केन-बेतवा प्रोजेक्ट: विस्थापित बोले- प्रशासन ने रोका राशन, पानी और बिजली
समझें क्या है पूरा मामला...
- छतरपुर और पन्ना में विस्थापितों का चिता आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है।
- केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत कई योजनाओं से लोग विस्थापित हुए हैं।
- आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने ठीक से मुआवजा नहीं दिया।
- प्रदर्शन स्थल पर राशन, पानी और बिजली रोकने का आरोप लगा है।
नीरज सोनी@CHHATARPUR. मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में विस्थापितों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी (NTPC – National Thermal Power Corporation) परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीण तीसरे दिन भी सड़क पर डटे हैं। इसे 'चिता आंदोलन' नाम दिया गया है।
प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप
केन-बेतवा प्रोजेक्ट का विरोध कर रहेआंदोलनकारियों का कहना है कि विस्थापन से पहले उन्हें कोई ठीक से नोटिस नहीं दिया गया। कई परिवारों को अब तक मुआवजा भी नहीं मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से मुआवजा तय किया गया।
महिलाओं का रिश्वत मांगने का आरोप
आदिवासी महिलाओं ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारी खुलकर रिश्वत मांगते हैं। पुलिस का डर दिखाकर उन्हें पुश्तैनी जमीन से हटाने की कोशिश की जा रही है।
एक महिला ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके साथ हो रहे अन्याय से तो अच्छा है कि उन्हें मार दिया जाए। इस बयान ने आंदोलन को और भावुक बना दिया है।
सुविधाओं पर रोक लगाने का आरोप
आंदोलन के तीसरे दिन हालात और गंभीर हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन आंदोलन को दबाने के लिए हर हद पार कर रहा है। आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर राशन, पानी, बिजली और दवाओं की आपूर्ति रोक दी गई है।
गंदा पानी पीने पर मजबूर होने का आरोप
आदिवासी महिलाओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सरकार उन्हें गंदा पानी पीने पर मजबूर कर रही है। इन दमनकारी नीतियों के खिलाफ ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
भटनागर बोले, काला सच सामने लाएंगे
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विस्थापन से बड़ा कोई दर्द नहीं होता। उनका आरोप है कि परियोजना के नाम पर अधिकारी और नेता मौके का फायदा उठा रहे हैं।
भटनागर के मुताबिक अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। असली प्रभावितों को आधा-अधूरा मुआवजा देकर छला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ आरोप नहीं है और जल्द ही हर परियोजना का सच सबूतों के साथ सामने लाया जाएगा।
आगे क्या हो सकता है
केन-बेतवा परियोजना परआंदोलन लगातार तीसरे दिन जारी रहने से प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अगर सुविधाओं पर रोक की बात सही पाई जाती है तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
FAQ
- चिता आंदोलन क्यों हो रहा है?
केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत कई योजनाओं से विस्थापित हुए ग्रामीण उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रशासन पर दमन का भी आरोप है। - आंदोलनकारियों का प्रशासन पर क्या आरोप है?
आरोप है कि मुआवजा मनमाने ढंग से तय किया गया और सुविधाओं की आपूर्ति रोक दी गई। कुछ महिलाओं ने घूस मांगने का भी आरोप लगाया है।
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