खरगोन दंगा केस में सभी 11 मुस्लिम आरोपी बरी, जयराम रमेश ने उठाए सवाल, ढहाए थे 16 मकान

Sanjay Dhiman | Aug 05, 2026, 17:27 IST
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खरगोन दंगा केस में सत्र न्यायालय ने 11 आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 2022 की बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की मांग की।

मध्य प्रदेश के खरगोन में साल 2022 में हुए रामनवमी हिंसा मामले ने एक बार फिर राजनीतिक बहस शुरू कर दी है। सत्र न्यायालय द्वारा 11 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तत्कालीन सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।



जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अदालत के फैसले के बाद सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा के बाद प्रशासन ने जल्दबाजी में कई मकानों और दुकानों को तोड़ा था।



कांग्रेस नेता ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय दिया गया बयान कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया को लेकर सवाल पैदा करता है।



खरगोन दंगा केस की पूरी कहानी क्या है?

अप्रैल 2022 में रामनवमी के अवसर पर खरगोन शहर में धार्मिक जुलूस निकाला गया था। इसी दौरान कुछ विवाद हुआ और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई।



पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जुलूस के दौरान पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। हिंसा के बाद शहर के कई इलाकों में तनाव फैल गया था।



घटना के बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए थे। प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की थी।



हिंसा के बाद हुई थी बुलडोजर कार्रवाई

खरगोन हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने 11 अप्रैल 2022 से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन के अनुसार, अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस दौरान 16 मकान और 25 से ज्यादा दुकानें हटाई गई थीं।



कांग्रेस नेताओं ने उस समय भी इस कार्रवाई का विरोध किया था। उनका आरोप था कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया के लोगों के घरों पर कार्रवाई की गई।



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जयराम रमेश ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के बाद सरकार की कार्रवाई पर जवाब जरूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि बिना मजबूत सबूतों के लोगों को आरोपी बनाना और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना गलत है।



उन्होंने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी जयराम रमेश की पोस्ट को साझा किया और इस मुद्दे पर सरकार को घेरा।



अदालत के फैसले के बाद उठे कानूनी सवाल

सत्र न्यायालय ने 11 आरोपियों को पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर बरी किया। अदालत के फैसले के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या हिंसा के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई सही प्रक्रिया के तहत की गई थी।



वहीं सरकार और प्रशासन पहले से कहते रहे हैं कि कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई थी।



जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

खरगोन बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि देश में कई जगहों पर बिना न्यायिक प्रक्रिया के संपत्तियों को तोड़ा जा रहा है।



याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि ऐसी कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं।



बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कई मामलों में सुनवाई की और राज्यों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा।



राजनीतिक विवाद फिर हुआ तेज

खरगोन दंगा केस का फैसला आने के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस इसे सरकार की पुरानी नीति पर सवाल बता रही है।



वहीं भाजपा का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। यह मामला अब केवल अदालत के फैसले तक सीमित नहीं रहा है। यह प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।



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