आरक्षक ने लहार विधायक पर डाली पोस्ट, निलंबित, अब SDOP और TI पर भी लगाए आरोप
समझें क्या है पूरा मामला...
- विधायक पर फिर पोस्ट डाली, आरक्षक निलंबित।
- भिंड में आरक्षक ने एसडीओपी पर लगाए आरोप।
- लाइन अटैच के बाद भी नहीं रुका आरक्षक।
- टीआई पर दस हजार के लेनदेन का आरोप।
- लहार विधायक विवाद में आरक्षक निलंबित हुआ।
आरक्षक आलोक राठौर ने लहार विधायक के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट डाली। पोस्ट के बाद विधायक ने एसपी से शिकायत की थी। एसपी ने कार्रवाई करते हुए आरक्षक को लाइन अटैच किया था। इसके बाद आरक्षक ने विधायक पर फिर पोस्ट डाल दी। अब आरक्षक ने एसडीओपी और टीआई पर भी आरोप लगाए हैं।
भिंड में आरक्षक आलोक राठौर फिर विवादों में हैं। उन्होंने लहार से बीजेपी विधायक अंबरीश शर्मा पर दोबारा पोस्ट डाली है। इसके बाद एसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया। आरक्षक ने एसडीओपी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
फिर पोस्ट डालकर बढ़ाया विवाद
भिंड पुलिस आरक्षक का मामला फिर गरमा गया है। मिहोना थाने में पदस्थ चालक आरक्षक आलोक राठौर चर्चा में हैं। उन्होंने लहार विधायक अंबरीश शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट डाली। इस पोस्ट में विधायक को चेतावनी देने की बात सामने आई है।
इसके बाद पुलिस विभाग में शिकायतों का दौर शुरू हुआ। विधायक अंबरीश शर्मा ने एसपी से मामले की शिकायत की। अन्य लोगों ने भी आरक्षक की पोस्ट पर शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने आरक्षक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
14 अगस्त को हुआ था लाइन अटैच
एसपी सूरज कुमार वर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया। मिली जानकारी के अनुसार आरक्षक को 14 अगस्त को लाइन अटैच किया गया। इसके बावजूद सोशल मीडिया विवाद थमता नजर नहीं आया। आरक्षक ने बुधवार रात करीब नौ बजे फिर पोस्ट डाली।
इस बार भी पोस्ट में विधायक का जिक्र किया गया। पोस्ट को लेकर पुलिस विभाग में फिर हलचल बढ़ गई। बताया गया कि पोस्ट आदित्य ठाकुर की आईडी से डाली गई। हालांकि पोस्ट में आरक्षक आलोक राठौर के फोटो थे। एसपी ने इस मामले की जांच कराई। जांच के बाद आरक्षक को निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के बाद एसडीओपी पर आरोप
निलंबन के बाद आरक्षक ने नया आरोप लगा दिया। उन्होंने लहार एसडीओपी प्रमोद त्रिपाठी को जिम्मेदार बताया। आरक्षक ने एसडीओपी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।
मीडिया ने जब एसडीओपी से मामले पर सवाल किया, तो उन्होंने आरक्षक की पोस्ट को नशे से जोड़कर बताया। उनका कहना था कि आरक्षक नशे में पोस्ट डाल रहा था। हालांकि इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।
टीआई पर दस हजार रुपए का आरोप
आरक्षक ने लहार टीआई शिव सिंह यादव पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दस हजार रुपए के लेनदेन का स्क्रीनशॉट भी दिखाया। इस स्क्रीनशॉट को लेकर टीआई ने अपना पक्ष रखा।
टीआई ने बताया कि यह घटना वर्ष 2022 की है। उनके अनुसार तब वह लहार थाने में पदस्थ थे। आरक्षक दीपक यादव ने उनसे आर्थिक मदद ली थी। टीआई के मुताबिक रकम बाद में वापस कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि इसका भुगतान फोन से किया गया था। आरक्षक द्वारा दिखाया गया स्क्रीनशॉट इसी लेनदेन का बताया गया है।
पहले भी मिलती रही शिकायतें
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरक्षक पहले भी विवादों में रहा है। उसके खिलाफ कई शिकायतें मिलने की बात कही गई है। विभाग ने उसके व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
अधिकारियों ने उसके शराब पीने की आदत का दावा किया। पुलिस के अनुसार ड्यूटी के दौरान भी विवाद सामने आए। इसके चलते उसे पहले भी लाइन अटैच किया गया था। हालांकि इस कार्रवाई की पूरी फाइल सार्वजनिक नहीं है।
मिहोना थाने में कैसे पहुंचा आरक्षक
एसपी के अनुसार करीब पांच महीने पहले मामला शुरू हुआ था। मिहोना थाना प्रभारी रोहित गुप्ता ने सिफारिश की थी। इसके बाद आलोक राठौर को मिहोना थाने भेजा गया। उसे मछंड चौकी से मिहोना थाने में पदस्थ किया गया था।
मिहोना में उसे वाहनों की जांच की जिम्मेदारी मिली थी। इनमें रेत और तूरी से जुड़े वाहन शामिल थे। इसी दौरान उसके व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आईं। पुलिस के अनुसार बाद में उसे लाइन अटैच किया गया।
पत्नी और सड़क हादसे से जुड़े पुराने मामले
पुलिस अधिकारियों ने आरक्षक के पुराने विवादों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार पत्नी ने भी उसके खिलाफ केस दर्ज कराया था। यह मामला दहेज मांगने से जुड़ा बताया गया है। एक व्यक्ति ने उसके खिलाफ हादसे का केस भी दर्ज कराया था।
इन मामलों की मौजूदा कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन्हें आरक्षक के खिलाफ साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी आरोप का फैसला जांच और अदालत से ही होता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामला सोशल मीडिया पोस्ट से आगे बढ़ चुका है। अब आरक्षक के आरोपों की जांच भी अहम होगी। एसडीओपी और टीआई ने अपने पक्ष सामने रखे हैं। आरक्षक की ओर से लगाए आरोपों की जांच अभी बाकी है।
पुलिस कार्रवाई के बाद विभागीय प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। इस मामले में सोशल मीडिया पोस्ट मुख्य वजह बनी है। साथ ही पुलिसकर्मी की सेवा संबंधी भूमिका भी जांच के दायरे में है। अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
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