घर में सो रही महिला को जंगल ले भागा बाघ, प्रदेश में ऐसे हमलों से अब तक 22 की मौत
समझें क्या है पूरा मामला...
- बालाघाट के पर्रापुर बैगाटोला गांव में शनिवार रात बाघ घर में घुस आया।
- बाघ सो रही एक महिला को उठाकर जंगल की ओर ले गया।
- परिवार और ग्रामीणों ने शोर मचाकर बाघ का पीछा किया।
- बाघ महिला को छोड़कर भाग गया, लेकिन महिला गंभीर रूप से घायल हो चुकी थी।
- अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
डरावनी रात की शुरुआत
कान्हा नेशनल पार्क से सटे इस गांव में शनिवार की रात हमेशा की तरह शांत थी। घर के अंदर सुगनी बाई धुर्वे सो रही थीं। तभी अचानक एक बाघ घर में घुस आया।
बाघ (बाघ का आतंक) ने महिला को पकड़ लिया और घसीटते हुए जंगल की तरफ ले जाने लगा। यह हमला इतना अचानक हुआ कि परिवार को कुछ समझ में आने में समय लगा।
300 मीटर तक घसीटा गया
बाघ महिला को करीब 300 मीटर तक घसीटकर जंगल की ओर ले गया। इस दौरान महिला बुरी तरह घायल होती चली गई।
परिजनों को जैसे ही घटना का पता चला, उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू किया। पड़ोसी भी जाग गए और मदद के लिए दौड़ पड़े।
ग्रामीणों ने की जान बचाने की कोशिश
ग्रामीणों ने टॉर्च जलाकर बाघ का पीछा किया। लगातार शोर और रोशनी से बाघ घबरा गया।
कुछ ही देर बाद बाघ ने महिला को छोड़ दिया और जंगल में भाग गया। ग्रामीणों ने तुरंत महिला को उठाया।
अस्पताल में हुई मौत
बता दें कि सुगनी बाई धुर्वे की उम्र 45 साल थी। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं।
परिजन उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गए लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। गांव में मातम छा गया।
इस साल 22वीं मौत
यह घटना मध्य प्रदेश में इस साल बाघ के हमले से हुई 22वीं मौत है। यह आंकड़ा राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को दिखाता है।
14 जून तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के हमलों में अब तक 43 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 22 मौतें अकेले बाघ के हमलों में हुई हैं। यानी लगभग आधी मौतों के पीछे बाघ जिम्मेदार हैं।
वन विभाग पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से इलाके में बाघ और तेंदुए की आवाजाही बढ़ गई थी।
ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कई बार वन विभाग से की। आरोप है कि विभाग की तरफ से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसी लापरवाही का नतीजा अब एक जान के रूप में सामने आया है।
कान्हा का इलाका, बढ़ता खतरा
पर्रापुर बैगाटोला गांव कान्हा नेशनल पार्क से सटा हुआ है। ऐसे इलाकों में जंगली जानवरों का गांवों में घुसना आम होता जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि जंगल और गांव की सीमाएं जब आपस में मिलती हैं, तो इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में समय पर निगरानी और सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हो जाते हैं।
क्यों बढ़ रहे मानव–बाघ संघर्ष के मामले?
बता दें कि कान्हा टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में अक्सर बाघ भोजन और पानी की तलाश या अपने क्षेत्र (टेरिटरी) के विस्तार के दौरान आबादी के करीब पहुंच जाते हैं।
जंगलों से सटे गांवों में मवेशियों की मौजूदगी और रात के समय लोगों की आवाजाही से मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
वन विभाग ऐसे क्षेत्रों में लगातार निगरानी, गश्त और अलर्ट जारी करने की व्यवस्था करता है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।
मध्य प्रदेश में बाघों की स्थिति
मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट (एमपी टाइगर स्टेट) कहा जाता है और यहां देश में सबसे अधिक बाघ पाए जाते हैं। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना जैसे टाइगर रिजर्व बाघों के प्रमुख आवास हैं।
बाघों की संख्या बढ़ना संरक्षण की सफलता का संकेत है, लेकिन इसके साथ ही जंगलों से सटे इलाकों में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी चुनौती बनकर सामने आ रही हैं।
ऐसे मामलों में विशेषज्ञ गांवों में सतर्कता, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी रेस्क्यू व्यवस्था को जरूरी मानते हैं।
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