फर्जी मार्कशीट से पाई सरकारी नौकरी, सास ने दिया साथ, 10 साल बाद कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा

Sanjay Dhiman | Apr 27, 2026, 16:16 IST
Photograph: (the sootr)
खंडवा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का मामला सामने आया। आरोपी मोहन सिंह काजले को कोर्ट ने 3 साल की सजा और 27 हजार रुपए जुर्माना लगाया। साथ ही उसकी सास को भी 6 महीने की सजा हुई।

News in Short

  • मोहन सिंह काजले ने फर्जी मार्कशीट से सरकारी नौकरी हासिल की थी, 10 साल तक काम किया।
  • शिकायत के बाद विभागीय जांच में फर्जी दस्तावेज़ों का खुलासा, आरोपी को निलंबित किया गया।
  • कोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 को काजले को 3 साल की सजा और 27 हजार का जुर्माना सुनाया।
  • काजले की सास भगवती बाई को भी सह आरोपी मानते हुए 6 महीने की सजा और जुर्माना लगाया।
  • विभागीय कार्रवाई की तैयारी, आरोपी की सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) पर विचार किया जा रहा है।

News in Detail

खंडवा जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है। एक आरोपी ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की। मोहन सिंह काजले नाम के इस शख्स ने अपनी स्नातक की अंकसूची फर्जी तरीके से तैयार कराई। इस मार्कशीट के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त की। यह मामला 10 साल पुराना है, जब काजले ने खरगोन जिले में विभिन्न पदों पर काम किया। वह खालवा क्षेत्र में आदिम जाति कल्याण विभाग में हॉस्टल अधीक्षक के रूप में तैनात हुआ।



शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

आदिम जाति कल्याण विभाग में तैनाती के दौरान काजले के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। विभागीय जांच में यह सामने आया कि उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। इसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया और मामला न्यायालय में भेजा गया।



कोर्ट का फैसला

5 साल लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2026 को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी ने मोहन सिंह काजले को दोषी करार दिया। उसे 3 साल की सजा के साथ 27 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। वहीं, सह आरोपी उसकी सास भगवती बाई को भी दोषी मानते हुए 6 महीने की सजा और 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।



सास को भी सह आरोपी बनाया गया

जांच के दौरान पुलिस जब आरोपी के घर पहुंची और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की तो उसकी सास भगवती बाई ने फर्जी मार्कशीट को फाड़ दिया और पुलिस की कार्रवाई में बाधा डाली। इस कारण उसे भी सह आरोपी बनाया गया और सजा सुनाई गई।



चेहरा छिपाकर कोर्ट में दौड़ता रहा आरोपी

जब कोर्ट ने सजा सुनाई, तो मोहन सिंह काजले चेहरा छिपाकर मीडिया से बचते हुए न्यायालय परिसर में दौड़ने लगा। यह दिखाता है कि आरोपी पर इस मामले की गंभीरता का कितना प्रभाव पड़ा है।



विभागीय कार्रवाई की तैयारी

अब आदिम जाति कल्याण विभाग ने आरोपी की सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) की कार्रवाई शुरू करने की योजना बनाई है। प्रशासनिक स्तर पर यह मामला गंभीर लापरवाही और फर्जीवाड़े का प्रतीक बन चुका है।



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