानी में टीम विदेश खेलने जा रही है।
पोलियो को मात देकर कबीर ने रचा इतिहास
हौसले बुलंद हों तो इंसान मुश्किल से मुश्किल हालात को भी बदल सकता है। मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रैपुरा गांव से एक ऐसी ही प्रेरक कहानी आई है। यहां के रहने वाले कबीर सिंह भदौरिया ने अपनी कमजोरी को ताकत बना लिया।
कबीर जब सिर्फ एक साल के थे तब उन्हें पोलियो हो गया था। इस बीमारी ने उनके दोनों पैरों की ताकत छीन ली थी। लेकिन उनके भीतर क्रिकेट को लेकर जो जुनून था वह कभी कम नहीं हुआ। आज वे भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के गौरवशाली कप्तान बन चुके हैं।
कभी स्टूल पर बैठकर की बल्लेबाजी
कबीर सिंह भदौरिया के शुरुआती दिन बेहद संघर्ष भरे और चुनौतीपूर्ण रहे हैं। वे मैदान पर सीधे खड़े होने की ताकत नहीं रखते थे। ऐसे में उनके दोस्तों ने एक बहुत ही अनोखा उपाय निकाला।
दोस्त पिच पर एक स्टूल रख देते थे और कबीर उस पर बैठकर बल्लेबाजी करते थे। कबीर जोरदार शॉट्स लगाते थे और उनके दोस्त उनके हिस्से की दौड़ पूरी करते थे। इस तरह कबीर के क्रिकेट का सफर लगातार आगे बढ़ता चला गया।
रिश्तेदारों के तानों के खिलाफ ढाल बने सच्चे दोस्त
कबीर के इस सफर में समाज और रिश्तेदारों ने उनका खूब मजाक उड़ाया। लोग अक्सर उनकी लाचारी पर तरह-तरह के ताने मारते थे। लेकिन कबीर के पिता और उनके दोस्त हमेशा उनके आगे ढाल बनकर खड़े रहे।
कबीर गर्व से कहते हैं कि वे तानों से कभी डरे नहीं। आज जब सफलता मिली है तो बधाई देने वालों में दोस्त ही सबसे आगे हैं। रिश्तेदारों ने तो उस समय साथ छोड़ दिया था जब उन्हें मदद की जरूरत थी।
एमपी में टीम नहीं थी तो ट्रायल देने गए उत्तराखंड
टीम इंडिया के कप्तान बनने तक का रास्ता कबीर के लिए बिल्कुल आसान नहीं था। साल 2017 तक मध्यप्रदेश में दिव्यांगों की कोई क्रिकेट टीम नहीं थी। जब कबीर को पता चला कि उत्तराखंड में टीम बन रही है तो वे रुक नहीं पाए।
पैसों की तंगी के बावजूद वे कई बसें बदलकर ट्रायल देने उत्तराखंड पहुंच गए। वहां उनका चयन हो गया और वे घरेलू मैच खेलने लगे। साल 2019 में जब एमपी की टीम बनी तो वे वापस लौट आए।
कोरोना काल में टूटे थे कबीर
कबीर के जीवन में एक ऐसा काला दौर भी आया जब वे पूरी तरह टूट गए थे। साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। उन्होंने क्रिकेट छोड़कर छोटा-मोटा काम ढूंढना शुरू कर दिया था।
उस मुश्किल वक्त में भी उनके दोस्तों ने पैसे मिलाकर उनकी आर्थिक मदद की। दोस्तों ने उनका हौसला बनाए रखा और उन्हें दोबारा मैदान पर भेजा। आज कबीर की इस कप्तानी के पीछे उनके दोस्तों का बहुत बड़ा योगदान है।
अंतरराष्ट्रीय मैचों में कबीर का शानदार रिकॉर्ड
कबीर इससे पहले मध्य प्रदेश दिव्यांगक्रिकेट टीम के सफल कप्तान रह चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका पुराना रिकॉर्ड बहुत ही लाजवाब और बेहतरीन रहा है। वे बांग्लादेश और श्रीलंका के खिलाफ पिछली घरेलू सीरीज का हिस्सा थे।
उनकी मौजूदगी में भारत ने बांग्लादेश को 4-1 से धूल चटाई थी। वहीं श्रीलंका के खिलाफ भारत ने 5-0 से क्लीन स्वीप किया था। इस बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन की वजह से ही उन्हें अब टीम की कमान सौंपी गई है।
भारत बनाम श्रीलंका सीरीज का पूरा शेड्यूल और फॉर्मेट
आगामी भारत बनाम श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज 2026 बेहद रोमांचक होने वाली है। इस सीरीज की शुरुआत 26 मई 2026 से श्रीलंका की धरती पर होने जा रही है। यह कबीर के लिए एक अग्निपरीक्षा जैसा होगा।
इस टूर्नामेंट के फॉर्मेट की बात करें तो कुल 3 अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच खेले जाएंगे। कबीर पहली बार विदेशी सरजमीं पर भारतीय टीम की कप्तानी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पूरे देश को उनसे इस बार भी जीत की पूरी उम्मीद है।
FAQ
- कबीर सिंह भदौरिया कौन हैं?
कबीर सिंह भदौरिया मध्यप्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं और भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान हैं। - कबीर सिंह भदौरिया का संबंध मध्यप्रदेश के किस जिले से है?
कबीर सिंह भदौरिया मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रैपुरा गांव के रहने वाले हैं। हालांकि, उन्होंने ग्वालियर शहर को अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं से अपने व्हीलचेयर क्रिकेट करियर की शुरुआत की। - कबीर किस सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी संभालेंगे?
कबीर 26 मई 2026 से श्रीलंका में शुरू होने वाली अंतरराष्ट्रीय टी-20 सीरीज में भारत की कप्तानी संभालेंगे।
ये भी पढ़ें...
डिजिटल इंडिया की जमीनी हकीकत : 90 साल की बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर बैंक पहुंची बहू
आग में जले शिक्षा विभाग के मुख्य दस्तावेज, निजी स्कूलों से दोबारा मांगे दस्तावेज
चौराहों पर नहीं बजेंगे लाउडस्पीकर: एनजीटी ने ट्रैफिक पुलिस को लगाई फटकार
जयपुर में कराया सिद्धू मूसेवाला के पिता ने हार्ट का ऑपरेशन, सीने में दर्द और बेचैनी से थे परेशान