लाड़ली बहना योजना में नाम जोड़ने के लिए पूर्व विधायक पारस सकलेचा की लगी PIL खारिज, 3000 रुपए किश्त की भी थी मांग

Sanjay Gupta | Feb 10, 2026, 20:42 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लाड़ली बहना योजना में नए नाम जोड़ने और 3000 रुपए किस्त की याचिका खारिज कर दी है। सरकार ने इसे अपना विशेषाधिकार बताया।

News in Short

  • पारस सकलेचा की जनहित याचिका, लाड़ली बहना योजना में नाम जोड़ने के लिए दायर की गई थी।
  • याचिका में 18 से 21 साल की युवतियों का नाम जोड़ने की मांग की गई थी।
  • 60 साल के बाद महिलाओं के नाम हटाने को गलत बताया गया, इसे जारी रखने की मांग की गई।
  • सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए इसे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के योग्य नहीं बताया।
  • न्यायालय ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और याचिका को खारिज कर दिया।

News in Detail

INDORE. मप्र की बहुचर्चित लाड़ली बहना योजना में नाम जोड़ने के लिए लगाई गई पूर्व विधायक पारस सकलेचा की जनहित याचिका खारिज हो गई है। याचिका में सकलेचा ने योजना में नाम नहीं जोड़ने को मौलिक अधिकारों का हनन बताया था। लेकिन सरकार के जवाब के बाद इसे खारिज कर दिया गया।



याचिका में इस तरह नाम जोड़ने की थी मांग

अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल के जरिए सकलेचा ने यह याचिका दायर की थी। इसमें कई मजबूत तर्क देते हुए नाम जोड़ने की मांग की गई थी।



  • याचिका में कहा गया था कि इसमें 21 से 60 साल तक की महिलाओं के नाम है। लेकिन बालिग उम्र 18 साल है तो फिर 18 से 21 साल की युवतियों के नाम क्यों नहीं जोड़े जा रहे हैं। यह मौलिक अधिकारों का हनन है।
  • याचिका में यह भी तर्क था कि 60 साल के बाद महिलाओं के नाम हटा दिए जाते हैं, यह गलत है, इसे बनाकर रखा जाए
  • याचिका में एक अहम तर्क था कि 20 अगस्त 2023 के बाद नए नाम नहीं जोड़़े गए हैं। यह भी संविधान के मौलिक अधिकार 14 का उल्लंघन है।

किस्त भी 3000 करने की थी मांग

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि मुख्यमंत्री ने ही इसकी किश्त 3 हजार रुपए प्रति माह करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी भी 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। इसे भी लागू किया जाए।



सरकार ने यह रखे तर्क

इस पर सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने याचिका का विरोध किया। तर्क देते हुए कहा गया कि याचिका में की गई सभी मांग सरकार का विशेषाधिकार है। सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप योग्य नहीं है। इसके बाद जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने याचिका नामंजूर कर दी।



यह खबरेंं भी पढ़ें..



इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से दो साल की बच्ची और एक बुजुर्ग की मौत, कुल 35 हो गई



इंदौर में पुलिसकर्मी ही लूट में शामिल, दो सिपाही और बदमाशों ने मिलकर 6 लाख लूटे



इंदौर में बैंक कर्मचारी ने खुद को गोली मारी, कोर्ट के आदेश पर कुर्की के लिए पहुंचे थे बैंक अधिकारी



आरक्षक की पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी मुआवजा देने का इंदौर जिला कोर्ट आदेश



Tags:
  • लाड़ली बहना योजना
  • हाईकोर्ट
  • पारस सकलेचा
  • मुख्यमंत्री
  • जनहित याचिका