कूनो में बढ़ेगा चीतों का कुनबा, साल के अंत तक दक्षिण अफ्रीका से आएंगे 12 मेहमान
समझें क्या है पूरा मामला...
- दक्षिण अफ्रीका से 12 नए चीते कूनो नेशनल पार्क आएंगे।
- इनके आने की तारीख अगले एक महीने में तय होगी।
- केंद्रीय वन मंत्रालय जल्द इसकी औपचारिक घोषणा करेगा।
- कूनो में चीतों की संख्या बढ़ने से जगह की कमी हो रही है।
- फेज-2 में 18 चीते तीन नए ठिकानों में भेजे जाएंगे।
मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां जल्द ही नए मेहमानों की आमद होने वाली है। दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत लाए जाएंगे। यह खबर चीता प्रोजेक्ट के लिए एक और बड़ा कदम मानी जा रही है।
कब आएंगे नए मेहमान चीते
अधिकारियों के मुताबिक यह चीते अक्टूबर से दिसंबर के बीच कूनो पहुंचेंगे। सही तारीख अभी तय नहीं है। यह फैसला अगले एक महीने में लिया जाएगा। तारीख तय होने के बाद केंद्रीय वन मंत्रालय औपचारिक ऐलान करेगा। इससे पहले चीतों के स्वास्थ्य और क्वारंटीन की तैयारियां पूरी की जाएंगी। यह भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से चल रहे समझौते का हिस्सा है।
क्यों बढ़ रहा चीतों का कुनबा
भारत में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत सितंबर 2022 में हुई थी। तब नामीबिया से आठ चीते कूनो लाए गए थे। इसके कुछ महीने बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भी 12 चीते पहुंचे थे। इसके बाद देश में कई शावकों का जन्म भी हुआ। इस साल की शुरुआत में बोत्सवाना से भी नए चीते भारत लाए गए।
मौजूदा जानकारी के अनुसार अभी देश में चीतों की कुल संख्या 57 के करीब है। इनमें से अधिकतर कूनो नेशनल पार्क में ही रह रहे हैं। बाकी चीतों को गांधी सागर अभयारण्य भेजा जा चुका है। इतनी बड़ी संख्या के चलते अब कूनो पर दबाव बढ़ गया है।
फेज-2 का मास्टर प्लान
चीतों की बढ़ती संख्या और इनब्रीडिंग यानी आपस में करीबी रिश्तेदारों के बीच प्रजनन की समस्या को देखते हुए एक नया प्लान बनाया गया है। इसे चीता प्रोजेक्ट का फेज-2 नाम दिया गया है। इनब्रीडिंग से चीतों की सेहत और जेनेटिक क्वालिटी पर बुरा असर पड़ सकता है।
इसी वजह से भारत में जन्मे 18 चीतों को नई जगहों पर भेजने की तैयारी है। इनमें गुजरात की बन्नी सेंचुरी शामिल है। साथ ही मंदसौर की गांधी सागर सेंचुरी का नाम भी है। तीसरी जगह है रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही के नाम से भी जाना जाता है। यह तीनों जगहें चीतों के लिए नए घर के तौर पर तैयार की जा रही हैं।
गांधी सागर में तैयारी पूरी
गांधी सागर अभयारण्य में चीतों के लिए खास तैयारी हो चुकी है। यहां 64 वर्ग किलोमीटर का बोमा और प्रे-बेस तैयार किया गया है। बोमा एक सुरक्षित बाड़ा होता है, जहां चीतों को शुरुआत में रखा जाता है। प्रे-बेस का मतलब है शिकार के लिए जरूरी जानवरों की उपलब्धता। इस तैयारी के बाद यहां आठ से 10 चीतों को रखा जा सकेगा। यानी गांधी सागर अब कूनो के बाद दूसरा बड़ा ठिकाना बन चुका है।
बन्नी-नौरादेही में तैयारी
गुजरात की बन्नी सेंचुरी में भी काम पूरा हो चुका है। यहां सवाना जैसी परिस्थितियां तैयार की गई हैं। सवाना वह घास का मैदान होता है, जो अफ्रीका में चीतों का असली घर माना जाता है। बन्नी में सॉफ्टवेयर-रिलीज एनक्लोजर तैयार किया गया है।
इसका मतलब है ऐसा बाड़ा, जहां चीतों को धीरे-धीरे खुले जंगल में छोड़ने की आदत डाली जाती है। दूसरी तरफ नौरादेही में भी काम तेजी से चल रहा है। यहां 35 किलोमीटर लंबी चेनलिंक फेंसिंग का काम अंतिम चरण में है। यह फेंसिंग चीतों को सुरक्षित रखने और उन्हें भागने से रोकने के लिए जरूरी है।
अब तक चीता प्रोजेक्ट का सफर
भारत में चीता प्रोजेक्ट की कहानी करीब चार साल पुरानी है। सत्तर साल पहले चीता भारत से पूरी तरह विलुप्त हो गया था। साल 2022 में इसे फिर से बसाने की मुहिम शुरू हुई है। शुरुआत में कुछ चीतों की मौत ने चिंता भी बढ़ाई थी। लेकिन इसके बाद कई मादा चीतों ने कूनो में शावकों को जन्म दिया। इससे प्रोजेक्ट को नई ताकत मिली। अब तक देश में पैदा हुए शावकों की संख्या तीन दर्जन के पार जा चुकी है। यही वजह है कि अब कूनो के बाहर भी नए ठिकाने तलाशे जा रहे हैं।
आगे की योजना
मध्य प्रदेश सरकार लगातार चीता प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की बात कहती रही है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि मध्य प्रदेश अब देश का चीता स्टेट बन चुका है। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में राज्य में चीतों के लिए तीन ठिकाने तैयार होंगे। उनके मुताबिक कूनो के साथ गांधी सागर और नौरादेही भी चीतों का नया घर बनेंगे।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए चीतों के आने से जेनेटिक डायवर्सिटी यानी नस्लीय विविधता और मजबूत होगी। इससे चीतों की सेहत और प्रजनन क्षमता दोनों बेहतर होंगी। आने वाले महीनों में इस पूरे प्लान पर काम और तेज होने की उम्मीद है।
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