कटनी CSP नेहा पच्चीसिया को हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज
समझें क्या है पूरा मामला
- कटनी CSP नेहा पच्चीसिया ने पुलिस आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
- उनका आरोप था कि उनके काम का दायरा लगातार घटाया गया।
- यह विवाद ट्रांसपोर्टर के वसूली आरोपों के बाद सामने आया था।
- कटनी एसपी ने कार्रवाई करते हुए कई जिम्मेदारियां वापस ली थीं।
- हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के आदेशों में दखल नहीं दिया।
कटनी की CSP नेहा पच्चीसिया को जबलपुर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। उन्होंने पुलिस विभाग के दो आदेशों को चुनौती दी थी। ये आदेश उनके काम और अधिकारों से जुड़े थे। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के फैसले में दखल नहीं दिया। इससे नेहा की याचिका में मांगी गई राहत नहीं मिल सकी। कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
यह मामला रिट याचिका क्रमांक 32807/2026 से जुड़ा है। नेहा पच्चीसिया ने यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 में लगाई थी। याचिका में पुलिस अधीक्षक कटनी के आदेश चुनौती बने थे। इनमें 16 सितंबर 2025 और 22 जुलाई 2026 के आदेश शामिल थे।
वसूली के आरोप के बाद शुरू हुआ था विवाद
मामला एक ट्रांसपोर्टर की शिकायत के बाद चर्चा में आया था। ट्रांसपोर्टर ने पुलिस अधिकारी पर अवैध वसूली का आरोप लगाया था। इसके बाद कटनी पुलिस ने मामले में कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान CSP कार्यालय से जुड़े कर्मचारी पर भी कार्रवाई हुई।
जानकारी के अनुसार CSP के ड्राइवर को निलंबित किया गया था। इसके साथ ही कुछ थानों की जिम्मेदारी वापस ली गई थी। इससे नेहा पच्चीसिया के काम का दायरा प्रभावित हुआ था। इसके बाद उन्होंने इन फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
नेहा ने कहा, काम का दायरा बिना ठोस कारण घटाया गया
नेहा ने अपनी याचिका में पुलिस विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि अधिकार घटाने का ठोस कारण नहीं बताया गया। उन्होंने किसी कदाचार से जुड़ा आरोप भी नहीं होने की बात कही। उन्होंने इसे उनके काम पर असर डालने वाला फैसला बताया।
याचिका में निष्पक्षता और समानता का मुद्दा भी उठाया गया था। नेहा ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला दिया। उनका कहना था कि कार्रवाई तर्कसंगत और समान होनी चाहिए। उन्होंने अपने पद और अनुभव के अनुसार जिम्मेदारी मांगी थी।
हाईकोर्ट से मांगी थी जिम्मेदारियां वापस देने की राहत
नेहा ने दोनों पुलिस आदेशों को हटाने की मांग की थी। उन्होंने अपने अधिकार और जिम्मेदारियां वापस देने की मांग रखी थी। उन्होंने कोर्ट से उचित निर्देश देने का भी अनुरोध किया था। याचिका में पुलिस विभाग के फैसलों को चुनौती दी गई थी।
याचिका में उनके काम के कई उदाहरण भी रखे गए थे। इनमें गुना की महिला पुलिस पहल का जिक्र किया गया। गुना में मोबाइल पुलिस स्टेशन शुरू करने का उदाहरण दिया गया। मंडला में अवैध गौमांस तस्करी रोकने का भी जिक्र हुआ।
अपने पुराने कामों को आधार बनाकर रखी अपनी बात
नेहा ने कोर्ट के सामने अपनी पिछली पोस्टिंग का रिकॉर्ड रखा। उन्होंने महिलाओं से जुड़ी पुलिस पहल का उदाहरण दिया। उनका दावा था कि उन्होंने कई जगह प्रभावी काम किया। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने अपनी कार्यक्षमता बताने की कोशिश की।
हालांकि हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग के फैसले में दखल नहीं दिया। कोर्ट ने याचिका में नेहा को राहत देने से इनकार कर दिया। इससे उनके खिलाफ जारी आदेश फिलहाल प्रभावी बने हुए हैं। विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक रूप से अपलोड होना बाकी है।
दो पुलिस आदेश बने याचिका की मुख्य वजह
याचिका में 16 सितंबर 2025 का आदेश चुनौती दिया गया था। इसके साथ 22 जुलाई 2026 का आदेश भी चुनौती बना था। दोनों आदेश कटनी एसपी की ओर से जारी किए गए थे। नेहा ने इन्हें अपने अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया था।
याचिका के अनुसार उनके प्रशासनिक काम का दायरा घटाया गया था। इसमें कुछ थानों से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शामिल थीं। नेहा ने इस बदलाव के पीछे ठोस कारण मांगे थे। उन्होंने इसे उनके करियर पर असर डालने वाला फैसला बताया।
अब विस्तृत आदेश से साफ होगी कोर्ट की पूरी वजह
फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य नतीजा सामने आया है। कोर्ट ने नेहा पच्चीसिया को मांगी गई राहत नहीं दी। विस्तृत आदेश अपलोड होने के बाद स्थिति और साफ होगी। आदेश से कोर्ट के कारणों की पूरी जानकारी सामने आएगी।
इस मामले में एक बात फिलहाल साफ है। पुलिस विभाग के प्रशासनिक फैसले को कोर्ट ने नहीं बदला। नेहा की याचिका में मांगी गई राहत भी नहीं मिली। अब आगे की तस्वीर विस्तृत आदेश आने के बाद स्पष्ट होगी।
मामले की जरूरी जानकारी एक नजर में
याचिका क्रमांक 32807/2026 है। याचिकाकर्ता नेहा पच्चीसिया हैं। वह कटनी में CSP पद पर कार्यरत हैं। प्रतिवादियों में मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इनमें DGP, जबलपुर IG और कटनी SP शामिल हैं।
याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल हुई थी। चुनौती 16 सितंबर 2025 और 22 जुलाई 2026 के आदेशों को थी। मुख्य मांग जिम्मेदारियां और पर्यवेक्षण का दायरा वापस लेने की थी। हाईकोर्ट ने इस मांग पर राहत देने से इनकार किया।
13 अगस्त को अपलोड हुआ आदेश
इस मामले का आदेश 13 अगस्त को अपलोड हुआ है। आदेश में वही जानकारी सामने आई है जो द सूत्र ने अपने पाठकों को बताया था। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस विनियमों की धारा 36 के तहत एसपी (पुलिस अधीक्षक) को यह अधिकार दिया गया है कि वे प्रशासनिक कार्यों के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारियों को शक्तियां सौंप सकते हैं।
इस नियम में 'may' (सकते हैं) शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब यह है कि यह एसपी (पुलिस अधीक्षक) का अपना विवेक है कि वे किसे अधिकार सौंपना चाहते हैं और किसे नहीं। कोर्ट ने माना कि एसपी (पुलिस अधीक्षक) प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से काम बांटने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं और उनके इस फैसले में कोई कमी नहीं है। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।
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