डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में वकालत के छात्र न वकील बन सकेंगे ना ही सिविल जज
Sagar University Recognition: सागर के डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में विधि पाठ्यक्रम बिना बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council of India) की मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इसके चलते यहां से डिग्री लेने वाले लगभग 2500 विद्यार्थी वकालत, सिविल जज (Civil Judge), एडीपीओ (ADPO) जैसे पदों के लिए अयोग्य करार दिए गए हैं। जिसके चलते अब विश्वविद्यालय के छात्र इसका विरोध कर रहे हैं।
मान्यता की समस्या
फीस का विवाद
बार काउंसिल को मान्यता शुल्क के रूप में 88 लाख रुपए देने थे, जिसमें से 59 लाख रुपए का भुगतान होने का दावा किया गया। हालांकि, छात्रों को इसकी रसीद या सबूत नहीं दिखाया गया।
ये खबर भी पढ़ें...
स्कूलों की मान्यता की आखिरी तारीख खत्म, 6 हजार+ प्राइवेट स्कूलों ने नहीं किया
छात्र कर रहे हैं विरोध
पिछले दो साल से छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को छात्रों ने मुख्य कार्यालय के सामने धरना दिया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा।
ये खबर भी पढ़ें...
MPESB में निकली भर्ती : हर महीने मिलेगी 60 हजार सैलरी, जल्द करें आवेदन
अंधकार में है भविष्य
विवि प्रशासन ने शाम तक 13.50 लाख रुपए जमा करने का वादा किया, परंतु देर शाम तक भी कोई रसीद नहीं दी गई। लगभग 450 छात्र वर्तमान में यहां एलएलबी, एलएलएम और पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं। मान्यता न होने के कारण इनका भविष्य अंधकार में है।
ये खबर भी पढ़ें...
MP ऑनलाइन भर्ती का नोटिफिकेशन हुआ जारी, इन जिलों में होगी पोस्टिंग
हाईकोर्ट का दखल
बीते साल 2024 के अक्टूबर में उच्च न्यायालय ने बिना मान्यता के कोर्स संचालन पर विश्वविद्यालय और बार काउंसिल से जवाब तलब किया था।
ये खबर भी पढ़ें...
मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर वन अधिकारियों के तबादले, यहां देखें पूरी लिस्ट
FAQ
- डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के विधि पाठ्यक्रम मान्यता प्राप्त क्यों नहीं हैं?
विश्वविद्यालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता के लिए आवश्यक शुल्क जमा नहीं किया है। - बिना मान्यता के विधि डिग्री धारक क्या नहीं कर सकते?
ऐसे डिग्री धारक वकालत के लिए पंजीकरण, सिविल जज और अन्य न्यायिक पदों के लिए अयोग्य माने जाते हैं। - छात्रों का विरोध प्रदर्शन कब और क्यों हुआ?
छात्रों ने 10 फरवरी 2025 को मुख्य कार्यालय के सामने मान्यता को लेकर प्रदर्शन किया। - हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए थे?
हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2024 में विश्वविद्यालय और बार काउंसिल को बिना मान्यता कोर्स संचालन पर जवाब देने को कहा था।