कूनो के बाद कहां होगा चीतों का नया घर? गुजरात-एमपी के अभ्यारण्यों के बीच होड़

Sanjay Sharma | Jun 19, 2026, 08:15 IST
Photograph: (the sootr)
कूनो नेशनल पार्क में अभी 27 चीते हैं। अगला बैच लाने की तैयारी है। मध्य प्रदेश अपने 3 जंगल आगे कर रहा है। गुजरात अपने गिर और भावनगर रिजर्व के लिए प्रयास कर रहा है। अब अंतिम फैसला NTCA और केंद्र सरकार के पाले में है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कुनो में अब चीतों की संख्या हुई 27, इनमें 12 शावक शामिल
  • 2026 में चीतों का नया समूह भी आएगा कूनो अभ्यारण्य
  • कूनो के चीतों के लिए कतार में हैं एमपी और गुजरात के रिजर्व
  • एमपी के रानी दुर्गावती, गांधी सागर और माधव उद्यान ने की तैयारी
  • गुजरात का गिर और भावनगर अभ्यारण्य भी मांग रहा चीता

कुनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट सक्सेस की राह पर है। 2022 में नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आए थे। आज कुनो में 15 वयस्क और 12 बच्चे हैं। कुल 27 चीते हैं। 4 बच्चे इसी साल पैदा हुए। ये प्रोजेक्ट चीता का फेज-1 था। अब फेज-2 की तैयारी है।



2026-27 में दक्षिण अफ्रीका से नया समूह आने वाला है। इसको देखते हुए मध्य प्रदेश और दूसरे राज्य भी चीतों की मांग कर रहे हैं। हांलाकि अभी तय नहीं है आखिर अब किस अभ्यारण्य को चीतों का दूसरा घर बनने का मौका मिलेगा।



कूनो अभ्यारण्य का रिपोर्ट कार्ड

कुनो में 2022 से चीता प्रोजेक्ट चल रहा है। 20 चीते नामीबिया-दक्षिण अफ्रीका से आए थे। आज 15 वयस्क और 12 बच्चे हैं। कुल 27 चीते हैं। 4 बच्चे 2026 में पैदा हुए। शुरुआत में 10 चीते मरे। बीमारी और गर्मी वजह थी। अब वेटरनरी केयर बेहतर है। रेडियो कॉलर से ट्रैकिंग हो रही है। शिकार भी मिल रहा है। कुनो मॉडल सक्सेस माना जा रहा है।



मध्य प्रदेश पहले से तैयार

देश में चीतों को संभालने का एकमात्र अनुभव मध्य प्रदेश के पास है। नौरादेही अभ्यारण्य 1200 वर्ग किमी में फैला है। यहां काले हिरण के झुंड यानी चीतों के लिए पर्याप्त भोजन है। गांधी सागर अभ्यारण्य चंबल से सटा है वहीं माधव पार्क शिवपुरी में है। तीनों जगह बाड़ाबंदी की जा सकती है।कूनो के अनुभव के आधार पर इन तीनों में तैयारी भी पूरी कर ली है।



गुजरात का दावा भी मजबूत

गुजरात रिस्क डाइवर्स चाहता है। अधिकारियों का कहना है चीतों को एक स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए। गिर नेशनल पार्क को शिकारी संभालने का अनुभव है। वहीं भावनगर तटीय इलाका दूसरा विकल्प बन सकता है। यहां बसाहटें कम हैं और कच्छ का बन्नी ग्रासलैंड खुला मैदान है। गुजरात ने इसके लिए जमीन और बजट की प्लानिंग भी कर ली हे।



केंद्र और एनटीसीए करेंगे फैसला

कूनो के बाद देश के किस राज्य और किस अभ्यारण्य को चीतों का दूसरा घर बनने का मौका मिलेगा यह अभी तय नहीं है। हांलाकि मध्य प्रदेश के तीन और गुजरात के दो अभ्यारण्य इस रेस में हैं। दोनों ही राज्य चीतों पर दावा कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी निर्णय करेगी चीते किस अभ्यारण्य को मिलेंगे।



विशेषज्ञ चाहते हैं चीतों की शिफ्टिंग

वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कूनो से 30 फीसदी चीते दूसरे अभ्यारण्य में शिफ्ट करना जरूरी है। रिस्क डायवर्स के लिए ये महत्वपूर्ण है। संक्रमण फैलने या अन्य वजह से चीतों की नस्ल खतरे में पड़ सकती है। दूसरी वजह से चीतों की नस्ल खतरे में पड़ जाएगी।



अलग- अलग रखने पर उन्हें संकट से बचा सकते हैं। एमपी के पास चार साल का अनुभव है, वहीं गुजरात के पास खुले मैदान और भरपूर बजट वाला रिजर्व एरिया है।



FAQ

  1. कुनो में अभी कितने चीते हैं और सब ठीक हैं?
    27 चीते हैं - 15 वयस्क, 12 बच्चे। 4 बच्चे 2026 में पैदा हुए। 10 चीते अब तक मर चुके हैं, बाकी हेल्दी हैं।
  2. एमपी के पास कुनो के अलावा और कौन से जंगल रेडी हैं?
    नौरादेही, गांधी सागर, माधव नेशनल पार्क। तीनों में शिकार और पानी की स्थिति अच्छी बताई जा रही है।
  3. गुजरात को चीते क्यों चाहिए जबकि वहां शेर हैं?
    गुजरात का तर्क है एक जगह पर चीते रखना खतरनाक है। गिर-भावनगर में काफी जगह है। मानवीय दखल कम है और रिस्क डाइवर्सिफाई बेहतर होगा।

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