जमीन विवाद से त्रस्त मीसाबंदी: कलेक्टर को लौटाएंगे सम्मान पत्र, BJP नेता पर गंभीर आरोप

Pawan Modiya | Mar 17, 2026, 21:46 IST
Photograph: (the sootr)
जमीन विवाद से परेशान मीसाबंदी जयनारायण साहू ने भाजपा नेता पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। 3 साल से न्याय नहीं मिलने पर वे कलेक्टर को सम्मान पत्र लौटाने और अनशन की चेतावनी दे रहे हैं।

मध्यप्रदेश के शहपुरा क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक लोकतंत्र सेनानी (मीसाबंदी) ने स्थानीय भाजपा नेता पर जमीन हड़पने का आरोप (Land Grabbing Allegation) लगाया है। न्याय न मिलने से परेशान होकर पीड़ित ने अब प्रशासन के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए कलेक्टर को अपना सम्मान पत्र लौटाने की घोषणा कर दी है।



यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे प्रभावशाली लोगों के सामने आम नागरिक की आवाज दब जाती है।



क्या है पूरा मामला?

शहपुरा निवासी जयनारायण साहू, जो कि एक लोकतंत्र सेनानी (Democracy Activist) हैं, ने आरोप लगाया है कि उनकी निजी जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। यह जमीन उमरिया रोड स्थित खसरा नंबर 132/2 में आती है। उनका आरोप है कि भाजपा के शहपुरा मंडल अध्यक्ष भजन दास चक्रवर्ती द्वारा उस जमीन पर टपरा रखकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।



मारपीट और धमकी के भी आरोप

पीड़ित ने यह भी बताया कि जब उन्होंने इस कब्जे का विरोध किया, तो उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।



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तीन साल से न्याय का इंतजार

जयनारायण साहू का कहना है कि वह पिछले तीन वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कई बार एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस को शिकायत दी, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।



उनका आरोप है कि आरोपी के राजनीतिक प्रभाव के कारण प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है।



सम्मान पत्र लौटाने की चेतावनी

मंगलवार को जयनारायण साहू कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे अपना सम्मान पत्र वापस कर देंगे।



इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे भोपाल में मुख्यमंत्री निवास के सामने आमरण अनशन करेंगे।



प्रशासन का क्या कहना है?

कलेक्टर अंजू भदौरिया ने पीड़ित को आश्वासन दिया है कि मामले की जल्द जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब तीन साल से शिकायतें की जा रही थीं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?



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राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक निष्क्रियता

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की जमीन का नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निष्क्रियता (Administrative Inaction) और राजनीतिक दबाव (Political Influence) का भी उदाहरण बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे जनता का सिस्टम पर भरोसा कमजोर होता है।



जमीन विवाद के बढ़ते मामले

मध्यप्रदेश सहित देशभर में जमीन विवाद (Land Dispute) और अवैध कब्जे के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऐसे मामलों में अक्सर प्रभावशाली लोग कमजोर वर्गों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं।



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