कौन हैं मीनाक्षी नटराजन? जिनके लिए कांग्रेस ले रही पांच लाख परसेंट की जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश की सियासत में इस समय राज्यसभा चुनाव को लेकर पारा सातवें आसमान पर है। शक्ति प्रदर्शन और सियासी शह-मात के इस खेल के बीच, दिल्ली से लेकर भोपाल तक एक ही नाम की गूंज है- मीनाक्षी नटराजन!
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की खाली हो रही सीट पर कांग्रेस आलाकमान ने लंबे समय बाद किसी महिला चेहरे पर दांव खेला है। वहीं, बात सिर्फ टिकट मिलने तक सीमित नहीं है, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बंद कमरे की बैठक के बाद मीडिया के सामने खुलेआम दावा कर दिया कि मीनाक्षी नटराजन पांच लाख परसेंट राज्यसभा जा रही हैं।
आखिर कौन हैं मीनाक्षी नटराजन, जिनके लिए पूरी कांग्रेस इतनी बड़ी गारंटी दे रही है? आइए इस पूरी सियासी बिसात को गहराई से समझते हैं....
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन
मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कोर टीम का बेहद भरोसेमंद हिस्सा माना जाता है। उनका राजनीतिक और शैक्षणिक सफर कुछ इस प्रकार है-
- जन्म और शिक्षा: उनका जन्म उज्जैन के नागदा में हुआ और उन्होंने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। उनके पास जैव रसायन (Biochemistry) में पोस्ट ग्रैजुएशन और लॉ की पढ़ाई की है।
- छात्र राजनीति की कमान: उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत NSUI से की और वह साल 1999 से 2002 तक NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं।
- युवा कांग्रेस का दौर: इसके बाद साल 2002 से 2005 तक उन्होंने मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान संभाली।
- संसदीय सफर: साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने मंदसौर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता और 15वीं लोकसभा की सांसद चुनी गईं। हालांकि, बाद में 2014 और 2019 के चुनावों में उन्हें भाजपा के सुधीर गुप्ता से शिकस्त झेलनी पड़ी।
- वर्तमान जिम्मेदारी: वर्तमान में वे तेलंगाना की AICC प्रभारी के रूप में काम कर रही हैं। साथ ही, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
वैचारिक संघर्ष की लड़ाई और राहुल गांधी का भरोसा
प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया से बातचीत में मीनाक्षी नटराजन बेहद नपे-तुले और गंभीर अंदाज में नजर आईं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने मुझे राज्यसभा में देश की आवाज उठाने का जो अवसर दिया है, उसके लिए मैं उनकी आभारी हूं।
उन्होंने यह भी साफ किया कि विधायकों ने बैठक में खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। वहीं, वर्चुअल माध्यम से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मीनाक्षी नटराजन की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरी कांग्रेस की लड़ाई है। साथ ही, यह एक वैचारिक संघर्ष है।
दिग्गजों को पछाड़कर कैसे चमका मीनाक्षी का नाम?
इस राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस के भीतर दावेदारों की कोई कमी नहीं थी। इस रेस में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, खुद प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, अरुण यादव, सज्जन सिंह वर्मा और शोभा ओझा जैसे करीब दर्जनभर कद्दावर नाम शामिल थे।
वहीं, पार्टी आलाकमान ने गुटीय राजनीति और खींचतान से दूर रहते हुए एक साफ-सुथरी छवि और प्रखर वक्ता के रूप में पहचान रखने वाली महिला नेत्री पर दांव लगाना बेहतर समझा। भाजपा द्वारा अपने दो प्रत्याशियों (रजनीश अग्रवाल और तरुण चुग) के नाम घोषित करने के चंद घंटों के भीतर ही कांग्रेस ने देश के पांच राज्यों की सात सीटों के लिए सूची जारी की थी। इसमें मध्य प्रदेश से इकलौता नाम मीनाक्षी नटराजन का था।
विवादों में भी घिर चुकीं मीनाक्षी
टंच माल वाले बयान से आया था भूचाल
नटराजन का राजनीतिक जीवन जितना सादगी भरा रहा है, उनके सफर के साथ उतने ही कुछ विवाद भी जुड़े रहे हैं। साल 2013 का वो वाक्या आज भी राजनीतिक इतिहास में दर्ज है, जब दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश की एक जनसभा में मीनाक्षी नटराजन की तारीफ करते हुए उन्हें 100 टका टंच माल कह दिया था।
दिग्विजय सिंह का आशय मीनाक्षी की बेदाग और सोने जैसी शुद्ध ईमानदारी से था, उन्होंने कहा था कि मैं राजनीति का पुराना जौहरी हूं, मीनाक्षी जी का काम देखकर यह कह सकता हूं। वहीं, इस मुहावरे के इस्तेमाल पर विपक्षी दलों ने जमकर बखेड़ा खड़ा किया।
हालांकि, मीनाक्षी नटराजन ने बेहद परिपक्वता दिखाते हुए इस विवाद को शांत किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस टिप्पणी से कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि दिग्विजय सिंह ने उनके काम की सराहना की थी और बयान को पूरे संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए।
चुनाव के विज्ञापन में मीनाक्षी को बता दिया गया नक्सली
विवादों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मंदसौर संसदीय क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब स्थानीय समाचार पत्रों में एक ऐसा विज्ञापन छपा जिसने सबको चौंका दिया। इस विरोधी विज्ञापन में मीनाक्षी नटराजन के सीधे और सादगी पसंद स्वभाव पर निशाना साधते हुए लिखा गया था कि गांधीवादी चेहरे के पीछे नक्सली चेहरा है।
इस विज्ञापन पर मीनाक्षी नटराजन ने बेहद सधे हुए अंदाज में पलटवार करते हुए कहा था कि जब भी कोई व्यक्ति गरीबों और पिछड़ों की लड़ाई लड़ता है, तो उस पर इसी तरह के आरोप लगाए जाते हैं। इन आरोपों का जवाब मैं नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता देगी।
हालांकि, इस मामले को लेकर उनके कानूनी दल ने मुख्य चुनाव अधिकारी से लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
कांग्रेस के एकजुटता का चक्रव्यूह
मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) में शनिवार, 6 जून की शाम ठीक 5 बजे विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक चर्चा नहीं थी, बल्कि राज्यसभा चुनाव की रणनीति को अभेद्य बनाने का एक चक्रव्यूह थी।
बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें खुद प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल मौजूद रहे।
चुनावी क्रॉस वोटिंग के किसी भी खतरे को टालने के लिए न सिर्फ रणनीति पर मंथन हुआ, बल्कि मौके पर ही सभी मौजूद विधायकों के हस्ताक्षर भी कराए गए ताकि एकजुटता पर कोई शक न रहे।
पांच लाख परसेंट की गारंटी
विधायक दल की बैठक खत्म होते ही पीसीसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। जीतू पटवारी, उमंग सिंगार और खुद मीनाक्षी मीडिया के सामने आए। तीनों नेताओं के चेहरों पर जीत का भरोसा साफ दिख रहा था। जीतू पटवारी ने विरोधियों के दावों को हवा में उड़ाते हुए कहा कि हमारी पार्टी पूरी तरह से एकजुट है।
साथ ही, वरिष्ठ नेताओं ने ऑनलाइन जुड़कर यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस में कोई दरार नहीं है। इसी दौरान पटवारी ने वह बयान दिया जिसने सुर्खियां बटोर लीं कि मीनाक्षी नटराजन पांच लाख परसेंट राज्यसभा जा रही हैं।
नामांकन के दिन हकीकत आ जाएगी सामने
वर्तमान राज्यसभा चुनाव की स्थिति पर बात करते हुए मीनाक्षी नटराजन ने मीडिया से चर्चा में साफ कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि वैचारिक संघर्ष की लड़ाई है। उन्होंने राहुल गांधी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें राज्यसभा के माध्यम से देश के सदन में जनता और पार्टी की आवाज उठाने का मौका मिला है।
दूसरी तरफ, विरोधी खेमा कांग्रेस की इस एकजुटता को महज एक दिखावा मान रहा है। भाजपा के सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने मीनाक्षी की उम्मीदवारी पर कोई खास उत्साह नहीं दिखाया है।
साथ ही, कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। इस पर मीनाक्षी ने बेहद शांत लहजे में जवाब दिया कि भाजपा चाहे जो दावे करे, नामांकन के दौरान वास्तविक स्थिति सबके सामने आ जाएगी।
FAQ
- मीनाक्षी नटराजन कौन हैं और उनका राजनीतिक बैकग्राउंड क्या है?
मीनाक्षी नटराजन राहुल गांधी की कोर टीम की भरोसेमंद नेता हैं। वे NSUI व युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय/प्रदेश अध्यक्ष और 2009 में मंदसौर से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। वर्तमान में वे तेलंगाना की AICC प्रभारी हैं। - जीतू पटवारी ने मीनाक्षी नटराजन के लिए 5 लाख परसेंट की गारंटी क्यों दी?
मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव को लेकर क्रॉस वोटिंग के खतरे को टालने और पार्टी की अटूट एकजुटता दिखाने के लिए, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने विधायक दल की बैठक के बाद मीनाक्षी की जीत की यह बड़ी गारंटी दी। - मीनाक्षी नटराजन से जुड़ा टंच माल विवाद क्या था?
साल 2013 में दिग्विजय सिंह ने मीनाक्षी की बेदाग ईमानदारी की तारीफ में उन्हें 100 टका टंच माल कहा था। इस मुहावरे पर विपक्ष ने भारी सियासी बखेड़ा खड़ा किया, लेकिन मीनाक्षी ने इसे सहजता से लिया था।
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