सीनियर का फोन न उठाना थाना प्रभारी को पड़ा भारी, लगाया 10 हजार का जुर्माना
5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला...
- कोलार थाना प्रभारी पर कामकाज में लापरवाही और अनुशासनहीनता के चलते बड़ी कार्रवाई की गई है।
- पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने टीआई संजय सोनी पर 10 हजार रुपए का फाइन लगाया है।
- कमिश्नर ने थाना प्रभारी को भविष्य में अपनी कार्यप्रणाली सुधारने की कड़ी चेतावनी भी दी है।
- तत्कालीन डीसीपी मयूर खंडेलवाल ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर थाना प्रभारी की शिकायत की थी।
- शिकायत में फोन न उठाने और शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बरतने की बात सामने आई है।
पुलिस कमिश्नर का बड़ा एक्शन
भोपाल पुलिस विभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है। कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी पर कामकाज में लापरवाही और अनुशासनहीनता को लेकर एक्शन हुआ है।
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए टीआई संजय सोनी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना ठोक दिया है।
इतना ही नहीं पुलिस कमिश्नर ने उन्हें सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वे भविष्य में अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं।
डीसीपी ने पत्र लिखकर की थी शिकायत
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब तत्कालीन डीसीपी जोन-4 (भोपाल) मयूर खंडेलवाल ने पुलिस कमिश्नर को एक शिकायती पत्र लिखा था।
इस पत्र में उन्होंने कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी की कार्यशैली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे। डीसीपी की इस शिकायत के बाद ही मामले की जांच हुई और अब कमिश्नर ने यह बड़ा कदम उठाया है।
थाना प्रभारी संजय सोनी पर आरोप?
शिकायत पत्र में थाना प्रभारी की कई गंभीर कमियों और लापरवाहियों का जिक्र किया गया था।
| क्र. सं. | मुख्य आरोप | विवरण |
| 1. | अधिकारियों के फोन न उठाना | थाना प्रभारी अपने से सीनियर अधिकारियों के फोन रिसीव नहीं करते थे। |
| 2. | सीएम हेल्पलाइन में लापरवाही | सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली आम जनता की शिकायतों के निपटारे में ढिलाई बरतते थे। |
| 3. | डेली रिपोर्टिंग पर ध्यान न देना | थाने की रोजाना की रिपोर्टिंग व्यवस्था और कामकाज को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे थे। |
भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। उन्हें साफ चेतावनी भी दी गई है कि आगे ऐसी लापरवाही बिल्कुल न हो।
पुलिस व्यवस्था होगी मजबूत
जब लोगों को पता चलेगा कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों पर भी एक्शन होता है, तो उनका कानून और पुलिस व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा।
साथ ही इस कड़े कदम से पुलिस विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों को भी एक साफ संदेश जाएगा। ड्यूटी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार आ सकता है।
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