KMJ चिटफंड मामला: संपत्तियों की ई-नीलामी पर रोक नहीं, हाईकोर्ट का आदेश

Ratan Kumar Mishra | Jun 20, 2026, 14:40 IST
KMJ चिटफंड मामला
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने KMJ चिटफंड की संपत्तियों की ई-नीलामी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि नीलामी की पूरी राशि एस्क्रो खाते में जमा होगी। साथ ही, कोर्ट की अनुमति बिना वितरण नहीं होगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • KMJ चिटफंड ने ग्वालियर-चंबल में करोड़ों रुपए की ठगी की थी।
  • हाईकोर्ट ने संपत्तियों की ई-नीलामी पर रोक लगाने से इनकार किया है।
  • नीलामी राशि राष्ट्रीयकृत बैंक के एस्क्रो खाते में जमा होगी।
  • कोर्ट की अनुमति के बिना यह राशि किसी को नहीं दी जाएगी।
  • करीब 35 संपत्तियों की नीलामी से 55 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।

KMJ चिटफंड घोटाला क्या था?

ग्वालियर-चंबल अंचल में KMJ (कैला माई की जय) लैंड डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड ने हजारों लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी की थी। कंपनी के डायरेक्टर संतोषी लाल राठौर, उनकी पत्नी कंचन राजावत और अन्य सहयोगियों ने रियल एस्टेट और कृषि भूमि में निवेश का मुखौटा पहना था। कम समय में पैसे दोगुने-तिगुने करने का लालच देकर यह जाल फैलाया गया था।



करीब 14 साल तक यह घोटाला चलता रहा। जब निवेशकों का पैसा डूबने लगा तो मामला सामने आया है। SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने जुलाई 2017 में इसे सामूहिक निवेश योजना (CIS) करार दिया था। साथ ही, कंपनी को पैसा लौटाने का आदेश दिया था।



हाईकोर्ट पहुंचा मामला

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ग्वालियर की विशेष अदालत ने 17 सितंबर 2022 को आदेश दिया था कि राज्य के अधिकारी कंपनी की संपत्तियां नीलाम कर उससे मिली रकम निवेशकों को लौटाई जाए।



इस फैसले को भूरेलाल और कुछ अन्य लोगों ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में चुनौती दी थी।



उनका कहना है कि SEBI का अंतरिम आदेश अभी भी लागू है। साथ ही, कंपनी को बंद करने की प्रक्रिया NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में पूरी नहीं हुई है।



ऐसे में उनका तर्क है कि जब तक ये दोनों प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक संपत्ति की नीलामी पर रोक लगाई जानी चाहिए।



हाईकोर्ट ने रोक से किया इनकार

जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। सरकार की ओर से अधिवक्ता रवींद्र दीक्षित ने कहा कि नीलामी का एकमात्र मकसद निवेशकों की जमा राशि वापस दिलाना है। याचिकाकर्ता यह नहीं बता सके कि कंपनी में उनका कितना निवेश था और निवेशकों का हित कैसे प्रभावित होगा।



कोर्ट ने नीलामी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही एक अहम अंतरिम व्यवस्था लागू की है। कोर्ट ने कहा कि नीलामी से मिली पूरी राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के एस्क्रो अकाउंट यानी एक विशेष सुरक्षित खाते में जमा की जाए। इस राशि का वितरण हाईकोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना नहीं होगा।



35 संपत्तियां, 55 करोड़ की उम्मीद

प्रशासन ने कंपनी की करीब 35 संपत्तियों की पहचान कर ली है। इनकी अनुमानित कीमत करीब 55 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इन्हीं संपत्तियों की ई-नीलामी से ठगे गए निवेशकों को पैसा लौटाने की कोशिश की जा रही है। इनमें अधिकांश गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार हैं जिन्होंने अपनी जीवनभर की बचत लगाई थी।



FAQ

  1. KMJ चिटफंड घोटाला क्या था?
    KMJ यानी कैला माई की जय लैंड डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड ने ग्वालियर-चंबल अंचल में हजारों लोगों से रियल एस्टेट और कृषि भूमि में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी की। कंपनी के मुख्य डायरेक्टर संतोषी लाल राठौर और उनकी पत्नी कंचन राजावत ने यह घोटाला अंजाम दिया। SEBI ने 2017 में इसे अवैध सामूहिक निवेश योजना घोषित किया। करीब 35 संपत्तियों की नीलामी से 55 करोड़ रुपए वसूली की कोशिश की जा रही है।
  2. एस्क्रो अकाउंट क्या होता है?
    एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) एक विशेष बैंक खाता होता है जिसे किसी तटस्थ तीसरे पक्ष यानी यहां राष्ट्रीयकृत बैंक के पास रखा जाता है। इसमें जमा राशि तब तक किसी को नहीं दी जाती जब तक कि निर्धारित शर्तें पूरी न हों।

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