पोषण आहार या लाड़ली बहना योजना? नियमों के फेर में फंसी एमपी की सात लाख आदिवासी महिलाएं, ये एक वजह बनी रुकावट

Aman Vaishnav | Oct 02, 2026, 10:28 IST
लाड़ली बहना और पोषण आहार योजना के पेंच में उलझीं एमपी की 7 लाख आदिवासी महिलाएं
मध्य प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजातियों की सात लाख महिलाएं सरकारी योजनाओं के पेंच में उलझ गई हैं। लाड़ली बहना योजना के क्लॉज 4.4 के कारण उन्हें अपात्र माना जा रहा है। उन्हें यह नुकसान पोषण आहार योजना का लाभ लेने से उठाना पड़ रहा है। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।

करीब सात लाख आदिवासी महिलाएं लाड़ली बहना योजना से बाहर हैं। ये महिलाएं बैगा भारिया सहरिया समुदाय की हैं। वजह बताई गई है पोषण आहार अनुदान योजना के 1500 रुपए।



मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई है। जनहित याचिका यानी जनता के हित में अर्जी लगाई गई है। यह याचिका रतलाम शहर के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने अधिवक्ता मनीष यादव के जरिए लगाई है। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग की व्याख्या पर सवाल उठाए गए हैं।



मुख्यमंत्री लाड़ली बहना 2023 और खाद्य या पोषण अनुदान योजना (Poshan Aahar Yojna) राज्य सरकार की दो महत्वाकांक्षी (ऊंचे लक्ष्य वाली) योजनाएं हैं। लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू हुई। क्लॉज की एक व्याख्या ने इन दोनों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।



क्लॉज 4.4 में आखिर लिखा क्या है?

Ladli Behna Yojana 2023 का क्लॉज 4.4 एक सीधी शर्त रखता है। क्लॉज के मुताबिक प्रतिमाह एक हजार रुपए या ज्यादा पाने वाली महिला इस योजना के लिए पात्र नहीं होगी। यह रकम उसे खुद किसी सरकारी योजना से मिल रही हो। पोषण आहार के 1500 रुपए इस सीमा से 500 रुपए ज्यादा हैं। पेंच यहीं है।



महिला एवं बाल विकास विभाग की व्याख्या

याचिका के मुताबिक विभाग ने क्लॉज का गलत अर्थ निकाला। उसने माना कि खाते में पोषण आहार के 1500 रुपए आ रहे हैं। इसलिए महिला खुद Poshan Aahar Yojana की राशि पाने वाली मानी गई। यानी वह लाड़ली बहना के 1000 से 1250 रुपए पाने के अयोग्य ठहरी।



रिपोर्ट के मुताबिक एक योजना का लाभ लेने पर दूसरी योजना छूट रही है। यही इस मामले की अहम बात है।



विधानसभा में मंत्री ने क्या माना?

अब जरा पीछे चलते हैं। बात 2 दिसंबर 2025 की है। विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने लिखित रूप से स्वीकार किया था। उनके मुताबिक क्लॉज 4.4 के तहत इन महिलाओं को अपात्र माना गया है। वजह यह बताई गई कि वे पोषण आहार योजना के 1500 रुपए ले रही हैं।



यानी मामला सिर्फ याचिका के दावे तक सीमित नहीं है। सरकार का अपना लिखित स्वीकार भी सामने है। सोचिए एक बार। क्या एक योजना का लाभ लेना दूसरी से वंचित होने की वजह बन सकता है?



हाई कोर्ट से क्या मांगा गया है?

याचिका की मांग सीधी है। लगभग सात लाख पात्र आदिवासी महिलाएं लाड़ली बहना योजना में शामिल हों। यानी जिन्हें अभी बाहर रखा गया है, उन्हें भी योजना का लाभ मिले।



विशेष पिछड़ी जनजाति की महिलाओं पर नजर

विशेष पिछड़ी जनजाति में बैगा, भारिया और सहरिया का नाम आता है। इन्हें प्रदेश की सबसे कमजोर और संवेदनशील जनजातियों में गिना जाता है।



यह खबर क्यों जरूरी है...

यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि मामला प्रदेश की सबसे कमजोर मानी जाने वाली जनजातियों की महिलाओं से जुड़ा है। करीब सात लाख महिलाओं का हक एक नियम की व्याख्या पर टिका है।



कल्याणकारी योजनाओं का मकसद जरूरतमंद तक मदद पहुंचाना है। अगर एक योजना का लाभ दूसरी योजना से रोके, तो सामाजिक न्याय और बराबरी के सवाल उठते हैं। अदालत का रुख आगे ऐसे दूसरे मामलों के लिए भी मिसाल बन सकता है।



FAQ



  1. बैगा भारिया सहरिया महिलाएं लाडली बहना योजना से बाहर क्यों हैं?
    क्लॉज 4.4 के तहत उन्हें अपात्र माना गया है। वे पोषण आहार योजना के 1500 रुपए पा रही हैं, जो 1000 रुपए की सीमा से ज्यादा है। मंत्री ने 2 दिसंबर 2025 को विधानसभा में लिखित रूप से यह स्वीकार किया था।
  2. लाड़ली बहना योजना के क्लॉज 4.4 में क्या प्रावधान है?
    प्रतिमाह 1000 रुपए या ज्यादा पाने वाली महिला पात्र नहीं होगी। यह रकम उसे खुद किसी सरकारी योजना से मिलनी चाहिए। याचिका के मुताबिक विभाग ने इसका गलत अर्थ निकाला।
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