खंडवा में पटवारी ने किया फर्जीवाड़ा: आंगन, रास्ता, चबूतरा कर लिए पत्नी-परिवार के नाम

Sanjay Dhiman | Sept 24, 2026, 22:04 IST
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खंडवा के कोलगांव में पटवारी राजेश मंडलोई ने खुद और पत्नी के नाम 51 जमीनें दर्ज करा लीं। ग्रामीणों की शिकायत पर जांच हुई और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

खंडवा जिले के कोलगांव में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां तैनात रहे पटवारी राजेश मंडलोई पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने गांव की कई जमीनें अपने और पत्नी के नाम दर्ज करा लीं। जांच के बाद प्रशासन ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है।



समझें क्या है पूरा मामला

कोलगांव में पटवारी रहे राजेश मंडलोई पर जमीनें हड़पने का आरोप है। स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री शुरू होने पर यह मामला सामने आया। रिकॉर्ड में उनके और पत्नी के नाम 51 संपत्तियां मिलीं। इनमें घरों के आंगन, रास्ते और सरकारी चबूतरा तक शामिल हैं। शिकायत के बाद जांच हुई और पटवारी को सस्पेंड कर दिया गया।



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51 पट्टे परिवार के नाम

प्रदेश में 17 सितंबर से स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 लागू हुई है। इसका मकसद ग्रामीण परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक देना है। साथ ही निशुल्क रजिस्ट्री भी करानी है।



कोलगांव में इस योजना के तहत कुल 935 पट्टे जारी हुए हैं। इनमें से 51 पट्टे राजेश मंडलोई और उनके परिवार के नाम निकले। रिकॉर्ड बताते हैं कि 48 पट्टे खुद मंडलोई के नाम हैं। बाकी 3 पट्टे उनकी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम दर्ज हैं।



सूची सामने आते ही ग्रामीणों में हलचल मच गई। सवाल उठा कि जिस अधिकारी के पास जमीनों का रिकॉर्ड रहा, उसी के नाम इतनी संपत्तियां कैसे आ गईं।



लोगों के घर-आंगन तक पटवारी के नाम

ग्रामीण दीपक तोमर के परिवार के चार मकान एक ही परिसर में हैं। बीच की जमीन को चारों परिवार आंगन की तरह इस्तेमाल करते हैं। यह जमीन पीढ़ियों से उनके इस्तेमाल में है।



लेकिन स्वामित्व योजना के दौरान पता चला कि यही जमीन रिकॉर्ड में राजेश मंडलोई के नाम दर्ज है। दीपक तोमर ने अपनी बात इस तरह रखी।



मैदान और बावड़ी भी शामिल

शुभम तोमर के घरों के बीच वर्षों पुराना खुला मैदान है। यहीं एक बावड़ी भी है। मोटर पंप के जरिए आसपास के घरों में इसी से पानी पहुंचता है।



दस्तावेज खंगालने पर यह जमीन भी राजेश मंडलोई के नाम मिली। शुभम के मुताबिक, करीब दो-तीन साल पहले पटवारी सर्वे के दौरान उनके घर भी आए थे।



समाज की जमीन पर विवाद

सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश चाकरे ने एक और मामला उजागर किया। गांव के मुख्य रास्ते से लगी जमीन का खसरा नंबर 623 है। इसी जमीन पर बलाही समाज का मांगलिक भवन बन रहा था।



समाज के लोगों ने चंदा जुटाकर निर्माण शुरू कराया था। भवन प्लिंथ लेवल तक बन चुका था। लेकिन जमीन के मालिक के तौर पर पटवारी का नाम आते ही निर्माण रोक दिया गया।



पूर्व सरपंच का दावा

पूर्व सरपंच राधेश्याम तोमर का कहना है कि 2023-24 में भी पट्टे बांटे गए थे। उस समय भी खाली जमीनों के रिकॉर्ड में पटवारी का नाम मिला था।



राधेश्याम के मुताबिक, उन्होंने तभी पटवारी को यह बात बताई थी। पटवारी ने रिकॉर्ड ठीक कराने का भरोसा दिया था। लेकिन अब स्वामित्व योजना की सूची में फिर वही गड़बड़ी सामने आई है।



चबूतरा भी नहीं छोड़ा

शिकायत के बाद वर्तमान पटवारी राकेश पटेल ने ग्रामीणों के साथ खसरों का मिलान किया। इसमें बस स्टैंड पर बना सरकारी चबूतरा भी पटवारी के नाम मिला। इस चबूतरे पर आरसीसी की छत बनी हुई है।



इसके अलावा बलिराम पिता सीताराम तोमर के मकान का खसरा नंबर 530 भी इसी सूची में मिला। यह जमीन भी रिकॉर्ड में पटवारी के नाम दर्ज पाई गई।



जांच के बाद निलंबन

अनुविभागीय अधिकारी खंडवा ऋषि सिंघई ने बताया कि नायब तहसीलदार, वृत्त जावर की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई है। रिकॉर्ड में दुर्भावनापूर्वक पटवारी और उनकी पत्नी का नाम दर्ज करने का आरोप है।



मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम-9 के तहत राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है। ग्रामीण अब रिकॉर्ड सुधारने और आगे की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



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