केन-बेतवा परियोजना पर विवाद: आदिवासियों ने चिता पर लेट कर किया विरोध

Amresh Kushwaha | Apr 09, 2026, 15:29 IST
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छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध हो रहा है। आदिवासी प्रतीकात्मक चिताओं पर लेट कर इसका विरोध कर रहे हैं। प्रशासन ने धारा 163 लगाकर सीमाएं सील कर दी है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राशन-पानी रोककर दमन किया जा रहा है।

News in Short

  • छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी किसान सड़क पर उतर आए हैं।
  • आंदोलनकारी प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर विरोध जता रही हैं।
  • प्रशासन ने धारा 163 लगाकर पन्ना और छतरपुर की सीमाएं बाहरी लोगों के लिए बंद कर दी हैं।
  • आंदोलनकारियों का आरोप है कि राशन, पानी और रास्ते तक रोक दिए गए हैं।
  • आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने इसे प्रशासनिक दमन की पराकाष्ठा बताया है।

News in Detail

चिताओं पर लेटे आदिवासी

बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के लिए तैयार की गई केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) इस वक्त विवादों के घेरे में है। छतरपुर में इस परियोजना का विरोध अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार दोपहर से बड़ी संख्या में आदिवासी किसानों और महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर चिता आंदोलन शुरू कर दिया है। जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।



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दिल्ली जाने से रोका, राशन भी बंद किया

आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से रोका गया। रास्तों पर अवरोध लगाए गए। राशन और पानी की आपूर्ति भी बाधित की गई। दुकानदारों को धमकाकर हटाया गया ताकि आंदोलनकारियों को कोई मदद न मिल सके।



अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि गांव-गांव में प्रशासन, पुलिस और सत्ता से जुड़े लोग मिलकर ग्रामीणों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सब भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए किया जा रहा है।



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धारा 163 के बाद केन नदी में उतरे किसान

प्रशासन ने धारा 163 (CrPC की धारा जो सार्वजनिक जमावड़े पर रोक लगाती है) लागू कर पन्ना और छतरपुर की सीमाएं सील कर दीं। इसके बाद आंदोलनकारियों ने एक अनूठा तरीका अपनाया। वे केन नदी के बीचोंबीच उतर गए। पन्ना के किसान अपनी सीमा में खड़े रहे और छतरपुर के किसान अपनी सीमा में। इस तरह दोनों जिलों के किसानों ने एकजुट होकर विरोध जारी रखा।



भटनागर ने इस पर कहा कि एक ही परियोजना के लोगों को बांटना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। पुलिस और वन विभाग ने सभी रास्तों पर पहरा लगा दिया है।



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महिलाओं और पुलिस में झड़प

आंदोलन खत्म कराने की कोशिश में पुलिस और आदिवासी महिलाओं के बीच झड़प भी हुई। इसमें पुलिस को पीछे हटना पड़ा। आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, वे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।



जीतू पटवारी ने भी उठाए सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस परियोजा को लेकर सवाल उठाए है। उन्होंने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि मोदी-मोहन की जोड़ी ने मध्य प्रदेश के आदिवासियों को चिता पर लेटने के लिए मजबूर कर दिया है। छतरपुर में केन-बेतवा प्रोजेक्ट के लिए हजारों आदिवासियों के गांव खाली करवाए जा रहे हैं, न उचित मुआवजा मिल रहा है और ना ही पुनर्वास की सुविधा दी जा रही है।



इसके विरोध में आदिवासी महिलाएं चिता पर लेटकर भाजपा सरकार का विरोध कर रही हैं। आखिर यह कैसा विकास है, जो लोगों के घर उजाड़ रहा है?



केन-बेतवा परियोजना क्या है?

केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) एक नदी जोड़ो योजना है। इसकी कुल लागत 44 करोड़ 605 लाख रुपए है। इस परियोजना के तहत केन नदी पर पन्ना जिले के ढोड़न गांव के पास बांध बनाकर पानी रोका जाएगा। यह पानी नहर के जरिए बेतवा नदी तक पहुंचाया जाएगा।



दूसरे चरण में बेतवा नदी पर विदिशा जिले में चार बांध बनाए जाएंगे। इसके अलावा बेतवा की सहायक बीना नदी (जिला सागर) और उर नदी (जिला शिवपुरी) पर भी बांध बनाने की योजना है।



किसे फायदा, किसे नुकसान?

सरकार का दावा है कि इस परियोजना से बुंदेलखंड के 65 लाख लोगों को पानी मिलेगा। मध्यप्रदेश के नौ जिलों पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन को इससे फायदा होगा। उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत 13 जिले भी लाभान्वित होंगे। मध्यप्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख जनता को पानी की सुविधा मिलेगी।



वहीं, आदिवासी किसानों का कहना है कि इस परियोजना से उनकी जमीन, जंगल और घर सब कुछ डूब जाएगा। उन्हें न उचित मुआवजा मिला है और न पुनर्वास की व्यवस्था।



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