केंद्रीय मंत्री और एमपी से राज्यसभा सांसद एल मुरुगन का इस्तीफा, पीएम को लिखा पत्र
पत्र में क्या लिखा?
पीएम मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने कहा कि वे अब फिर से जमीनी राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं। उनकी इच्छा तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करने की है। मुरुगन ने पीएम मोदी के हालिया तमिलनाडु दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरे में लोगों का प्यार और उत्साह देखकर उनका भरोसा बढ़ा है कि बीजेपी तमिलनाडु में और बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। मुरुगन ने कहा कि वे अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अपना पूरा समय और ताकत लगाना चाहते हैं।
तमिलनाडु लौटने का ऐलान
राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र अपने एक्स (X) अकाउंट पर भी शेयर किया है। इसमें उन्होंने कहा कि वे अब जमीनी राजनीति में लौटना चाहते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर तमिलनाडु में बीजेपी को मजबूत करना चाहते हैं। इसके लिए वे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले अपना पूरा समय देना चाहते हैं। मुरुगन ने कहा कि उनके लिए देश सबसे पहले है। उसके बाद पार्टी और आखिर में वे खुद आते हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मिली थी हार
रिपोर्ट के मुताबिक, एल. मुरुगन ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अविनाशी सीट से चुनाव लड़ा था। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
इसी चुनाव में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन भी केरल की कांजीरापल्ली सीट से मैदान में उतरे थे। वे 29 हजार 662 वोटों से हार गए थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। खास बात यह है कि दोनों नेता मध्य प्रदेश से ही राज्यसभा सांसद थे।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या मुरुगन के इस्तीफे का उनकी चुनावी हार से कोई संबंध है? फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है। मुरुगन ने भी अपनी हार को इस्तीफे की वजह नहीं बताया है।
कुरियन और बिट्टू के बाद तीसरा
मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद मुरुगन से पहले जून में पूर्व राज्यसभा सांसद जॉर्ज कुरियन भी मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इसके बाद जुलाई में रवनीत सिंह बिट्टू ने भी अपना पद छोड़ दिया था। इस तरह चार महीने के भीतर केंद्र सरकार के तीन राज्य मंत्री मंत्रिपरिषद से बाहर हो चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। अब देखना होगा कि मुरुगन के मामले में पार्टी क्या फैसला लेती है। हालांकि, मुरुगन की राज्यसभा सीट तभी खाली होगी, जब वे सांसद पद से इस्तीफा देंगे और उनका इस्तीफा स्वीकार होगा।
मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट
बीजेपी ने फरवरी 2024 में एल. मुरुगन को दोबारा मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा था। उनका कार्यकाल 3 अप्रैल 2030 तक है। यानी अभी उनके कार्यकाल के करीब साढ़े तीन साल बाकी हैं।
अब यदि मुरुगन राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देते हैं और उनका इस्तीफा मंजूर हो जाता है, तो मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट खाली हो जाएगी। इसके बाद उस सीट पर उपचुनाव होगा। हालांकि, बीजेपी किसे उम्मीदवार बनाएगी, इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
यदि यह सीट खाली होती है, तो मध्य प्रदेश बीजेपी के कई बड़े नेता इस पर अपनी दावेदारी जता सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह सिर्फ संभावना है। पार्टी की ओर से अभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मुरुगन की जगह राज्यसभा में किसे भेजा जाएगा।
मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें
रिपोर्ट के मुताबिक इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। यह मात्र अटकल है। सरकार या भाजपा ने किसी फेरबदल की घोषणा नहीं की है।
मुरुगन के पास सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री का पद था। पुरानी रिपोर्टों के अनुसार वे संसदीय कार्य राज्य मंत्री भी रहे हैं। उनके विभाग अब किसे मिलेंगे, यह तय नहीं है। इसका फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
अब सबकी नजर तीन बातों पर रहेगी। क्या इस्तीफा स्वीकार होता है? क्या राज्यसभा सदस्यता भी जाती है? और क्या मंत्रिमंडल में बदलाव होता है? इन तीनों के जवाब अभी बाकी हैं।