एमपी में लखपति दीदियों की कमाई को लगा रिवर्स गियर, अब आय हजारों में सिमटी
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में सवा लाख से ज्यादा लखपति दीदियों की आय गिरी।
- एक तिहाई महिलाओं की सालाना कमाई 25 हजार से कम हुई।
- 16 जून की सरकारी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
- गणवेश बनाने और मार्केटिंग का काम बंद होना बड़ी वजह है।
- आजीविका मिशन अभी बिना सीईओ (Chief Executive Officer) के काम कर रहा है।
लखपति दीदी योजना क्या है
सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए Lakhpati Didi Yojana शुरू की थी। इस योजना के तहत स्वसहायता समूह (Self Help Group) की महिलाओं को यह दर्जा मिलता है। नियम के मुताबिक किसी महिला की सालाना कमाई लगातार तीन साल तक 1 लाख रुपए से ज्यादा रहनी चाहिए। तभी उसे लखपति दीदी माना जाता है।
मध्य प्रदेश में साल 2023 में करीब 15 लाख महिलाएं इस श्रेणी में थीं। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 2026 में बढ़कर 16.44 लाख हो गई। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाला सच सामने रखा है।
आय में भारी गिरावट
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की रिपोर्ट 16 जून को आई। इसमें बताया गया कि सवा लाख से ज्यादा लखपति दीदियों की कमाई गिर गई है। जो महिलाएं पहले सालाना 1 लाख रुपए से ज्यादा कमाती थीं, अब उनकी आय हजारों में रह गई है। यह रिपोर्ट पिछले तीन साल के आंकड़ों पर आधारित है।
कुल 1.35 लाख महिलाएं ऐसी मिलीं, जो लगातार तीन साल लखपति दीदी रहीं। इनमें से 31 हजार 867 महिलाओं की सालाना आय अब 25 हजार रुपए से भी कम है। एक लाख से ज्यादा महिलाओं की कमाई 25 से 60 हजार रुपए के बीच सिमट गई है। यानी एक तिहाई महिलाओं की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है।
दीदियों की आपबीती
बड़वानी की वैशाली चौधरी प्रेरणा शक्ति स्वसहायता समूह से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि पहले गणवेश बनाने का काम खूब मिलता था। तब 20 से 25 लाख महिलाएं यही काम करती थीं। मसाले, पापड़ और आटा-दाल जैसी चीजें स्कूल व हॉस्टल में बिकती थीं। मेले भी लगते थे, जिससे अच्छी कमाई होती थी। लेकिन अब यह सब बंद हो गया है। उनका कहना है कि प्रोडक्ट की मार्केटिंग नहीं हो रही है।
हाटपिपल्या की सुनीता गोस्वामी ओम नम: स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं। उनकी मासिक आय अभी सिर्फ 20 से 25 हजार रुपए है। उनका कहना है कि ज्यादातर महिलाएं सिलाई का काम करती थीं। लेकिन सरकार ने यह काम बंद (महिला रोजगार योजनाएं) कर दिया। इससे पहले अच्छी कमाई होती थी। उनकी मांग है कि आजीविका मिशन को फिर ध्यान देना चाहिए।
जिलों का हाल
विभाग हर तीन साल में इस योजना का सर्वे करता है। अब नए सिरे से रिव्यू की तैयारी चल रही है। साल 2023-24 के सर्वे में जो महिलाएं लखपति दीदी बनी थीं, उनमें से 70 फीसदी की आय अब 1 लाख रुपए से कम हो गई है। मुरैना और भोपाल में यह गिरावट 45 फीसदी तक देखी गई है। पांढुर्ना में 42 फीसदी, भिंड में 41 फीसदी और आलीराजपुर में 39 फीसदी महिलाओं की कमाई घट गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि समस्या पूरे प्रदेश में फैली हुई है।
तीन साल में महिलाओं की आय में गिरावट
| जिला | महिलाओं की आय में गिरावट |
|---|---|
| छिंदवाड़ा | 10,716 |
| गुना | 17,433 |
| डिंडोरी | 11,758 |
| रायसेन | 11,579 |
2024-25 में सबसे ज्यादा गिरावट वाले जिले
| रैंक | जिला | गिरावट |
|---|---|---|
| 1 | सागर | 31,392 |
| 2 | गुना | 24,756 |
| 3 | राजगढ़ | 16,115 |
| 4 | शिवपुरी | 15,467 |
| 5 | धार | 15,465 |
मिशन में सीईओ नहीं
इस बीच मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन में बड़ा बदलाव हुआ है। मिशन की सीईओ हर्षिका सिंह का तबादला हो चुका है। उनकी जगह विनय निगम को नई जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन उन्होंने अभी तक पद नहीं संभाला है। दरअसल उनकी पुरानी जगह पाठ्यपुस्तक निगम में नए एमडी (Managing Director) रोहित सिंह ने जॉइन नहीं किया है। इस वजह से आजीविका मिशन अभी बिना सीईओ के चल रहा है। ऐसे समय में जब आय गिरने का मामला सामने आया है, यह स्थिति और गंभीर मानी जा रही है।
सरकार का अगला कदम
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव दिनेश जैन ने इस मामले में जानकारी दी। उनके मुताबिक हर उस दीदी की मैन-टू-मैन मैपिंग होगी, जो एक बार लखपति बनकर बाहर हो गई। इसका मकसद उन्हें दोबारा लखपति दीदी की श्रेणी में लाना है। अलग-अलग विभागों से तालमेल करके उनकी आजीविका सुधारने की योजना है। जिला पंचायतों के सीईओ अब हर महिला की इनकम का रिव्यू करेंगे। सरकार का दावा है कि जल्द ही स्थिति सुधरेगी। लेकिन जमीनी स्तर पर काम और मार्केटिंग सुविधाएं बढ़ाए बिना यह मुश्किल लग रहा है।
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