कुक्षी सिंचाई परियोजना का दायरा बढ़ा, 75 हजार हेक्टेयर जमीन को मिलेगा सिंचाई का पानी

Pawan Modiya | Aug 11, 2026, 21:27 IST
कुक्षी परियोजना
धार जिले की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर काम तेज हुआ है। यह परियोजना चार तहसील के 247 गांवों की 75 हजार हेक्टेयर जमीन को नर्मदा के पानी से सींचेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • धार जिले की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है।
  • इससे लाभान्वित गांवों की संख्या बढ़कर 247 हो गई है।
  • परियोजना की लागत भी बढ़कर 2,717 करोड़ रुपए हो गई है।
  • चिखल्दा गांव के पास संपवेल और पंप हाउस का निर्माण शुरू हुआ है।
  • परियोजना से चार तहसीलों की 75 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का पानी मिलेगा।

धार जिले में नर्मदा नदी के पानी से सिंचाई परियोजना पर काम तेज हुआ है। कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना जिले की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। यह चार तहसीलों के 247 गांवों की खेती की जमीन को सींचेगी।



योजना को कब मिली थी मंजूरी

कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने मंजूरी दी। यह मंजूरी 14 जनवरी 2020 को मिली थी। उस समय इसमें कुक्षी और डही तहसील के 175 गांव शामिल थे। साल 2022 में परियोजना का विस्तार किया गया। इसमें मनावर और गंधवानी तहसील के गांव भी जोड़े गए। अब कुल 247 गांव इस परियोजना से जुड़ चुके हैं। परियोजना की लागत भी बढ़ गई है। पहले लागत 2,117 करोड़ रुपए तय की गई थी। अब यह बढ़कर 2,717 करोड़ रुपए हो गई है।



संपवेल-नहर का निर्माण शुरू

परियोजना के तहत चिखल्दा गांव की खेड़ा बस्ती के पास संपवेल बन रहा है। पास में ही पंप हाउस भी तैयार हो रहा है। यह गांव नर्मदा किनारे डूब क्षेत्र में आता है। नर्मदा नदी से संपवेल तक पानी लाने के लिए एक नहर बनाई जाएगी। इसकी लंबाई करीब 800 मीटर होगी। इसके लिए बड़ी मशीनों से गहरी खोदाई की जा रही है। चट्टानी इलाके में ब्लास्टिंग का काम भी हो रहा है। जमीन की सतह से करीब 35 से 50 मीटर गहराई तक खोदाई हो रही।



बैकवाटर से बचाव की तैयारी

नहर को खास तरीके से डिजाइन किया जा रहा है। इससे नर्मदा का जलस्तर 111 मीटर तक होने पर भी पानी संपवेल तक पहुंचेगा। यह डिजाइन इसी मकसद से बनाया गया है। लेकिन नर्मदा का जलस्तर इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है। तय समय से पहले ही बैकवाटर भरने लगा है। निर्माण स्थल पर नर्मदा का बैकवाटर 136 मीटर जलस्तर के बाद पहुंचने लगता है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। बैकवाटर रोकने के लिए एजेंसी ने मिट्टी की बड़ी दीवार बनाई है। यह दीवार करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची है। इससे बढ़ते बैकवाटर से निर्माण कार्य को बचाया जा सकेगा।



किसानों को मिलेंगे तीन फायदे

इस परियोजना से धार की कुक्षी, डही, मनावर और गंधवानी तहसीलों को लाभ होगा। यहां के 247 गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर जमीन को पानी मिलेगा। हर दो हेक्टेयर खेत के लिए एक वॉल्व लगाया जाएगा। इसे माइक्रो सिंचाई पद्धति से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को पानी की बचत के साथ बेहतर सिंचाई मिलेगी। पाइपलाइन जिन गांवों से गुजरेगी, वहां पेयजल संकट होने पर कनेक्शन भी दिए जाएंगे। रास्ते में पड़ने वाले करीब 50 तालाबों को भी इसी पाइपलाइन से भरा जाएगा। इस तरह परियोजना से सिंचाई, पेयजल और तालाब भरने जैसे तीन बड़े फायदे मिलेंगे।



अफसर बोले- तय समय में पूरा होगा प्रोजेक्ट

नर्मदा घाटी विकास विभाग के कार्यपालन यंत्री प्रदीप मुजाल्दा ने परियोजना पर जानकारी दी। उनके मुताबिक पर्यावरण मंजूरी मिलने में पहले देरी हुई थी। अब काम तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पाइपलाइन के साथ संपवेल का बेस भी बनाया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि तय समय में काम पूरा हो जाएगा। इससे धार जिले के किसानों को जल्द फायदा मिलना शुरू होगा।



क्यों जरूरी है यह योजना

धार जिले में नर्मदा किनारे बसे गांवों के लिए सिंचाई हमेशा चुनौती रही है। कई गांवों में नहरों से पानी पहुंचाना मुश्किल रहा है। ऐसे इलाकों में माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं कारगर विकल्प मानी जाती हैं। इनमें पाइपलाइन के जरिए सीधे खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। इससे जमीन को समतल करने की जरूरत भी नहीं पड़ती।



साथ ही स्थायी भूमि अधिग्रहण की जरूरत भी कम होती है। यही वजह है कि यह परियोजना क्षेत्र के लिए अहम मानी जा रही है। इससे धार के दूरदराज गांवों में खेती को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।



नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण कई सालों से ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा। इनका मकसद नर्मदा के पानी को दूरदराज के खेतों तक पहुंचाना है। कुक्षी परियोजना भी इसी कड़ी का हिस्सा है।



इस इलाके में जमीन ऊंची-नीची होने के कारण पारंपरिक नहर बनाना आसान नहीं है। ऐसे में पंप से पानी ऊपर उठाकर पाइपलाइन से पहुंचाना बेहतर तरीका माना गया। परियोजना पूरी होने के बाद इलाके की खेती सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं रहेगी। किसान साल में एक से ज्यादा फसल भी ले सकेंगे। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद है।



जरूरी FAQ

कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से कितने गांवों को फायदा मिलेगा?


इस परियोजना से धार जिले की कुक्षी, डही, मनावर और गंधवानी तहसीलों के 247 गांवों को फायदा मिलेगा। इन गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को नर्मदा के पानी से सिंचाई की सुविधा मिलेगी।



परियोजना की कुल लागत कितनी है और यह कैसे बढ़ी?


परियोजना की शुरुआती लागत 2,117 करोड़ रुपए तय की गई थी। साल 2022 में परियोजना के विस्तार के बाद इसमें और गांव जुड़े, जिसके बाद लागत बढ़कर 2,717 करोड़ रुपए हो गई।



बैकवाटर से निर्माण कार्य को बचाने के लिए क्या तैयारी की गई है?


नर्मदा का बढ़ता जलस्तर निर्माण स्थल तक न पहुंचे, इसके लिए एजेंसी ने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची मिट्टी की दीवार बनाई है, ताकि काम बिना रुकावट जारी रह सके।



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