प्रमोशन के सात दिन बाद आदेश निरस्त, वनकर्मियों में आक्रोश, जांच के आदेश
ऐसे समझें पूरा मामला..
- खंडवा सीसीएफ कार्यालय पहुंचे निमाड़ भर के वनकर्मी, पदोन्नति सूची पर जताया आक्रोश
- आरोप, पुरानी सूची से हटाए गए 96 पात्र वनकर्मियों के नाम, अपात्र हुए शामिल
- सिर्फ 7 दिन बाद ही निरस्त हुआ पदोन्नति आदेश, कर्मचारी खुद को ठगा हुआ मान रहे
- संघ की मांग, भारमुक्ति और स्टार सेरेमनी रोकी जाए जब तक सुधार न हो
- सीसीएफ बासु कनौजिया ने बताया लिपिकीय त्रुटि, आदेश पर हो रहा पुनर्विचार
मुश्ताक मंसूरी@खंडवा। सीसीएफ कार्यालय में निमाड़ के वनकर्मी जमा हुए। पदोन्नति सूची को लेकर सभी नाराज थे। आरोप है पहली सूची से 96 नाम हटा दिए गए। उनकी जगह अपात्र लोगों को शामिल किया गया। कर्मचारियों की मांग पर सूची निरस्त कर दी गई है।
मध्यप्रदेश के खंडवा स्थित मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ – Chief Conservator of Forest) कार्यालय के बाहर बुधवार को बड़ी संख्या में वनकर्मी पहुंचे। खंडवा, बुरहानपुर, सेंधवा, बडवाह और बड़वानी डिवीजन से आए इन कर्मचारियों में गुस्सा साफ दिख रहा था।
वजह थी हाल ही में जारी हुई पदोन्नति सूची। कर्मचारियों का आरोप है कि पहले जारी हुई एक सूची से 96 वनकर्मियों के नाम हटा दिए गए। इनकी जगह उन लोगों को शामिल कर लिया गया, जो पात्र नहीं थे। यह सुनकर कर्मचारी हैरान रह गए।
सबसे बड़ी बात यह रही कि पदोन्नति मिलने के सिर्फ 7 दिन बाद ही यह पूरा मामला सामने आया। कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे। इसी नाराजगी के बीच वे सीसीएफ कार्यालय पहुंचे और अपनी बात रखी।
भारमुक्ति रोकने की मांग
वन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अमित मिश्रा ने पूरा मामला विस्तार से बताया। उनके अनुसार कल शाम वनपाल और वनरक्षक पद की प्रमोशन सूची जारी हुई थी। इस सूची में वरीयता के हिसाब से पात्र कर्मचारियों को नीचे कर दिया गया। जो कर्मचारी पात्र नहीं थे, उन्हें ऊपर जगह मिल गई।
मिश्रा ने बताया कि इससे पहले भी एक सूची जारी हुई थी। उसमें 90 से अधिक कर्मचारियों को शामिल कर बाद में निरस्त कर दिया गया था। जो कर्मचारी उस पहली सूची में थे, लेकिन नई सूची में नहीं हैं, वे मानसिक रूप से परेशान हैं। इसका असर उनके रोजमर्रा के काम पर भी पड़ रहा है।
इसी वजह से कर्मचारी संघ ने एक साफ मांग रखी। जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक किसी भी कर्मचारी को उसके पद से भारमुक्त न किया जाए। साथ ही स्टार सेरेमनी को भी रोका जाए। संघ के अनुसार इस पूरे विवाद में कुल 96 वनरक्षक और वनपाल पद के कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।
विभाग ने बताई लिपिकीय गलती
मामले में मुख्य वन संरक्षक बासु कनौजिया ने भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार कुछ आदेश संशोधन के लिए वापस लिए गए हैं। स्टाफ के कुछ कर्मचारी अपना आवेदन लेकर चर्चा करने आए थे। कनौजिया ने कहा कि यह नियम के अनुसार ही है।
उन्होंने बताया कि विभाग ने आवेदन लेकर उसे पुनर्विचार के लिए रखा है। जारी हुए आदेश को लेकर उन्होंने साफ किया कि उसका एक तय क्राइटेरिया था। इसी क्राइटेरिया के आधार पर भर्ती के आदेश दिए गए थे।
लेकिन कुछ लिपिकीय त्रुटि के कारण पात्र लोग सूची में नीचे रह गए। दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग ऊपर आ गए, जो पात्रता नहीं रखते थे। सामान्य केटेगरी का जो रेशो नीचे रहना चाहिए था, वह गलती से ऊपर चला गया।
इसी गलती को सुधारने के लिए आदेश को निरस्त किया गया है। अब पूरे मामले पर फिर से विचार किया जा रहा है। कनौजिया के अनुसार करीब 100 कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें आगे पद खाली होने पर नियुक्ति दी जाएगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल पदोन्नति सूची पर काम रुका हुआ है। विभाग नए सिरे से सूची तैयार कर रहा है। कर्मचारी संघ की मांग है कि इस बार मैरिट लिस्ट का पूरा पालन हो। जब तक नई सूची नहीं आती, कर्मचारियों में असंतोष बना रह सकता है।
यह मामला दिखाता है कि सरकारी विभागों में पदोन्नति जैसी प्रक्रिया में छोटी सी गलती भी बड़ा असर डाल सकती है। सैकड़ों कर्मचारियों का भविष्य इस सुधार प्रक्रिया पर टिका है।
FAQ
- खंडवा वनकर्मी पदोन्नति विवाद क्या है?
यह पदोन्नति सूची में गड़बड़ी का मामला है। आरोप है 96 पात्र वनकर्मियों के नाम हटा दिए गए। कर्मचारियों की मांग पर आदेश निरस्त कर दिया गया। - कितने कर्मचारी इस मामले से प्रभावित हैं?
कुल 96 वनरक्षक और वनपाल पद के कर्मचारी सीधे प्रभावित हैं। इसके अलावा करीब 100 कर्मचारी आगे नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं। - विभाग ने इस पर क्या सफाई दी?
सीसीएफ बासु कनौजिया ने इसे लिपिकीय त्रुटि बताया। उनके अनुसार आदेश को संशोधन के लिए निरस्त कर पुनर्विचार किया जा रहा है।
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