कूनो नेशनल पार्क में मीट घोटाला! बिना टेंडर मीट खरीदी का आरोप, EOW में शिकायत
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क को दुनिया भर में चीता प्रोजेक्ट के लिए पहचान मिली थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। लेकिन अब इसी प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। चीतों के लिए बकरा, पाड़ा और मीट सप्लाई में करोड़ों रुपए के सरकारी फंड में हेराफेरी का दावा किया गया है।
श्योपुर निवासी मोहम्मद चीनी कुरैशी ने इस मामले की शिकायत ग्वालियर EOW में दर्ज कराई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई की भी अपील की है। शिकायत में कई गंभीर बिंदु उठाए गए हैं।
बिना टेंडर खरीद
शिकायत के मुताबिक सितंबर 2022 में चीते कूनो लाए गए थे। उस दौर में बकरा और पाड़ा मीट बिना टेंडर के खरीदे गए। आरोप है कि सप्लायर को लगभग 700 रुपए प्रति किलो की दर से भुगतान किया गया। यह दर सामान्य से काफी ज्यादा बताई जा रही है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि खरीद प्रक्रिया में शुरुआत से ही अनियमितताएं बरती गईं। वास्तविक वजन और भुगतान में भी अंतर सामने आया। इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी जल्दबाजी में टेंडर क्यों नहीं निकाला गया।
फर्जी वजन का खेल
शिकायत में सबसे बड़ा आरोप वजन में हेराफेरी का है। दावा है कि हर बकरे के वजन में 20 से 30 किलो तक की बढ़ोतरी दिखाई गई। इसी बढ़े हुए वजन के आधार पर भुगतान किया जाता रहा। इससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंचा है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह खेल जानबूझकर खेला जा रहा था। असली वजन कम होने के बावजूद कागजों पर वजन बढ़ाकर दिखाया गया। इससे सप्लायर को हर बार ज्यादा भुगतान मिलता रहा।
टेंडर में गड़बड़ी
शिकायत में सिर्फ 2022 का मामला नहीं है। वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के टेंडरों पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कम दर वाले टेंडरों को बिना ठोस वजह के निरस्त किया गया। इसके बाद अधिक दर वाले सप्लायर को फायदा पहुंचाया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा के नियमों का पालन नहीं हुआ। ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में भी गड़बड़ी की बात सामने आई है। इसमें एक कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
अधिकारियों पर आरोप
शिकायत में कूनो के अधिकारियों और वर्तमान मीट सप्लायर पर भी सीधा आरोप लगाया गया है। दावा है कि इनकी मिलीभगत से यह पूरा फर्जीवाड़ा चल रहा था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक इससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने मांग की है कि दोषी अधिकारियों और सप्लायर के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो। साथ ही भविष्य में पारदर्शी सप्लाई व्यवस्था बनाने की भी मांग की गई है।
आगे क्या होगा
फिलहाल इन आरोपों की सच्चाई क्या है, यह EOW की जांच से ही स्पष्ट होगा। जांच एजेंसी अब दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की पड़ताल करेगी। यह भी देखा जाएगा कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई या नहीं।
चीता प्रोजेक्ट को लेकर कूनो नेशनल पार्क की पहचान पूरी दुनिया में बनी थी। ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोपों ने इस प्रोजेक्ट की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि EOW कब और किस स्तर पर कार्रवाई करता है।
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