निजी निवेशक न मिले तो सहकारिता चलाएगी कैलारस शक्कर मिल! 16 को खुलेंगे प्रस्ताव
समझें क्या है पूरा मामला...
- कैलारस की बंद शक्कर मिल फिर शुरू करने की कोशिश चल रही है।
- सरकार ने निजी कंपनियों से मिल चलाने के प्रस्ताव मांगे हैं।
- ईओआई जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर तय है।
- निजी निवेशक नहीं मिले तो सहकारिता मॉडल पर विचार होगा।
- किसान संघ के दबाव के बाद यह विकल्प फिर चर्चा में आया है।
मुरैना की कैलारस शक्कर मिल को लेकर नया मोड़ आया है। बंद मिल को फिर शुरू करने की कोशिश तेज है। निजी निवेशक मिलने की उम्मीद पर पहले जोर दिया गया। अब सहकारिता मॉडल को भी मजबूत विकल्प माना जा रहा है। इस मॉडल में मिल किसानों से जुड़ी व्यवस्था में चल सकती है।
निजी निवेशक के लिए सरकार ने मांगे थे प्रस्ताव
मध्य प्रदेश सरकार ने मिल के लिए ईओआई जारी किया है। ईओआई का मतलब कंपनियों से रुचि जताने वाले प्रस्ताव हैं। सरकार मिल को 30 साल की लीज पर देना चाहती है। मिल की मौजूदा क्षमता 1,250 टन गन्ना रोजाना बताई गई है। इसमें फैक्ट्री, मशीनें, गोदाम और जमीन शामिल हैं। सरकार ने पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी है।
15 सितंबर तक जमा होंगे मिल चलाने के प्रस्ताव
कैलारस मिल के लिए प्रस्ताव 15 सितंबर तक जमा होंगे। प्रस्ताव जमा करने का समय शाम पांच बजे तक है। प्राप्त प्रस्ताव 16 सितंबर को खोले जाने हैं। इससे पहले इच्छुक कंपनियों के लिए साइट विजिट रखी गई थी।
साइट विजिट 31 अगस्त और एक सितंबर को तय थी। इसके बाद तीन सितंबर को भोपाल में बैठक रखी गई है। इस बैठक में कंपनियों के सवालों पर चर्चा होगी।
साइट विजिट को लेकर अब प्रस्तावों पर नजर
स्थानीय जानकारी के अनुसार साइट विजिट में निवेशक नहीं पहुंचे। फिर भी प्रस्तावों की संख्या पर सबकी नजर बनी है। यदि प्रस्ताव नहीं आए तो सरकार को विकल्प चुनना होगा। ऐसे में सहकारिता मॉडल पर चर्चा अहम हो जाती है।
किसान संघ ने दिया था सहकारिता मॉडल का सुझाव
भारतीय किसान संघ लंबे समय से मिल शुरू कराने की मांग कर रहा है। संघ ने मिल निजी हाथों में देने का विरोध किया है। के. साईं रेड्डी ने किसानों से जुड़ा मॉडल सुझाया था।
किसान संघ ने मिल किसानों की सहकारी संस्था को देने की बात कही। मुख्यमंत्री से मुलाकात में यह मुद्दा भी उठा था। इसके बाद सहकारिता में मिल चलाने की बात सामने आई।
सीएम से मिला था सहकारिता का आश्वासन
अगस्त में किसान संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला था। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व के. साईं रेड्डी ने किया था। किसान संघ के अनुसार मुख्यमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया। इसमें सहकारिता के जरिए मिल पुनर्जीवित करने की बात थी। इसके लिए एक समिति बनाने की बात भी सामने आई। यानी निजी मॉडल के साथ दूसरा रास्ता भी खुला है।
पहले एमएसएमई विभाग को सौंपी गई थी संपत्ति
मिल की जमीन और संपत्तियों को एमएसएमई विभाग को देने का फैसला हुआ था। यह फैसला अगस्त 2025 की कैबिनेट बैठक से जुड़ा था। इसके बाद मिल को निजी कंपनियों से चलाने की कोशिश हुई। इसी क्रम में अगस्त 2026 में ईओआई जारी हुई। अब सहकारिता मॉडल की चर्चा ने तस्वीर बदल दी है।
कैलारस मिल क्यों है किसानों के लिए अहम
कैलारस शक्कर मिल लंबे समय से बंद पड़ी है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार मिल की स्थापना 1965 में हुई थी। मिल में उत्पादन 1971-72 में शुरू हुआ था। उस समय इसकी क्षमता 1,250 टन रोजाना थी। बाद में मिल बंद हो गई। सरकारी जवाब में गन्ने और पूंजी की कमी बताई गई थी। मिल बंद होने से किसानों को बाजार की परेशानी बढ़ी। स्थानीय स्तर पर रोजगार पर भी इसका असर पड़ा।
सहकारिता मॉडल से किसानों को क्या उम्मीद है
सहकारिता मॉडल में किसानों की सीधी भागीदारी हो सकती है। इससे गन्ने के लिए स्थानीय बाजार मिलने की उम्मीद है। मिल चलने से आसपास रोजगार बढ़ सकता है। परिवहन खर्च घटने से किसानों को भी राहत मिल सकती है। लेकिन इसके लिए मजबूत प्रबंधन और पूंजी जरूरी होगी। मिल की पुरानी मशीनों की हालत भी बड़ी चुनौती है। इसलिए केवल मिल शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा।
16 सितंबर को साफ होगी तस्वीर
अभी सबसे अहम तारीख 16 सितंबर बनी हुई है। उस दिन मिले प्रस्ताव खोले जाने हैं। यदि निजी प्रस्ताव आते हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यदि प्रस्ताव नहीं आते तो सहकारिता विकल्प मजबूत होगा। जरूरत पड़ने पर सरकार ईओआई दोबारा भी जारी कर सकती है।
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