कान्हा में आखिर क्यों बढ़ रही बाघों की जंग? एक महीने में 8 मौतों ने बढ़ाई चिंता
समझें पूरा मामला...
- कान्हा में एक महीने में 8 बाघों की मौत।
- खापा रेंज में युवा बाघ “महावीर” मृत मिला।
- शुरुआती आशंका: आपसी संघर्ष।
- भूख और टेरिटरी वॉर दोनों पर सवाल।
- डिगडोला समेत कई चर्चित बाघों की मौत।
- वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। मंगलवार सुबह खापा रेंज के जंगल में एक युवा बाघ का शव मिलने के बाद पार्क प्रबंधन और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। मृत बाघ की पहचान “महावीर” के रूप में हुई है, जिसकी उम्र करीब 5 से 6 साल बताई जा रही है।
प्रारंभिक आशंका है कि उसकी मौत आपसी संघर्ष में हुई, लेकिन वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कान्हा में लगातार बाघ क्यों मर रहे हैं?
एक महीने में 8 बाघों की मौत
कान्हा नेशनल पार्क में पिछले करीब एक महीने के भीतर 8 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें वयस्क बाघ, बाघिन और शावक तक शामिल हैं। लगातार हो रही मौतों ने अब टाइगर रिजर्व के भीतर “प्राकृतिक संघर्ष” और “संसाधनों के दबाव” को लेकर बहस तेज कर दी है।
खापा रेंज में मिला “महावीर” का शव
गश्त कर रही टीम को जंगल में एक नर बाघ मृत अवस्था में मिला। वन विभाग के मुताबिक यह बाघ “रूक्च-3” बाघिन का बेटा था और इलाके में सक्रिय युवा टाइगर माना जाता था। शव के आसपास संघर्ष के संकेत मिले हैं, जिससे क्षेत्रीय लड़ाई की आशंका जताई जा रही है।
टेरिटरी की लड़ाई बन रही बड़ा कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक कान्हा में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ “इलाके पर कब्जे” की लड़ाई भी तेज हुई है। हर बाघ अपना अलग क्षेत्र चाहता है। ऐसे में युवा बाघों और पुराने प्रभावशाली टाइगर्स के बीच संघर्ष बढ़ रहा है।
बाघों की मौतों ने बढ़ाई चिंता...
21 अप्रैल: भूख से मौत की आशंका
अमाही नाला के पास 16 महीने के नर शावक का शव मिला था। पोस्टमार्टम में उसका पेट पूरी तरह खाली पाया गया, जिसके बाद भूख से मौत की आशंका सामने आई।
23 अप्रैल: दो अलग घटनाओं में मौत
दो दिन बाद एक और नर शावक की मौत की खबर आई। डॉग स्क्वॉड और हाथियों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सके। इसी दिन जत्ता बीट में भी एक नर बाघ मृत मिला था।
29 अप्रैल: बाघिन और शावक की मौत
मुक्की रेंज में 10 वर्षीय बाघिन और उसके डेढ़ साल के शावक की मौत ने वन विभाग को और सतर्क कर दिया।
4 मई: मशहूर टाइगर “डिगडोला” की मौत
किसली जोन के मगरनाला क्षेत्र में चर्चित बाघ “डिगडोला” मृत मिला था। वन विभाग ने तब क्षेत्रीय संघर्ष को मौत की वजह बताया था।
भोजन और संसाधनों का दबाव भी चिंता
कुछ मामलों में शावकों की मौत के पीछे भोजन की कमी की आशंका भी सामने आई है। जंगल में शिकार, पानी और सुरक्षित क्षेत्र को लेकर बढ़ता दबाव अब बाघों के व्यवहार को प्रभावित कर रहा है।
कान्हा की पहचान पर भी उठ रहे सवाल
कान्हा टाइगर रिजर्व देश और दुनिया में बाघों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। हर साल हजारों पर्यटक यहां टाइगर सफारी के लिए पहुंचते हैं। लेकिन लगातार हो रही मौतों ने अब संरक्षण व्यवस्था और जंगल के अंदर बढ़ते दबाव को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
वन विभाग क्या कह रहा है?
वन विभाग फिलहाल हर मामले में पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी मौतों के पीछेअलग-अलग कारण हो सकते हैं। हालांकि, शुरुआती जांच में अधिकतर मामलों में क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना सामने आई है।
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