जिस कूनो में PM मोदी ने बसाए चीते, वहीं गोली लगने से शावक की मौत, जांच के लिए केंद्र ने भेजी टीम
गोली लगने से चीता शावक की मौत
बता दें कि मादा चीता निर्वा के शावक KNG22 को 25 अक्टूबर 2026 को घायल हालत में पाया गया था। वह मुरैना जिले के जंगलों में मिला था। इसके बाद उसे रेस्क्यू करके श्योपुर वन मंडल के जरिए जबलपुर ले जाया गया।
जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र में उसका गंभीर हालत में इलाज किया गया। इस दौरान इमरजेंसी सर्जरी भी करनी पड़ी। सर्जरी के दौरान बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए। छर्रे यानी बंदूक से निकलने वाले छोटे-छोटे धातु के दाने होते हैं। डॉक्टरों की जांच में पता चला कि इन छर्रों की वजह से चीते के शरीर के अंदर कई जगह चोटें आई थीं। इसके बाद 27 अक्टूबर को शावक ने दम तोड़ दिया।
चीते को गोली मारी या पीटा गया?
इस मामले में पहले खबर आई थी कि ग्रामीणों ने चीते को पीटा था। बताया गया कि चीते ने बछड़ों का शिकार किया था। इसके बाद बीते रविवार को उस पर हमला किया गया। शुरुआत में कहा गया कि ग्रामीणों ने उसे लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था। लेकिन बाद में मेडिकल जांच में कुछ और ही सामने आया।
जबलपुर वेटरनरी कॉलेज की डॉ. शोभा जावरे ने चीते को गोली लगने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से पांच छर्रे निकाले गए। इससे साफ हुआ कि चीते को गोली मारी गई थी। इलाज के दौरान ही यह बात सामने आई। इसे देश के चीता स्टेट मध्य प्रदेश का पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है।
केंद्रीय कमेटी जांच में कौन शामिल
केंद्रीय कमेटी इस मामले की जांच के लिए जल्द मध्य प्रदेश आएगी। इसमें NTCA (National Tiger Conservation Authority) के महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। वहीं WCCB से अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उपनिदेशक भी टीम का हिस्सा हैं।
ये दोनों संस्थाएं वन्यजीवों की सुरक्षा और उनसे जुड़े अपराधों को रोकने का काम करती हैं। कमेटी मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच करेगी। राज्य सरकार पहले ही वन और पुलिस अधिकारियों को मिलाकर STF बना चुकी है।
केंद्र की टीम घटना कैसे हुई और मौके पर क्या सबूत मिले इसकी जांच करेगी। इसके साथ ही कूनो नेशनल पार्क और आसपास के इलाकों में चीतों की सुरक्षा के इंतजाम भी देखेगी। टीम यह जांच करेगी कि चीतों की निगरानी और सुरक्षा के लिए तय नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
इसके अलावा चीतों की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े बाकी इंतजामों की भी समीक्षा की जाएगी।
जांच रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जाएगी
केंद्रीय कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट और सुझाव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंपेगी। टीम यह पता लगाएगी कि चीते को किन हालात में गोली लगी और इसके पीछे क्या वजह थी। इसके लिए मौके से मिले सबूतों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है। अब सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
वन मंत्री से इस्तीफे की मांग
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों की संदिग्ध मौतों पर सवाल उठाए हैं।
दुबे ने चीतों की संदिग्ध मौत और शिकार के लिए केंद्र और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
जांच के सामने तीन मुख्य सवाल
अब इस मामले की जांच में तीन बड़े सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। पहला, चीते को किन हालात में गोली लगी। दूसरा, घटना से जुड़े सबूत क्या बताते हैं। तीसरा, इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।
इन सभी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएंगे।
अब आगे क्या होगा जांच में
चीता शावक की मौत के बाद जांच दो स्तर पर चलेगी। एक तरफ राज्य की एसटीएफ है। दूसरी तरफ केंद्र की कमेटी। रिपोर्ट से चीता प्रोजेक्ट में सुरक्षा का अगला कदम तय होगा। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम नतीजा आना बाकी है। KNG22 की मौत से जुड़ी हर नई जानकारी जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी।
क्या है प्रोजेक्ट चीता?
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। उस दिन नामीबिया से लाए गए 8 अफ्रीकी चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद वन्यजीवों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
इसके साथ ही 1952 में देश से विलुप्त घोषित किए गए चीतों को दोबारा भारतीय जंगलों में बसाना भी इसका लक्ष्य है।यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है, क्योंकि इसके तहत पहली बार किसी मांसाहारी जानवर को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में लाकर बसाने की कोशिश की गई।