किडनी फेल कर रहीं पेनकिलर्स, AIIMS डॉक्टर ने दी बड़ी चेतावनी

Anjali Dwivedi | Mar 12, 2026, 22:18 IST
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भारत में 17% आबादी किडनी रोग की चपेट में है। एम्स भोपाल के डॉक्टर ने बताया कि बिना पर्चे वाली दवाइयां और यूरिन में झाग आना किडनी फेलियर का संकेत हो सकते हैं। जानें बचाव के लिए कौन से टेस्ट हैं जरूरी।

News In Short

  • समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) और यूरिन रूटीन जांच करवाते रहें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के हैवी पेनकिलर्स और एंटीबायोटिक्स का सेवन बिल्कुल न करें।
  • पैरों में सूजन, सुबह चेहरे पर भारीपन और यूरिन के रंग में बदलाव को हल्के में न लें।
  • शरीर में सोडियम और पोटेशियम (Potassium) के स्तर की समय-समय पर जांच कराएं।
  • युवाओं में बढ़ते खतरे को देखते हुए खान-पान और शारीरिक सक्रियता पर ध्यान देना जरूरी है।

News In Detail

भारत में किडनी की बीमारियों का ग्राफ खतरनाक तरीके से ऊपर जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीजों के मामले में भारत अब दुनिया में दूसरे नंबर पर है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़े बताते हैं कि देश की लगभग 17% आबादी किडनी की समस्याओं से जूझ रही है।



बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना पड़ रहा भारी

अक्सर लोग मामूली सिरदर्द या बदन दर्द होने पर मेडिकल स्टोर से खरीदकर दर्द निवारक दवाइयां (Painkillers) खा लेते हैं। एम्स भोपाल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. केतन मेहरा के मुताबिक, ये हैवी डोज वाली दवाइयां किडनी की सबसे बड़ी दुश्मन हैं।



हालांकि पैरासिटामोल को तुलनात्मक रूप से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अन्य पेनकिलर्स का लगातार सेवन किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाता है। बिना डॉक्टरी पर्चे के ली गई दवाइयां आपके शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग को धीरे-धीरे खत्म कर रही हैं।



युवाओं में बढ़ता खतरा और अनसुने लक्षण

अब किडनी की बीमारी सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रही। डॉ. मेहरा बताते हैं कि उनके पास 20 साल तक के युवा भी किडनी खराब होने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इसका एक मुख्य कारण ऑटो-इम्यून डिजीज है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही अपनी ही किडनी को नुकसान पहुंचाने लगती है।



युवा अक्सर पैरों में सूजन, सिरदर्द और धुंधला दिखने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो वास्तव में किडनी फेलियर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।



यूरिन का रंग और झाग है खतरे की घंटी

किडनी हमारे शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने का फिल्टर है। एक्सपर्ट के मुताबिक, यूरिन (यूरिन टेस्ट) का रंग और उसकी फ्रीक्वेंसी आपकी सेहत का हाल बता देती है। अगर यूरिन में बहुत ज्यादा झाग बन रहा है या चेहरा और पैरों पर सूजन दिखाई दे रही है, तो इसका मतलब है कि किडनी शरीर के तरल पदार्थ को बाहर निकालने में असमर्थ है। ऐसी स्थिति में तुरंत एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।



50% खराब होने तक नहीं चलता पता

किडनी की सबसे डरावनी बात यह है कि यह 50% तक खराब होने के बावजूद खुद को एडजस्ट कर लेती है। इसके लक्षण तब उभरते हैं जब नुकसान बहुत ज्यादा हो चुका होता है। इसीलिए समय-समय पर जांच कराना ही बचाव का एकमात्र तरीका है।



डॉक्टर समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) कराने की सलाह देते हैं, जिसमें मुख्य रूप से यूरिया और क्रिएटिनिन की जांच की जाती है। 12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता है



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