मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम को क्या चिट्ठी लिखी? मचा राजनीतिक घमासान

Sourabh Bhatnagar | Jul 01, 2026, 14:47 IST
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम को चिट्ठी लिखी
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम मोहन यादव को कथित तौर पर एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने ढाई साल से असहयोग और उपेक्षा की बात कही है। मास्टर प्लान, RGPV बंटवारा और पीथमपुर सुविधाओं जैसे मुद्दे उठाए हैं।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम मोहन यादव को चिट्ठी लिखी है।
    • उन्होंने ढाई साल से असहयोग और उपेक्षा की शिकायत की है।
    • पत्र में मास्टर प्लान, मेट्रोपॉलिटन रीजन नाम और RGPV बंटवारे का जिक्र है।
    • पीथमपुर सुविधाओं और सिंहस्थ में इंदौर की अनदेखी का भी उल्लेख है।
    • समाधान नहीं होने पर मुद्दे सार्वजनिक मंच पर उठाने की बात कही है।

    सीएम को लिखी चिट्ठी में क्या है?

    मध्य प्रदेश के सीनियर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर सरकार से नाराज नजर आए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग संभाल रहे विजयवर्गीय ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि पिछले ढाई साल से उन्हें लगातार असहयोग झेलना पड़ रहा है। उनके मुताबिक इंदौर के विकास से जुड़े मुद्दों पर भी उपेक्षा हो रही है। अगर समाधान नहीं हुआ तो जनता की आवाज सार्वजनिक मंच पर उठाना उनकी मजबूरी होगी।



    एक प्रतिष्ठित अखबार द्वारा प्रकाशित खबर में विजयवर्गीय की चिट्ठी को लेकर कई दावे किए गए हैं।बताया जा रहा है कि यह चिट्ठी 20 जून को लिखी गई है। इसके साथ उन्होंने पहले लिखे पुराने पत्र भी संलग्न किए हैं। हालांकि चिट्ठी सामने नहीं आई है।



    क्या बोले मंत्री विजयवर्गीय

    जब मीडिया नेइस पूरे मामले को लेकर मंत्री विजयवर्गीय से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हां, मैंने भी पढ़ा है। पता नहीं कहां से ऐसी बातें लिख देते हैं, उन्हीं से पूछिए।



    विजयवर्गीय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस कथित चिट्ठी की जानकारी नहीं है। हालांकि, इस चिट्ठी के सामने आने के बाद बीजेपी के अंदर मुख्यमंत्री के फैसलों पर सवाल उठने की चर्चा तेज हो गई है।



    इंदौर को नहीं मिला हक

    मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विजयवर्गीय ने लिखा है कि उन्हें प्रदेश के मुखिया से सहयोग की उम्मीद थी। लेकिन उनका कहना है कि उन्हें लगातार असहयोग और उपेक्षा ही मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके विभाग से जुड़े तबादले भी बिना उनकी जानकारी के हो जाते हैं। उनका कहना है कि इंदौर के विकास की रफ्तार बढ़ाने की बात तो दूर है। शहर को उसका सही हक भी नहीं मिल पा रहा है। यह बात उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखी है।



    मास्टर प्लान पर सवाल

    विजयवर्गीय ने पत्र में इंदौर के मास्टर प्लान (इंदौर में मास्टर प्लान) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उनके अनुसार यह प्लान करीब दो साल पहले ही मुख्यमंत्री को भेजा जा चुका था। इस पर विभागीय स्तर और मुख्य सचिव स्तर पर भी कई बार चर्चा हुई। लेकिन अब तक इसे जारी नहीं किया गया है। उनका कहना है कि पहले भी इस बारे में पत्र लिखा गया था। मगर उस पत्र का न तो कोई जवाब आया और न ही कोई चर्चा हुई।



    मेट्रोपॉलिटन नाम पर आपत्ति

    मंत्री ने पत्र में मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र है। हर चर्चा में यह रीजन इंदौर केंद्रित ही रहा है। लेकिन अधिसूचना में इसका नाम उज्जैन इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन रख दिया गया। उनके मुताबिक इस पूरे रीजन में इंदौर का हिस्सा शत प्रतिशत है। जबकि उज्जैन का हिस्सा करीब 59 प्रतिशत ही है। इसी असंगति पर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं।



    RGPV बंटवारे पर नाराजगी

    विजयवर्गीय ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में नई इकाइयां प्रस्तावित की गई हैं। लेकिन 1952 से स्थापित इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (SGSITS) को नजरअंदाज किया गया है। उनका कहना है कि इंदौर में 50 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इसके बावजूद यहां इकाई स्थापित करने का मौका नहीं दिया गया।



    पीथमपुर की उपेक्षा

    पत्र में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का मुद्दा भी शामिल है। विजयवर्गीय के मुताबिक यहां 650 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) मौजूद हैं। इसके अलावा 176 से ज्यादा बड़ी इंडस्ट्रीज भी यहां स्थापित हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर जैसी सुविधाएं अब तक लंबित हैं। उनका आरोप है कि नए विक्रमपुरी उज्जैन औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। जबकि पीथमपुर की लगातार अनदेखी हो रही है।



    सिंहस्थ और एयरपोर्ट का मुद्दा

    नगरीय विकास मंत्री ने इंदौर एयरपोर्ट विस्तार का मुद्दा भी पत्र में उठाया है। उनके अनुसार विस्तार के लिए अब तक जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके साथ ही उज्जैन सिंहस्थ 2028से जुड़े कामों में भी इंदौर को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने जल संकट के दौरान इंदौर को विशेष राहत न मिलने की बात भी लिखी है। यह सभी मुद्दे उनकी चिट्ठी में विस्तार से दर्ज हैं।



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