लाड़ली बहना योजना जारी रखनी पड़ेगी, बहनों को गुस्सा आया तो खैर नहीं: शिवराज सिंह चौहान
दूसरे राज्यों में भी ऐसी योजनाएं
शिवराज के मुताबिक, मध्यप्रदेश के बाद दूसरे राज्यों में भी ऐसी योजनाएं शुरू हुईं। कहीं लाड़की बहना (Ladli Behna Yojana ), तो कहीं मैया सम्मान योजना चल रही है। इन नामों से महिलाओं को पैसे दिए जा रहे हैं। एक राज्य की पहल अब कई राज्यों तक पहुंच गई है।
पैसा आया तो घर में बढ़ा मान
शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) ने बचपन से गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं को देखा था। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों के सामने पैसे मांगने पड़ते थे। कई महिलाओं को पति से पैसे मांगने पड़ते थे। मायके जाने तक के लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे। इसी हालात को बदलने के लिए उन्होंने लाड़ली बहना योजना शुरू की थी।
योजना से पैसे मिले तो महिलाओं ने बताया कि घर में सम्मान बढ़ा है। सास और पति भी पहले से बेहतर व्यवहार करने लगे हैं। शिवराज के मुताबिक, यह सिर्फ आर्थिक सहायता की योजना नहीं थी। यह महिलाओं को सशक्त बनाने की पहल थी। मकसद था कि वे आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी के फैसले ले सकें।
महिलाएं अब खुद तय करती हैं वोट
शिवराज ने यह बात भी रखी। पहले माना जाता था कि मुखिया की पार्टी को ही परिवार वोट देगा। अब महिलाएं अपनी ताकत पहचान चुकी हैं। वे अपने मन से फैसला करती हैं कि वोट किसे देना है।
एक महिला पर दबाव और मारपीट का दावा
शिवराज ने एक महिला का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, महिला पर कांग्रेस को वोट देने का दबाव बना। यह दबाव लाड़ली बहना योजना के बाद बनाया गया। उसके साथ मारपीट भी हुई। महिला उनके पास आई। इसके बाद उन्होंने एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई।
1 लाख रुपए सालाना कमाई का लक्ष्य
शिवराज ने स्वयं सहायता समूह (महिलाओं का साझा समूह) की आमदनी पर बात की। उनके मुताबिक, सालाना आमदनी कम से कम 1 लाख रुपए होनी चाहिए। यह हर महीने करीब 8,333 रुपए बैठता है। इसके लिए उन्होंने प्रशिक्षण और बैंक की सहायता की बात कही। साथ ही कम ब्याज पर कर्ज की बात कही। मकसद है कि महिलाएं कारोबार शुरू कर सकें।
बिजली की समस्या पर मुख्यमंत्री से बात
शिवराज ने भोजपुर क्षेत्र में पानी और बिजली की समस्या का जिक्र किया। वे मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री से चर्चा करेंगे, यह उन्होंने कहा। मकसद है कि किसानों को पर्याप्त बिजली मिल सके।